घोषणा पत्र में नहीं डालते राम मंदिर मुद्दा तो भाजपा पर टूट पड़ता कहर

BJP Manifesto
भारतीय जनता पार्टी ने अपना घोषणा पत्र जारी किया, जिसमें राम मंदिर बनाने के संकल्प को उसमें शामिल किया। इस मुद्दे को देखते ही नई बहस छिड़ गई कि अगर नरेंद्र मोदी विकास के मॉडल पर चल रहे हैं, तो वोट बटोरने के लिये उन्हें राम मंदिर का सहारा क्यों लेना पड़ा। तमाम राजनीतिक दलों से तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि भाजपा ने हिंदू वोट जुटाने के लिये राम मंदिर मुद्दे को घोषणा पत्र में शामिल किया है, तो आप गलत हैं, इसका मुख्य उद्देश्य देश के उन सभी युवाओं को संगठित करना है, जो भाजपा से किसी न किसी रूप में जुड़े हैं। [भाजपा का घोषणा पत्र]

कौन संगठित करेगा नये सदस्यों को

भजपा वह वृक्ष है, जिसका बीजारोपण विशेष मौलिक सिद्धांतों के आधार पर हुआ लेकिन उसमें खाद डालने का काम राम मंदिर मुद्दे ने किया। इसी खाद की बदौलत भाजपा रूपी यह पेड़ बड़ा हुआ। यही कारण है कि भाजपा में एक वर्ग ऐसा है, जो उन्हीं मौलिक सिद्धांतों पर अटल है और साथ ही राम मंदिर मुद्दा उनके लिये सबसे महत्वपूर्ण है। खास बात यह है कि यही कोर सदस्य ही भाजपा के उन सदस्यों को संगठित करने का काम कर सकते हैं, जो हाल ही में ट्व‍िटर, फेसबुक की लहर के चलते भाजपा से जुड़े, जो मोदी के प्रेम में बहकर भाजपा की चौखट तक आ गये, जो विकास के मॉडल को देख रात दिन नमो-नमो करने लगे।

अगर नहीं हो मंदिर मुद्दा तो

भाजपा के नये समर्थक करोड़ों की संख्या में हैं, लेकिन जरूरी नहीं है कि ये करोड़ों समर्थक भाजपा के वोटबैंक में तब्दील हो जायें। इन करोड़ों लोगों को मतदाताओं में परिवर्तित करने का काम भाजपा के वही कोर सदस्य करते हैं जो अपने दिल में राम मंदिर बनाने का संकल्प लिये घूम रहे हैं। ये वो कोर सदस्य हैं, जो शहर-शहर, गांव-गांव जाकर लोगों को भाजपा से जोड़ने का काम करते हैं। फिर चाहे वो जिला प्रचारक, हो या ब्लॉक प्रचारक या फिर खाकी कपड़े पहनने वाला जनसंघी। भाजपा के समर्थन को वोट में परिवर्तित करना सिर्फ इन्हीं हो ही आता है।

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