आंध्र प्रदेश में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए वाईएसआरसीपी नेता क्यों अनिच्छुक हैं, जानें वजह?
Andhra Pradesh YSRCP:आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव दोनों की एक साथ तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 27 जनवरी को विशाखापत्तनम से सिद्धम -तेलुगु के साथ चुनाव अभियान का आगाज कर चुके हैं।

वहीं जगन की पार्टी ने अप्रैल/मई चुनाव से पहले राज्य में विधानसभा और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के प्रभारियों की छह लिस्ट जारी की है। जिसमें लोकसभा क्षेत्रों के लिए 16 प्रभारी और विधानसभा सीटों के लिए लगभग 64 संभावित उम्मीदवार शामिल हैं।
हालांकि विशाखापत्तनम में सत्तारूढ़ पार्टी की विशाल रैली और प्रभारियों की सूची के बावजूद पार्टी कई कारकों की वजह से होने वाली अशांति से बचने की कोशिश कर रही है।
इसकी वजह है कि वाईएसआरसीपी के 22 में से तीन सांसद जिनमें मछलीपट्टनम के सांसद बालाशोवरी वल्लभनेनी, नरसरावपेट के सांसद लावु श्री कृष्ण देवरायलू और कुरनूल के सांसद डॉ. संजीव पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। हैं। वहीं अब सांसद कनुमुरु रघु राम कृष्ण राजू 2019 में अपनी जीत के बाद से ही पार्टी के खिलाफ विद्रोह कर रहे हैं।
अभियान के जोर पकड़ने से पहले ही आवश्यक जमीनी कार्य कर सके इसी उद्देश्य से वाईएसआरसीपी ने प्रभारियों को क्षेत्र समय से पहले ही आवंटित कर दिए हैं। हालांकि निर्वाचन क्षेत्रों में कुछ खास होता नहीं दिख रहा है। प्रभारी इतना शोर-शराबा नहीं कर रहे हैं कि जो जनता को दिखाई और सुनाई दे। इसकी कई वजहें हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पिछले साढ़े चार वर्षों में वाईएसआरसीपी की जनता के साथ जुड़ाव की कमी, विधायकों द्वारा असहयोग और गैर-स्थानीय छवि रही है। इन कारकों ने कई प्रभारियों को उन्हें सौंपे गए निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने में उदासीन बना दिया है।
2019 में वाईएसआरसीपी ने 25 लोकसभा सीटों में से 22 सीटें जीती थीं, जबकि टीडीपी के पास सिर्फ तीन सीटें थीं। इस जबरदस्त जीत का श्रेय पूरे राज्य में चली "जगन लहर" को दिया गया। ये कहा गया कुछ के अलावा अन्य जीतने वाले उम्मीदवारों की जीत उनके वोटरों के साथ उनके व्यक्तिगत बंधन के कारण नहीं बल्कि केवल जगन की वजह से चुनाव जीता।
राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. वीरराजू का कहना है कि 2024 में अब 2019 से अगल लहर है। 2019 में जगन लहर पर सवार होकर जीत हासिल करने वाले कई राजनेता जनता के लिए नए थे। उन्होंने कहा टीडीपी और वाईएसआरसीपी दोनों ही क्षेत्रीय पार्टियां हैं और राष्ट्रीय मुद्दे उनके लिए बहुत कम चिंता का विषय हैं।












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