राम रहीम के बाद अब आसाराम पर आफत, धीमी सुनवाई पर गुजरात सरकार को SC की फटकार
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आसाराम बापू के खिलाफ मुकदमे की धीमी गति से प्रगति के लिए गुजरात सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। बता दें कि गुजरात में आसाराम बापू पर एक बलात्कार का मामला चल रह है। देरी पर दुख व्यक्त करते हुए, अदालत ने यह भी जानना चाहा कि विशेष मामले में पीड़ित को अब तक क्यों जांच नहीं की गई है अदालत ने पूछा 'ट्रायल में देरी क्यों ? आपने अभी तक पीड़िता की जांच क्यों नहीं की है? अब तक की प्रगति के बारे में हमें बताई गई एक शपथ पत्र फ़ाइल करें।'

गौरतलब है कि जोधपुर पुलिस ने 3 अगस्त 2013 को आसाराम को गिरफ्तार कर लिया था और उसके बाद से वह जेल में है। बता दें कि सूरत की रहने वाली महिला ने आसाराम पर 1997 और 2006 के बीच यौन उत्पीड़न पर आरोप लगाया है। फिलहाल आसाराम जोधपुर की एक जेल में बंद हैं।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2017 में कहा था कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकार आसाराम बापू के मामले में चश्मदीदों को उचित सुरक्षा दें। जस्टिस अर्जन कुमार सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने इस मामले अंतरिम आदेश पास किए थे।
याचिकाकर्ताओं का कहना था...
अदालत ने यह आदेश चार गवाहों के वकील की याचिका पर दिया था। याचिकाकर्ताओं के वकील, उत्सव बैंस ने कोर्ट में मामले से जुड़ी बहस की और चारों गवाहों के लिए पूर्ण सुरक्षा मांगी। बैंस ने कहा कि इस मामले में चश्मदीदों की हत्या की जांच SIT या CBI के जरिए कराए जाने की मांग की। रिपोर्ट्स की मानें तो 10 गवाहों में से 7 पर हमला किया जा चुका है और 3 की हत्या हो चुकी है।












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