कौन हैं पूर्व खुफिया अधिकारी विकास यादव, जिन्होंने बढ़ाई अमेरिका की दिक्कत, क्यों हो रही चर्चा
अमेरिका ने आरोप लगाया है कि खालिस्तान समर्थन गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने में पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी शामिल है। अमेरिका के न्याय विभाग की ओर से इस अधिकारी का नाम सार्वजनिक करते हुए उसकी तस्वीर को भी सार्वजनिक किया गया है और उसे वॉन्टेड घोषित किया गया है।
अमेरिका का कहना है कि अधिकारी का नाम विकास यादव है, जो अभी तक अमेरिका में ही था, लेकिन कुछ समय पहले उसे वापस बुला लिया गया है।

भारत की जांच से संतुष्ट अमेरिका
इस पूरे मामले में अमेरिका की ओर से कहा गया था कि वह भारत की ओर से इस मामले में की जा रही जांच से संतुष्ट है। अमेरिका ने कहा कि हमने विकास यादव पर तीन आरोप लगाए हैं, जिसमे से दो मामले पन्नू की हत्या की साजिश से जुड़े हैं, जबकि एक मामला मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश का है।
अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार विकास यादव फिलहाल सरकारी अधिकारी नहीं है। जबकि अमेरिका के न्याय विभाग का कहना है कि विकास फिलहाल फरार है,उसकी तलाश की जा रही है।
अमेरिका की दो टूक
अमेरिका की खुफिया एजेंसी एफबीआई के डायरेक्टर क्रिस्टोफर रे ने कहा कि एफबीआई हिंसा की घटनाओं को कतई स्वीकार नहीं करेगा। अमेरिका में रहने वाले लोगों से बदला लेने की कोशिश को भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अमेरिका में रहने वाले लोगों के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रहें।
आतंकी पन्नू की हत्या की साजिश
अमेरिका के न्याय विभाग की ओर से कहा गया है कि पन्नू की हत्या की साजिश की शुरुआत पिछले वर्ष मई माह में हुई थी। अमेरिकी एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि इसमे विकास यादव का हाथ है। वह भारत में और बाहर सक्रिय एजेंट के संपर्क में था।
भारत ने पन्नू को आतंकी घोषित किया
अहम बात है कि भारत की ओर से गुरपतवंत सिंह पन्नू को आतंकी घोषित किया गया है, उसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि विकास यादव ने निखिल गुप्ता को पन्नू की हत्या के लिए हायर किया था। उसे पन्नू के कत्ल की जिम्मेदारी मिली थी। फिलहाल अमेरिका इस मामले की जांच कर रहा है।
क्या है आरोप
अमेरिकी एजेंसी की ओर से मैनहट्टन की कोर्ट में कहा गया है कि विकास यादव ने ही निखिल गुप्ता को हायर किया था। इसके बाद निखिल गुप्ता ने इस हत्या की साजिश रची। निखिल गुप्ता पिछले वर्ष जून माह में भारत से प्राग गया था। यहां चेक गणराज्य प्रशासन ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तार होने के बाद निखिल ने खुद को निर्दोष बताया था।












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