मणिपुर में बीजेपी सरकार बनाने के पीछे कौन है मुख्य रणनीतिकार?

बीजेपी मणिपुर में सरकार ऐसे ही नहीं बन रही है। इसके पीछे पार्टी के रणनीतिकारों की कड़ी मेहनत और संघर्ष है।

नई दिल्ली। बीजेपी मणिपुर में सरकार ऐसे ही नहीं बन रही है। इसके पीछे पार्टी के रणनीतिकारों की कड़ी मेहनत और संघर्ष है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस विधानसभा चुनाव में पार्टी को करीब 20 गुना वोट प्रतिशत बढ़ा है और ये एक चमत्कार ही है। आखिर इसका मास्टरमाइंड कौन है।

who is main strategist of bjp to form new government in manipur

दरअसल पार्टी ने इसकी शुरूआत उस वक्त ही कर दी थी जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद प्रहलाद पटेल को प्रभारी नियुक्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उनकी संगठन क्षमता को भांपते हुए भरोसे के साथ उन्हें मणिपुर भेजा और उनका आकलन सही साबित हुआ।

पटेल को पूर्व में भी पार्टी ने जो जिम्मा सौंपा उसे उन्होंने बखूबी निभाया और इसीलिए उन्हें ऐसी जिम्मेदारी सौंपी गई जो आसान नहीं थी। पटेल ने भी इसे गंभीरता के साथ अंजाम दिया। जब नवंबर 2015 में उपचुनाव हुए तो पार्टी ने दोनों सीटों पर जीत हासिल की। इसके बाद नगर पालिका और नगर पंचायत चुनाव में पार्टी ने अपना खासा प्रभाव जमाया। यही नहीं इंफाल नगर निगम में भी पार्टी ने दमदार उपस्थिति दर्ज की। धीरे धीरे कर बीजेपी ने यहां कांग्रेस की जड़ें कमजोर कीं। उधर कांग्रेस 15 साल की सरकार के बलबूते पर इस चुनाव को जितना आसान समझ रही थी, बीजेपी उतना ही कठिन।

चुनाव आते आते पार्टी कांग्रेस के साथ कड़े मुकाबले के लिए तैयार थी। यही नहीं टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार में बीजेपी ने यहां पूरी ताकत झोंक दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, प्रकाश जावडेकर,डा.जितेंद्र सिंह, किरण रिजिजू समेत तमाम नेताओं की सभाएं हुईं। तब जाकर पार्टी 36 प्रतिशत मत हासिल करने में कामयाब रही जबकि बीजेपी को 2012 के चुनाव में मात्र 2.12 प्रतिशत ही वोट मिले थे। यही नहीं कांग्रेस का वोट प्रतिशत गिर गया। उसे पिछले चुनाव में 42.42 प्रतिशत वोट मिला था जबकि इस बार 35.1 प्रतिशत वोट ही पार्टी ले पाई। ये साफ है कि बीजेपी का वोट प्रतिशत कांग्रेस से ज्यादा रहा। इसके बावजूद पार्टी की सात सीटें कांग्रेस से कम रहीं। साल 2012 के चुनाव में एनसीपी को भी 7.23 प्रतिशत वोट मिले थे जो इस बार केवल एक फीसदी रह गए।

पार्टी ने कम सीट पाने के बाद भी वक्त नहीं गंवाया। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव और प्रभारी प्रहलाद पटेल ने मिलकर बाकी दलों के समर्थन से सरकार बनाने में कामयाबी हासिल कर ली जबकि कांग्रेस ज्यादा सीट पाकर भी रह गई। नार्थ ईस्ट में पार्टी की दूसरी सरकार बनाने का श्रेय प्रहलाद पटेल को दिया जा रहा है और माना जा रहा है कि पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेता पटेल का कद बढ़ना तय है।

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