कौन हैं अन्नपूर्णा देवी, हाउस वाइफ से कैसे बनीं मोदी कैबिनेट में मंत्री, पति की अचानक मौत के बाद हुआ कुछ ऐसा
Annapurna Devi Minister: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट 3.0 में झारखंड से आने वालीं अन्नपूर्णा देवी को केंद्रीय मंत्री बनाया गया है। इससे पहले भाजपा ने उन्हें शिक्षा राज्य मंत्री बनाया था। इस बार विश्वास जताते हुए उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया है। अन्नपूर्णा देवी दूसरी बार कोडरमा से जीती हैं।
55 वर्षीय हाउस वाइफ अन्नपूर्णा देवी का कैबिनेट मंत्री बनना चर्चा का विषय है। अन्नपूर्णा देवी का पूरा नाम अन्नपूर्णा देवी यादव है। अन्नपूर्णा देवी भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में से एक हैं। अन्नपूर्णा देवी पहले राष्ट्रीय जनता दल में थीं। फिर बीजेपी में आ गई थीं।

Annapurna Devi Political Career: अन्नपूर्णा देवी का राजनीतिक सफर
अन्नपूर्णा देवी की राजनीतिक यात्रा 1998 में शुरू हुई थी, जब उनके पति रमेश यादव की अचानक मृत्यु हो गई थी। जो राजद विधायक थे। इस घटना ने उन्हें राजनीति में धकेल दिया और उन्होंने सियासत की दांव पेंच सीखी है।
पति की मौत के अन्नपूर्णा देवी का शुरू में राजनीति में उतरने का कोई इरादा नहीं था। लेकिन 1998 में जब उन्होंने विधानसभा उपचुनाव जीता तो हालात बदल गए। वे बिहार विधानसभा की सदस्य बनीं और आरजेडी सरकार में खान एवं भूविज्ञान राज्य मंत्री रहीं।
अन्नपूर्णा देवी का राजनीतिक प्रभाव आरजेडी के भीतर काफी बढ़ गया था। उन्होंने 2005 से 2014 तक झारखंड विधानसभा में दो कार्यकाल पूरे किए। 2012 में उन्हें झारखंड में कैबिनेट मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया, जिसमें सिंचाई, महिला एवं बाल कल्याण और पंजीकरण मंत्रालय का कार्यभार संभाला।

क्यों RJD छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं अन्नपूर्णा देवी?
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अचनाक अन्नपूर्णा देवी भाजपा में शामिल हो गईं। कोडरमा से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने बाबूलाल मरांडी को 4.55 लाख वोटों के अंतर से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। यह जीत प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के शीर्ष नेताओं के प्रचार की वजह से भी था।
अन्नपूर्णा देवी को क्यों बनाया गया मंत्री?
मोदी सरकार में अन्नपूर्णा देवी के शामिल होने को ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। ओबीसी के बीच उनका प्रभाव कोडरमा से आगे बढ़कर पूरे झारखंड राज्य पर है। झारखंड की आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत से अधिक है, जो उन्हें एक अहम राजनीतिक हस्ती बनाता है।
हाल ही में हुए चुनावों में अन्नपूर्णा देवी ने सीपीआई (एमएल) एल के विनोद कुमार सिंह को 3.77 लाख वोटों के अंतर से हराकर कोडरमा सीट बरकरार रखी। इस जीत ने भाजपा में उनकी स्थिति को और मजबूत किया और झारखंड के राजनीति में उनके बढ़ते प्रभाव को दिखाया है।

कितनी पढ़ी लिखी हैं अन्नपूर्णा देवी?
2 फरवरी 1970 को झारखंड के दुमका में जन्मी अन्नपूर्णा देवी ने रांची विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री हासिल की। पति को खोने के बाद घर और राजनीति दोनों को संभालते हुए उनका केंद्रीय मंत्री तक का उनका सफर उल्लेखनीय है।
केंद्र सरकार में अन्नपूर्णा देवी का शामिल होना विधानसभा चुनावों से पहले ओबीसी वोट बैंक को सुरक्षित करने के भाजपा के कदम को भी दिखाता है।












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