1977 का वो किस्सा जब वाजपेयी ने पूछा- कहां गई नेहरू की तस्वीर
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नई दिल्ली। अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में कहा जाता है कि उन्हें विरोधियों से भी प्यार मिला। यह बात सोलह आने सच है, लेकिन एक सच यह भी है कि जिस प्रकार से विरोधियों से उन्हें प्यार मिला, उसी प्रकार से अटल बिहारी वाजपेयी ने भी हमेशा विरोधियों को सम्मान दिया। विचारधारा को लेकर विरोधियों पर जोरदार हमला करने वाले अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी किसी विरोधी पर निजी हमले नहीं किए। वह विरोधियों को कितना सम्मान देते थे, इससे जुड़ा एक बड़ा ही रोचक किस्सा है। बात 1977 की है जब विदेश मंत्री बनने के बाद वाजपेयी साउथ ब्लॉक पहुंचे थे। वाजपेयी दफ्तर की दीवार पर नेहरू की तस्वीर तलाश रहे थे, जो उन्हें कहीं दिखी ही नहीं।

जब विदेश मंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयी, दीवार से गायब थी नेहरू की तस्वीर
किंगशुक नाग ने अपनी किताब- 'अटलबिहारी वाजपेयी- ए मैन फॉर ऑल सीजन' में ऐसे कई किस्सों का जिक्र किया है। इनमें एक जुड़ा है देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ। बात 1977 की है, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने विदेश मंत्री के तौर पर कार्यभार संभालने के लिए साउथ ब्लॉक सिथत दफ्तर में पहुंचे। इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने गौर किया कि दीवार पर पंडित नेहरू की तस्वीर नहीं लगी थी। अटलजी को मालूम था कि उस दफ्तर में पहले नेहरू की तस्वीर लगी हुई थी। वह इसी उधेड़-बुन में थे कि आखिर तस्वीर गई कहां?

वाजपेयी ने दोबारा लगवाई नेहरू की तस्वीर
अटल बिहारी वाजपेयी ने बिना देरी किए अपने सचिव को बुलाया और पूछा- नेहरू की वह तस्वीर कहां है, जो यहां लगी नजर आती थी। दरअसल, अटल बिहारी वाजपेयी ने सारी जिंदगी कांग्रेस का विरोध किया। उनकी राजनीति ही कांग्रेस विरोध पर आधारित थी। यही बात सोचकर अफसरों को लगा कि नेहरू की तस्वीर देखकर अटलजी कहां नाराज न हो जाएं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने नेहरू की तस्वीर साउथ ब्लॉक स्थित दफ्तर से हटा दी थी, लेकिन वह गलत थे। अटल बिहारी वाजपेयी ने अधिकारियों से कहा कि नेहरू की तस्वीर को वापस उसी जगह लगा दिया जाए, जहां वह पहले लगी थी।

जब अटलजी बोले- 'तो फिर बोलने क्यों नहीं देता।'
कुछ ऐसा ही एक किस्सा जुड़ा है पूर्व लोकसभा अध्यक्ष अनंतशायनम अयंगर के साथ, जिन्होंने कहा था कि लोकसभा में हीरेन मुखर्जी से अच्छी अंग्रेजी कोई नहीं बोलता और हिंदी में अटल बिहारी वाजपेयी से अच्छा वक्ता कोई दूसरा नहीं। वाजपेयी को एक करीबी दोस्त ने यह बताई। अनंतशायनम अयंगर की यह बात सुनकर अटलजी हंस पड़े और बोले- 'तो फिर बोलने क्यों नहीं देता।'

ब बैक बेंच पर बैठा करते थे अटल और उन्हें बड़े ध्यान से सुनते थे नेहरू
'अटलबिहारी वाजपेयी- ए मैन फॉर ऑल सीजन' नाम की किताब में एक किस्सा उन दिनों से भी जुड़ा है, जब अटलजी संसद में बैक बेंच पर बैठा करते थे। अटलजी भले ही उस समय बैक बेंचर थे, लेकिन उनकी प्रखर भाषण शैली से नेहरू बेहद प्रभावित थे। एक बार नेहरू ने भारत यात्रा पर पहुंचे ब्रिटिश प्रधानमंत्री से वाजपेयी की मुलाकात करवाई कुछ यूं करवाई... 'इनसे मिलिए... ये विपक्ष के उभरते हुए युवा नेता हैं। ये हमेशा मेरी आलोचना करते दिखते हैं, लेकिन मैं इनमें भविष्य की संभावनाएं देखता हूं।'












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