ठीक चुनाव से पहले रघुवंश के RJD को अलविदा कहने का क्या होगा नुकसान?
नई दिल्ली- बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा होने वाली है। लेकिन, चुनाव से ठीक पहले मुख्य विपक्षी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल को टाटा कह दिया है। लालू जेल में सजा काट रहे हैं और उनके बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव का रवैया वो हजम नहीं कर पा रहे थे। जिस पार्टी को उन्होंने बनाया, उसी में उनकी सुनने वाला कोई नहीं रह गया था। हालांकि, लालू यादव ने जेल में रहकर भी उन्हें पार्टी में बनाए रखने की मुकम्मल कोशिश की, लेकिन बावजूद रघुवंश प्रसाद को पार्टी छोड़ने की घोषणा करनी पड़ गई। रघुवंश बाबू बिहार के वैसेअगड़े नेता रहे हैं, जिन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर अगड़े-पिछड़ों की राजनीति के चरम पर होने के दौरान भी कभी लालू का साथ नहीं छोड़ा। इसका असर ये हुआ कि उनकी पब्लिक अपील पर भी लालू के अंदाज-ए-बयां का भरपूर असर महसूस किया जाने लगा। लालू यादव चुनावी रैलियों में नहीं आ सकते, रघुवंश प्रसाद पार्टी छोड़कर जा चुके हैं, इसकी वजह से मुख्य विपक्षी पार्टी को चुनाव में काफी कुछ नुकसान झेलना पड़ सकता है।
Recommended Video

जिस पार्टी को बनाया उसी से हुए मायूस
यूपीए सरकार में मनरेगा मैन की छवि बनाने वाले वरिष्ठ राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह को आखिरकार वह पार्टी छोड़नी पड़ी है, जिसे बनाने में लालू यादव के बाद शायद उनका सबसे बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने दिल्ली स्थित एम्स के बेड से लालू यादव को भेजे इस्तीफे में लिखा है, "सेवा में, राष्ट्रीय अध्य्क्ष महोदय, जननायक कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद 32 वर्षों तक आपके पीठ पीछे खड़ा रहा। लेकिन अब नहीं। सादर, रघुवंश प्र. सिंह।" उन्होंने पार्टी जनों के लिए भी संदेश लिखा है- "पार्टी, नेता कार्यकर्ता और आमजन ने बड़ा स्नेह दिया। क्षमा करें।" असल में रघुवंश प्रसाद पार्टी में उस बाहुबली नेता रामा किशोर सिंह की एंट्री की कोशिशों से नाराज हैं, जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में लोजपा के टिकट पर इन्हें वैशाली सीट से करीब 10 फीसदी वोटों के अंतर से हरा दिया था।

रघुवंश प्रसाद का राजद में स्थान
रघुवंश प्रसाद ने पहले अपनी नाराजगी जताने के लिए पार्टी उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। इसपर लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने तंज भरे अंदाज में ये कहा कि समुद्र से एक लोटा पानी निकलने से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन, उन्हें रोकने के लिए लालू यादव ने दखल दिया और जानकारी के मुताबिक तेज प्रताप को उनसे माफी मांगनी पड़ी। अब इनके जाने से राजद के वोट बैंक पर कितना असर पड़ेगा इसपर चर्चा करने से पहले यह समझ लेना जरूरी है कि उससे पहले लालू की पार्टी के संगठन पर उनकी कमी का बहुत ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ के मुताबिक पार्टी में उनका कद लालू यादव से जरा भी कम नहीं रहा है। अपने सक्रिय रहते लालू-राबड़ी ने हमेशा उनके सम्मान का पूरा ख्याल रखा है। वह राजपूत हैं, लेकिन उनकी छवि जाति की भावना से ऊपर रही है और अगड़े-पिछड़े हर वर्ग में इसका राजद को फायदा मिलता रहा है। वो राष्ट्रीय जनता दल के सबसे ईमानदार चेहरा रहे हैं।

रघुवंश को आखिर क्यों छोड़नी पड़ गई पार्टी
वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ के मुताबिक बाहुबली रामा सिंह की अगर राजद में एंट्री होती है तो रघुवंश को अपने प्रभाव वाले इलाकों में अपनी राजनीतिक छवि खतरे में पड़ती दिख रही थी। रामा सिंह की वजह से उन्हें कई ऐसे मसलों पर पार्टी का बचाव करना पड़ सकता था, जिससे उनके निजी छवि धूमिल हो सकती थी। लेकिन, आने वाले विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव को अपनी राघोपुर सीट बचाने के लिए रघुवंश प्रसाद से ज्यादा रामा सिंह जैसे नेताओं की दरकार है। उन्हें लगता है कि राघोपुर में उन्हें जिताने के लिए रामा सिंह जो मदद कर सकते हैं, वह शायद बुजुर्ग रघुवंश प्रसाद ना कर पाएं। यूं कह लीजिए कि वैशाली-हाजीपुर की स्थानीय राजनीति रघुवंश प्रसाद के लालू को बाय कहने का असल कारण माना जा सकता है।

वोटों के समीकरण पर असर
रघुवंश प्रसाद सिंह राजपूत हैं। उनके जाने के बाद राजद के पास एक और बड़ा राजपूत नेता मौजूद है। वह हैं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह। इनकी छवि भी राजद के ईमानदार नेताओं में रही है। लेकिन, मनरेगा की वजह से रघुवंश प्रसाद का कद राष्ट्रीय हो चुका है। जगदानंद सिंह का प्रभाव मुख्य तौर पर दक्षिण बिहार के कुछ इलाकों के राजपूत मतदाताओं में ही सीमित माना जाता है। बिहार में अगड़ी जातियों का कुल वोट करीब 15 प्रतिशत है। इनमें राजपूतों वोट करीब 5 प्रतिशत हैं। अगर जाति के हिसाब से वोटों का समीकरण और उसके प्रभाव को देखें तो रघुवंश प्रसाद का उत्तर बिहार के बड़े इलाके में अच्छी पकड़ है। मसलन, हाजीपुर, वैशाली,सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, चंपारण, महाराजगंज, छपरा, और सीवान में राजपूत मतदाता कई जगहों पर प्रभावी भूमिका में हैं और उनके बड़े हिस्से पर रघुवंश प्रसाद सिंह का प्रभाव रहा है। बाकी, उनकी जाति से ऊपर की छवि है सो अलग। अब उनके जाने से आरजेडी को वोटों का कितना नुकसान होगा, इसका सही अंदाजा लगाना तो अभी मुश्किल है। लेकिन, इतना तय है कि लालू की गैर-मौजूदगी में भी रघुवंश प्रसाद का चेहरा चुनावों में पार्टी को जो ताकत दे सकता था, उसकी कमी कार्यकर्ताओं को बहुत ही ज्यादा खलने वाली है।
-
Irani Nepo Kids: अमेरिका में मौज कर रहे ईरानी नेताओं-कमांडरों के बच्चे, जनता को गजब मूर्ख बनाया, देखें लिस्ट -
Gold Rate Today: सोना सस्ता या अभी और गिरेगा? Tanishq से लेकर Kalyan, Malabar तक क्या है गहनों का भाव? -
Iran Espionage Israel: दूसरों की जासूसी करने वाले इजरायल के लीक हुए सीक्रेट, Iron Dome का सैनिक निकला जासूस -
Mamta Kulkarni: क्या साध्वी बनने का नाटक कर रही थीं ममता कुलकर्णी? अब गोवा में कर रहीं ऐसा काम, लोग हुए हैरान -
कौन थे कैप्टन राकेश रंजन? होर्मुज में 18 दिनों से फंसा था शिप, अब हुई मौत, परिवार की हो रही है ऐसी हालत -
Mojtaba Khamenei: जिंदा है मोजतबा खामेनेई! मौत के दावों के बीच ईरान ने जारी किया सीक्रेट VIDEO -
कौन है हाई प्रोफाइल ज्योतिषी? आस्था के नाम पर करता था दरिंदगी, सीक्रेट कैमरे, 58 महिलाओं संग मिले Video -
Uttar Pradesh Silver Rate Today: ईद पर चांदी बुरी तरह UP में लुढकी? Lucknow समेत 8 शहरों का ताजा भाव क्या? -
US-Iran War: ‘पिछले हालात नहीं दोहराएंगे’, ईरान के विदेश मंत्री ने Ceasefire पर बढ़ाई Trump की टेंशन? -
iran Vs Israel War: ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला, अमेरिका-इजराइल की भीषण बमबारी से दहला नतांज -
Hyderabad Bengaluru Bullet Train: 626 किमी के प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, DPR पर बड़ा अपडेट आया -
Hyderabad Gold Silver Rate Today: ईद के मौके पर सोना-चांदी ने किया हैरान, जानें कहां पहुंचा भाव?












Click it and Unblock the Notifications