Voter ID- Aadhaar Link: आधार कार्ड और वोटर आईडी लिंक होने से क्या-क्या बदलेगा? क्या है अब तक अपडेट
Voter ID- Aadhaar Card Linking: भारतीय चुनाव आयोग (ECI) अपने मतदाता रिकॉर्ड को आधार डेटाबेस से जोड़ने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के साथ मिलकर काम करेगा। चुनाव आयोग, गृह मंत्रालय, विधि मंत्रालय, आईटी मंत्रालय और UIDAI के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में ये फैसला लिया गया है कि अब जल्द ही आधार कार्ड और वोटर आईडी लिंक किया जाएगा।
बैठक में ईसीआई और सरकारी अधिकारियों ने मतदाता डेटाबेस को आधार से जोड़ने से जुड़े पक्ष-विपक्ष के साथ-साथ कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा की है। चुनाव आयोग ने अब तक 66 करोड़ से ज्यादा वोटरों से आधार नंबर की जानकारी मांगी है। इन वोटरों ने अपनी इच्छा से अपने आधार की जानकारी दी है। लेकिन चुनाव आयोग ने अब तक 66 करोड़ वोटरों के डेटाबेस को आधार से लिंक नहीं है। यानी चुनाव आयोग ने आधार का इस्तेमाल करके वोटर लिस्ट से अब तक डुप्टीकेट नाम नहीं हटाए है।

कई सालों से चुनाव आयोग आधार वोटर आईडी को लिंक करने पर विचार कर रहा है लेकिन अब इसे जल्द ही शुरू किया जाएगा। चुनाव आयोग UIDAI के साथ मिलकर कैसे दोनों डेटाबेस को जोड़ा जाए...इसपर विचार करेगा। इस बीच ये सवाल उठ रहा है कि क्या आधार कार्ड और वोटर आईडी लिंक होने से कोई बड़ा बदलाव होगा..?
कैसे किया जाएगा वोटर आईडी से आधार कार्ड लिंक?
फिलहाल चुनाव आयोग ने यह साफ तौर पर जानकारी नहीं दी है कि वोटर आईडी से आधार कार्ड किस तरह लिंक किया जाएगा। लेकिन आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि लिंकिंग जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4), 23(5) और 23(6) के अनुसार की जाएगी। चुनाव आयोग ने कहा कि "यूआईडीएआई और ईसीआई के टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स के बीच जल्द ही इसपर बातचीत होगी।
बता दें कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में 1950 की धारा 23(4), 23(5) और 23(6) में मतदाता की पहचान के लिए आधार मांगने, मौजूदा मतदाताओं के लिए स्वेच्छा से आधार नंबर देने की प्रक्रिया, आधार की जानकारी न देने पर किसी को भी वोटर लिस्ट में शामिल होने से रोकने या फिर वोटर लिस्ट से हटाने से बचाने के बारे में है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत आधार जानकारी प्रदान करने में विफल रहने पर किसी को भी मतदाता पंजीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता है या मतदाता सूची से नहीं हटाया जा सकता है।
फॉर्म 6B में क्या होगा बदलाव?
कानून मंत्रालय फॉर्म 6B में बदलाव करेगा। फॉर्म 6B वोटरों से आधार नंबर लेने के लिए बनाया गया था। कानून मंत्रालय फॉर्म 6B में संशोधन करके यह स्पष्ट करेगा कि आधार डिटेल देना स्वैच्छिक बना रहेगा, हालांकि इस जानकारी को साझा करने से मना करने वाले मतदाताओं को इसके लिए कारण बताना होगा।
अधिकारिक बयान के मुताबिक फॉर्म 6B को केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से संशोधित किया जाएगा, ताकि इस बात पर अस्पष्टता दूर हो सके कि क्या यह जानकारी साझा करना स्वैच्छिक है।
वर्तमान में, फॉर्म 6B में मतदाताओं के लिए आधार न देने के विकल्प नहीं हैं, केवल दो विकल्प दिए गए हैं: या तो आधार संख्या दें या घोषित करें, ''मैं अपना आधार प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं हूं क्योंकि मेरे पास आधार संख्या नहीं है।''
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक प्रतिबंधात्मक विकल्पों को हटाने के लिए इसमें संशोधन किया जाएगा, लेकिन मतदाता को यह स्पष्टीकरण देना होगा कि वह अपनी 12 अंकों की आधार संख्या क्यों नहीं दे रहे हैं। इस संशोधन के जल्द ही होने की उम्मीद है, इस साल के अंत में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले।
चुनाव आयोग के पास 66 करोड़ मतदाताओं के हैं आधार डिटेल
वर्तमान में चुनाव आयोग ने 2023 तक 66 करोड़ से अधिक मतदाताओं के आधार डिटेल लिए हैं। जिन्होंने स्वेच्छा से यह जानकारी दी थी। लेकिन इन 66 करोड़ मतदाताओं के लिए दो डेटाबेस लिंक नहीं किए गए हैं। दूसरे शब्दों में आधार का इस्तेमाल डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाने या मतदाता सूचियों को साफ करने में सक्षम बनाने के लिए नहीं किया गया है।
हालांकि आगे चलकर, चुनाव निगरानी संस्था यूआईडीएआई के साथ मिलकर यह पता लगाएगी कि दोनों डेटाबेस को कैसे जोड़ा जाए, कम से कम उन मतदाताओं के लिए जिन्होंने स्वेच्छा से ईसीआई को जानकारी दी है।












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