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विधायक जी, क्या 1 साल में खत्म कर पायेंगे उन्नाव का जहर?

आर्सेनिक की समस्या से एक पूरा का पूरा उन्नाव तबाह हो रहा है। जिले में आर्सेनिक लोगों को कैंसर का काफी समय से भय दिखाता रहा है। लेकिन इस पर किसी ठोस कदम उठाने की बजाए जांच के आश्वासन तले मुद्दे को दफना दिया जाता है। लगातार मौतें हो रही हैं। बात अगर समय की करें तो 2017 में चुनाव हैं, लिहाजा विधायक जी के पास महज 1 साल है ठोस कदम उठाने के लिये।

पढ़ें- उन्नाव की हवा में घुल, पानी में घुल चुका है जहर

जानकारी के मुताबिक उन्नाव के सदर क्षेत्र में आर्सेनिक की मात्रा सबसे अधिक है। ताज्जुब की बात है कि सदर क्षेत्र से बीजेपी विधायक पंकज गुप्ता अभी भी मामले को जांच पर ही टिकाए हुए हैं।

Unnao Pollution

मुद्दा उन्नाव में आर्सेनिक, सवाल वनइंडिया के, जवाब विधायक पंकज गुप्ता के-

प्र. आर्सेनिक को फैलने से रोकने के लिये आप क्या कर रहे हैं?

उ. हम पेय जल की समस्या पर सर्वे करा रहे हैं।जो कि केंद्रीय पेयजल मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह जी के द्वारा ज्वाइंट सेक्रेटरी पेयजल भारत सरकार को आदेशित की गई है कि जल्द से जल्द भू-गर्भ जल की जांच करा ली जाए।

प्र. जिस जांच की बात कर रहे हैं वो तो पहले ही हो चुकी है। पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक है। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने 2012 में कांग्रेस पार्टी से उन्नाव सांसद अन्नू टंडन को अवगत भी कराया गया था, लेकिन आश्वासन का खाली झोला पकड़ाकर उन्हें लौटा दिया गया जो कि बीजेपी के राज में भी अब तक खाली ही नजर आ रहा है।

उ. अभी पिछली सरकारों की रिपोर्ट्स हमारे पास नहीं हैं। जल निगम से भी रिपोर्ट्स मांगी गईं लेकिन उसके पास भी नहीं है। तो हमें दुबारा रिपोर्ट के लिए पत्र देना पड़ा ताकि पैकेज बन जाए। जिससे पानी की टंकियां बनवाई जा सकें।

प्र. राज्य सरकार की ओर से आपको क्या सहायता मिल रही है इस संकट से निपटने के लिए?

उ. कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। यहां तक कि गंगा में खून से लेकर मांस के लोथड़े तक बहाये जाते हैं। हमने शिकायत भी की, लेकिन जांच का भरोसा देकर सबने चुप्पी साध ली।

प्र. तो क्या अगर रिपोर्ट्स में आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई गई जो कि है तो क्या इन फैक्ट्र‍ियों को हटाने को लेकर कोई विचार किया जाएगा?

जवाब- नहीं ये तो एक बड़ी चीज है। कई सारे लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

हमारी की ओर से जवाब- तो आपको ये नजर आ रहा है कि कई सारे लोग बेरोजगार हो जाएंगे लेकिन इस जहरीले हवा और पानी से आस-पास के इलाके कब्रिस्तान बन रहे हैं उसकी चिंता नहीं है।

इस झूठ की वजह क्या है?

उन्नाव जल निगम के अधिशाषी अभियंता केशव गुप्ता से जब इस संदर्भ में बात की गई तो उनका कहना था कि जनपद उन्नाव में कहीं भी आर्सेनिक से जुड़ी समस्या ही नहीं है। जबकि मीडिया चैनलों पर चल रही रिपोर्ट्स हों या फिर डॉक्टरों की राय दोनों में ही आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा होने का जिक्र है। अब खुद ही समझिए कि किस तरह से जल विभाग कमियों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है।

आपको बताते चलें कि भारत सरकार की सहकारी संस्था इफको यानि की इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर्स कोआपरेटिव लिमिटेड की प्रयोगशाला में जब जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 180 नमूनों की जांच की गई तो निष्कर्ष हैरान करने वाले थे। जिले की भूमि की ऊपरी सतह में क्षरीयता के साथ-साथ आर्सेनिक कार्बन व क्रोमियम जैसे घातक तत्व जरूरत से ज्यादा पाए गए। इसके अलावा प्रयोगशाला में निष्कर्ष बताते हैं कि कृषि भूमि में नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश का अनुपात भी पूरी तरह से बिगड़ चुका है। इसका असर किसानों पर भी पड़ रहा है।

पानी का पैसा पानी-पानी

केंद्रीय जल बोर्ड की रिपोर्ट में फ्लोराइड की भयावह स्थिति को देखते हुए जिले में लुंजपुंज योजना और राजीव गांधी पेय जल मिशन योजना की शुरूआत की गई थी। लुंजपुंज परियोजना के विकाखंड सिकंदरपुर सरोसी और सिकंदरपुर कर्ण के 52 गांव सम्मिलित किये गए थे। इस योजना के तहत करीबन 1.5 करोड़ रूपये खर्च किए गए थे लेकिन योजना लुंजपुंज बनकर दम तोड़ चुकी है।

कांग्रेस की पूर्व सांसद अनू टंडन को आर्सेनिक की समस्या और उससे हो रही बीमारियों से क्षेत्रीय लोगों ने अवगत कराया लेकिन समस्या से निपटने के बुलंद वादे सरीखे कार्यवाही नहीं हो पाई। वहीं यह मामला जब विधायक पंकज गुप्ता के हवाले आया, तो दिक्कतों पर जांच का स्टीकर चिपका दिया गया।

बहरहाल राज्य सरकार अपनी अंतिम अवधि पर है। लेकिन कार्यवाही के लिए न तो केंद्र ही ठीकरा अपने सिर लेना चाहता है और फिर रही बात राज्य की तो न जाने किस उत्तम प्रदेश के निर्माण के दावे को अखिलेश चौड़ी चौड़ी होर्डिंग्स में चमकाते रहे हैं। जबकि लोग मौत के साये में जी रहे हैं।

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