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सियासत, मीडिया और फ़िल्मी जगत में हलचल मचानेवाले #MeToo अभियान की पूरी कहानी क्या है

By Bbc Hindi

#metoo
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  • "नहीं... नहीं... इसमें मंत्रियों के त्यागपत्र नहीं होते हैं भैया. यूपीए सरकार नहीं है, ये एनडीए सरकार है."

ये शब्द हैं गृहमंत्री राजनाथ सिंह के, जो उन्होंने जून 2015 में ललित मोदी मसले पर वसुंधरा राजे और सुषमा स्वराज का बचाव करते हुए कहा था.

कई मामले हुए जिसके बाद सरकार के मंत्रियों के इस्तीफे की मांग उठी, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, जो बीते बुधवार को हुआ.

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में पहला इस्तीफा हुआ. ये इस्तीफा #MeToo अभियान के तहत अपने ऊपर लगे आरोपों के बाद विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर ने दिया.

इसके दो दिन पहले एम जे अकबर ने अपने ऊपर आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराया था.

विभिन्न मुद्दों पर सड़क से लेकर संसद तक का हंगामा जो नहीं कर पाया, वो सोशल मीडिया पर छिड़े #MeToo अभियान ने कर दिखाया.

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हॉलीवुड में #MeToo

#MeToo ने बड़े-बड़े हाई प्रोफाइल लोगों की पोल खोली है. भारत में इसका असर अब नज़र आने लगा है. कुछ दिन पहले हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री की पूर्व अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर पर छेड़खानी और ग़लत व्यवहार का आरोप लगाते हुए भारत में #MeToo अभियान की शुरुआत की थी जिसके बाद महिलाएं मुखर हुईं.

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ बॉलीवुड से शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे मीडिया, कला, कॉमेडी, टीवी, राजनीति और दूसरे प्रोफेशनल क्षेत्र में आग की तरह फैल गया.

महिलाएं अपने साथ हुए दुर्व्यवहार पर खुल कर बोलने लगीं. ताक़त की आड़ में दबा दी जाने वाली आवाज़ को सोशल मीडिया के #MeToo अभियान ने बुलंदी दी.

लेकिन यह अभियान शुरू कब हुआ. कई ख़बरों में यह दावा किया गया कि यह अभियान पिछले साल अक्टूबर में हॉलीवुड के ताक़तवर प्रोड्यूसर हार्वी वाइंस्टीन के ख़िलाफ़ शुरू हुआ था.

हॉलीवुड की कई मशहूर अभिनेत्रियों ने उन पर यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ मुकदमा चला और उन्हें गिरफ्तार तक किया गया.

देखते-देखते इस अभियान के तहत अन्य अभिनेत्रियां जुड़ती गईं और ताकतवर प्रोड्यूसर का करियर तबाह हो गया.

लेकिन इस अभियान की शुरुआत की सच्चाई कुछ और ही है.

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कहां से हुई शुरुआत

अक्टूबर 2017 में सोशल मीडिया पर #MeToo हैशटैग के साथ लोगों ने अपने साथ कार्यस्थल पर हुए यौन उत्पीड़न या यौन हमलों की कहानियां सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू किया.

'द गार्डियन' के मुताबिक़ टैराना बर्क नाम की एक अमरीकी सामाजिक कार्यकर्ता ने कई साल पहले ही साल 2006 में "मी टू" शब्दावली को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था.

मगर यह शब्दावली 2017 में उस समय लोकप्रिय हुई जब अमरीकी अभिनेत्री अलिसा मिलानो ने ट्विटर पर इसे इस्तेमाल किया.

मिलानो ने यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों को अपने साथ हुए घटनाक्रम के बारे में ट्वीट करने के लिए कहा ताकि लोग समझ सकें कि यह कितनी बड़ी समस्या है.

उनकी यह कोशिश क़ामयाब भी हुई और #MeToo हैशटैग इस्तेमाल करते हुए कई लोगों ने आपबीती सोशल मीडिया पर साझा की.

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हैशटैग के रूप में #MeToo तभी से पूरी दुनिया में बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाने लगा. हालांकि कुछ जगहों पर लोगों ने इस तरह के अनुभवों को बयां करने के लिए कुछ और हैशटैग भी इस्तेमाल किए मगर वे स्थानीय स्तर पर ही सीमित रहे.

उदाहरण के लिए फ़्रांस में लोगों ने #balancetonporc नाम का अभियान शुरू किया ताकि महिलाएं अपने ऊपर यौन हमला करने वालों को शर्मिंदा कर सकें.

इसी तरह से कुछ लोगों ने #Womenwhoroar नाम का हैशटैग भी इस्तेमाल किया था मगर ये लोकप्रिय नहीं हो पाया.

लेकिन #MeToo न सिर्फ़ सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हुआ बल्कि अब यह वर्चुअल दुनिया से बाहर निकलकर यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ एक लोकप्रिय अभियान बन चुका है.

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भारत में #MeToo

तनुश्री दत्ता के पहले भी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामले और आपबीती सोशल मीडिया पर शेयर की जाती रही हैं, पर उसका कोई व्यापक असर नहीं दिखा.

नाना पाटेकर पर आरोप लगने के बाद भारत में यह एक अभियान के रूप में शुरू हुआ. इसके बाद फ़िल्म और टीवी इंडस्ट्री की तमाम महिलाओं ने बड़े-बड़े दिग्गज कलाकारों का नाम लेकर उन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया.

इसके लपेटे में विकास बहल, सुभाष घई, साजिद खान, आलोक नाथ, विवेक अग्निहोत्री, उत्सव चक्रवर्ती, कैलाश खेर अभिजीत भट्टाचार्या, वरुण ग्रोवर, चेतन भगत जैसी फ़िल्मी हस्तियां आईं. आरोप संगीतकार और रियलिटी शो के जज अनु मलिक पर भी लगे और उन्हें इंडियन आइडल शो के जज पद से हटना पड़ा है.

इसके बाद यह पत्रकारिता क्षेत्र में पहुंचा, जहां एम जे अकबर, विनोद दुआ जैसे पत्रकार और पूर्व पत्रकारों पर आरोप लगे.

अब इस हैशटैग के साथ महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी आपबीती सोशल मीडिया पर साझा कर रही हैं. इसके बाद कई संस्थानों ने अपने सहकर्मियों के ख़िलाफ़ जांच की बात कही.

कई पत्रकारिता संस्थानों ने अपने कर्मचारियों के ख़िलाफ़ ही ख़बर चलाई. कई को नौकरी तक गंवानी पड़ी है.


BBC Hindi
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English summary
What is the whole story of the #MeToo campaign that has stirred up the politics, media and the film industry
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