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यूपी में 'उर्दू प्रार्थना' कराने वाले एक शिक्षक के निलंबन मामला क्या है

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उत्तर प्रदेश के पीलीभीत ज़िले में बच्चों से उर्दू भाषा में प्रार्थना कराने के कथित आरोप में निलंबित प्रधानाध्यापक का निलंबन रद्द कर दिया गया है. हालांकि उनका उस स्कूल से दूसरी जगह तबादला कर दिया गया है.

पीलीभीत के बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र स्वरूप ने बताया, "फ़ुरकान अली के मामले में जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिली है लेकिन मानवीय आधार पर उनका निलंबन वापस ले लिया गया है. अब वो एक शिक्षक के रूप में काम करेंगे न कि प्रधानाध्यपक के तौर पर. उनसे विभागीय क़ानूनों का पालन करने और अधिकारियों के निर्देशन में ड्यूटी करने के लिए कहा गया है."

फ़ुरकान अली को बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से हिदायत भी दी गई है कि वे विभागीय निर्देश का पालन करें और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में अपने दायित्वों का निर्वहन करें.

बीएसए का कहना है कि फ़ुरकान अली के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक मामले की जांच खंड शिक्षा अधिकारी कर रहे हैं. उनका कहना था कि फ़ुरकान अली के निलंबन की अवधि का वेतन नहीं काटा जाएगा.

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क्या थी शिकायत?

पीलीभीत ज़िले के बीसलपुर में सरकारी प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक फ़ुरकान अली की कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि वो स्कूल में बच्चों से 'लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी' का गायन प्रार्थना के तौर पर कराते हैं जबकि प्राइमरी स्कूलों के बच्चों के लिए दूसरी प्रार्थना निर्धारित की गई है.

यह शिकायत विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल की ओर से की गई थी. इन संगठनों का आरोप था कि छात्र सुबह की प्रार्थना में 'लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी' नज़्म गाते हैं जिसे मदरसों में गाया जाता है.

पीलीभीत में विश्व हिन्दू परिषद के नगर अध्यक्ष रवि कुमार ने बीबीसी को बताया, "सरकारी स्कूल में मदरसे की प्रार्थना कराई जा रही थी जबकि यहां हिन्दू मुस्लिम दोनों ही धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं. हमने प्रशासनिक अधिकारियों को स्कूल में धर्म विशेष की शिक्षा देने की शिकायत की थी और इसे तत्काल रोकने की मांग की थी."

उत्तर प्रदेश के एक मदरसे के छात्र. (फ़ाइल चित्र)
BBC
उत्तर प्रदेश के एक मदरसे के छात्र. (फ़ाइल चित्र)

हालांकि पीलीभीत के ज़िलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव का कहना था कि प्रधानाध्यापक के ख़िलाफ़ इसलिए कार्रवाई की गई क्योंकि शिकायत मिली थी कि उनके रहते स्कूल में राष्ट्रगान नहीं गाया जाता. लेकिन फ़ुरकान अली ने इस आरोप का साफ़तौर पर खंडन किया है.

बीबीसी से बातचीत में उनका कहना था, "हमारे स्कूल में छात्र रोज़ राष्ट्रगान करते हैं. वह शक्ति हमें दो दयानिधे भी गाते हैं और लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना भी गाते हैं. इक़बाल की कविता कक्षा एक से आठ तक उर्दू पाठ्यक्रम का हिस्सा भी है. स्कूल के ही एक छात्र ने एक दिन कहा कि लब पे आती है दुआ भी गाना चाहिए तो हमने उन्हें अनुमति दे दी. स्कूल में नब्बे फ़ीसद छात्र मुस्लिम हैं."

बीसलपुर के जिस गयासपुर प्राथमिक विद्यालय में फ़ुरकान अली पढ़ाते हैं वहां कुल 267 छात्र हैं जबकि अध्यापक वो अकेले हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक़, फ़ुरकान अली विकलांग हैं लेकिन छात्रों की पढ़ाई को लेकर काफ़ी सजग रहते हैं.

यही वजह है कि वो छात्रों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हैं और उन्होंने सरकारी पैसे के अलावा अपने पैसे से भी प्रोजेक्टर जैसी कई चीज़ों की व्यवस्था की है और छात्रों को आधुनिक तरीक़े से पढ़ाते हैं.

छात्रों ने किया विरोध

उन्हें निलंबित करने की ख़बर सुनते ही छात्रों और अभिभावकों ने काफ़ी विरोध किया और देखते ही देखते ये ख़बर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई.

विरोध के चलते सरकार ने उनका निलंबन तो वापस ले लिया है लेकिन उनका तबादला बीसलपुर में ही कुछ दूर बख़्तावरपुर प्राइमरी स्कूल में कर दिया गया है.

बताया जा रहा है कि फ़ुरकान अली के विकलांग होने के चलते 'मानवीय आधार पर' उनका निलंबन वापस लिया गया है लेकिन उनकी इस कथित ग़लती को प्रशासन ने नज़रअंदाज़ नहीं किया है.

हालांकि प्रशासन ने निलंबन के पीछे ये वजह नहीं बताई जो कि सोशल मीडिया में प्रचारित की जा रही थी. प्रशासन के मुताबिक़, उन पर ये आरोप था कि वो स्कूल में बच्चों से राष्ट्रगान का गायन नहीं कराते, जिसे फ़ुरकान अली ने भी ख़ारिज कर दिया और विभागीय जांच में इस आरोप की पुष्टि नहीं हो पाई है.

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'लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी' नामक नज़्म मशहूर शायर मोहम्मद इक़बाल ने साल 1902 में लिखी थी. मोहम्मद इक़बाल को अल्लामा इक़बाल के नाम से भी जाना जाता है और उन्होंने 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा' जैसा गीत भी लिखा था. 'लब पे आती है दुआ' नज़्म को देश के कई हिस्सों में गाया जाता है और स्कूलों में प्रार्थना के वक़्त भी इसे कई जगह गाने का रिवाज़ है.

बताया जा रहा है कि फ़ुरकान अली के निलंबन के बाद से ही प्राइमरी स्कूल गयासपुर में शिक्षक का पद खाली है. यहां पहले ही ढाई सौ से ज़्यादा छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए सिर्फ़ एक ही शिक्षक की तैनाती थी, अब फ़ुरकान अली के तबादले के चलते वो जगह भी खाली हो गई है.

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