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क्या है शिरडी में 3 साल से 'महिलाओं' के गायब होने का रहस्य

नई दिल्ली- महाराष्ट्र के शिरडी में साईं बाबा का दर्शन करने वाले भक्तों के लापता हो जाने का रहस्य गहराता ही जा रहा है। बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने अब महाराष्ट्र के डीजीपी से जांच करके इस रहस्य से पर्दा उठाने को कहा है। हाई कोर्ट के संज्ञान में यह मामला पहले से ही है। बड़ी बात ये है कि गायब होने वालों में अविवाहित या विवाहित महिलाओं की तादाद काफी है। इस तरह के मामले वहां पिछले तीन वर्षों से आ रहे हैं, लेकिन शिरडी पुलिस मानव तस्करी के नजरिए से इन रहस्यमयी गुमशुदगी की वारदातों की जांच कर पाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। एक ऐसे ही मामले में पुलिस जांच पर असंतोष जाहिर करते हुए अदालत ने प्रदेश के डीजीपी से इन मामलों की मानव तस्करी या अंग तस्करी रैकेट के नजरिए से जांच करने को कहा है।

What is the mystery of the disappearance of women in Shirdi for 3 years

शिरडी पुलिस ने बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच में जो आंकड़े दिए हैं, उसके मुताबिक 2017 से अक्टूबर, 2020 के बीच शिरडी से 279 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इनमें से 67 आजतक गुमशुदा हैं, जिनमें अविवाहित और विवाहित महिलाएं भी शामिल हैं। इंदौर की रहने वाली एक ऐसी ही महिला दीप्ति 10 अगस्त, 2017 को जो लापता हुईं, उनके पति मनोज सोनी उन्हें आजतक ढूंढ़ रहे हैं। उस दिन 42 साल के मनोज अपनी 38 साल की पत्नी और बच्चों के साथ साईं बाबा मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचे थे। सोनी कहते हैं कि दर्शन के बाद 'जब एक मेले में बच्चे राइड एन्जॉय कर रहे थे, मेरी पत्नी पास की दुकानों पर एक नजर डाल लेना चाहती थी। मैंने सोचा कि वह बच्चों को लेकर ना जाए, क्योंकि वह कई सारी चीजों की डिमांड करने लगेंगे।' गुलाबी साड़ी पहनीं दीप्ति को उसके बाद मनोज ने कभी नहीं देखा।

तीन साल से अपनी पत्नी की तलाश कर रहे सोनी का मामला अब औरंगाबाद बेंच में पहुंचा है और उसी के आधार पर उसने महाराष्ट्र के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी को शिरडी से गायब होने वाले तमाम मामलों को मानव तस्करी के नजरिए से जांच करने को कहा है। इस साल 29 अक्टूबर को पुलिस से सहयोग नहीं मिल पाने से परेशान मनोज सोनी के मामले की संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि डीजीपी को इस मामले में 'लापता लोगों के रहस्य को मानव तस्करी / अंग तस्करी के रैकेट को उजागर करना' चाहिए। दीप्ति गुमशुदगी मामले में कोर्ट ने कहा, 'तीन साल से ज्यादा समय तक पत्नी का पता लगाने की उनकी तमाम कोशिशें बेकार साबित हुई हैं। वह इंदौर के निवासी हैं और दूरी के बावजूद, वह आज भी अपनी पत्नी को खोजने की कोशिश कर रहे हैं।'

अदालत की इन टिप्पणियों पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा है कि, इस मामले में 'हर ऐंगल से जांच की जा रही है।..........अदालत को शिरडी से गायब हुए लोगों का पता लगाने के मामले में हुई प्रगति से अवगत कराया जाएगा।' यह कोई पहला मामला नहीं है। 22 नवंबर, 2019 को भी एक साल में शिरडी से 88 लोगों की गुमशुदगी का मामला सामने आया था। तब बेंच ने कहा था कि लगभग इन सभी मामलों में लापता होने वाले लोग मंदिर में दर्शन करने आए थे। तब अदालत ने कहा था, 'जब एक गरीब व्यक्ति गायब होता है तो रिश्तेदार लाचार हो जाते हैं। ज्यादातर लोग पुलिस के पास नहीं जा पाते और बहुत कम लोग ही इस कोर्ट तक पहुंच पाते हैं।................इसलिए इस बात की आशंका है कि रिपोर्ट में दर्ज 88 से ज्यादा लोग गायब हो सकते हैं।"

तीन साल तक पत्नी की तलाश के लिए मनोज सोनी ने जो संघर्ष किया है, उसे चंद शब्दों में कह देना नामुकिन है। इन तीन वर्षों में वह अनजान शख्स के कहने पर कि शायद उसने उनकी पत्नी को रेलवे स्टेशन पर देखा है पुणे गए, पुलिस की मदद से सीसीटीवी में छानबीन की, रेड लाइट एरिया में भी पता लगाया, दो बार एक तांत्रिक के कहने पर मुंबई के पास कल्याण गए और यहां तक कि लोगों को अगवा करने वाले कोपरगांव के एक गैंग के बारे में शिरडी पुलिस को भी अलर्ट किया। लेकिन, हर बार निराशा ही हाथ लगी। सोनी का 10 साल का एक बेटा और 8 साल की एक बेटी है और 85 साल की बुजुर्ग मां हैं। पत्नी की तलाश में लगे रहने के चलते उनके पास कोई स्थाई जॉब नहीं है। उनकी कमाई लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन मन में एक ही सवाल है कि दीप्ति को तलाशना आखिर कैसे छोड़ दें।

इन मामलों की गंभीरता जाहिर करते हुए अदालत ने एक साल पहले ये भी कहा था कि कुछ मामलों में गायब होने वाले लोगों का पता भले ही चल भी गया हो, लेकिन ज्यादातर मामलों में जिनमें अधिकतर महिलाएं ही हैं, उनका कुछ भी पता नहीं चल पाया है।

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