क्या है कांग्रेस में मनीष तिवारी के बगावती तेवरों की असल वजह?
कांग्रेस के लिए लगातार मुश्किलें खड़ी कर रहे मनीष तिवारी क्यों बगावती रुख अपनाए हुए हैं।
नई दिल्ली, 23 नवंबर: पंजाब में अपने ही नेताओं की खींचतान में फंसी कांग्रेस के लिए एक और मुसीबत उस वक्त खड़ी हो गई, जब पार्टी के दिग्गज नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने अपनी नई किताब में मनमोहन सिंह सरकार को निशाने पर लिया। दरअसल, मनीष तिवारी ने अपनी किताब में लिखा है कि मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद यूपीए सरकार ने पाकिस्तान को लेकर नरम रुख अपनाया, जो सही नहीं था। ऐसा पहली बार नहीं है, जब मनीष तिवारी ने अपनी ही पार्टी को कठघरे में खड़ा किया है। हाल ही में पंजाब कांग्रेस में उठे विवाद के दौरान भी मनीष तिवारी ने कुछ ऐसे ट्वीट किए, जिनसे पार्टी की मुश्किलें बढ़ीं। आइए जानते हैं कि क्या है मनीष तिवारी के बगावती तेवरों की असल वजह?

कब-कब बगावती तेवरों में नजर आए मनीष तिवारी
मनीष तिवारी कांग्रेस के लिए पहली मुश्किल उस वक्त लेकर आए, जब पार्टी के ही पुराने नेताओं ने अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक चिट्ठी लिखी और नेतृत्व में परिवर्तन की मांग की। कांग्रेस के जिन 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी, उनमें मनीष तिवारी भी शामिल थे। इसके बाद पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच घमासान चला, जिसमें पार्टी आलाकमान ने अमरिंदर के खिलाफ फैसला लिया। मनीष तिवारी कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ खड़े हुए नजर आए और अमरिंदर सिंह का पक्ष लिया। हाल ही में जब पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को अपना बड़ा भाई बताया तो उस वक्त भी मनीष तिवारी ने ट्वीट कर सिद्धू को आड़े हाथों लिया।

कहीं पंजाब में नया ठिकाना तो नहीं तलाश रहे तिवारी?
सियासी गलियारों में सुगबुगाहट है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के अपनी नई पार्टी बनाने के बाद मनीष तिवारी पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। मनीष तिवारी को अमरिंदर सिंह का बेहद करीबी माना जाता है। अमरिंदर सिंह के कांग्रेस से अलग होने के बाद पंजाब में पार्टी के नए नेतृत्व को लेकर भी मनीष तिवारी कई बार सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में एक संभावना यह है कि मनीष तिवारी पंजाब चुनाव से ठीक पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ जा सकते हैं। हाल ही में अमरिंदर सिंह ने इस बात के संकेत दिए थे कि वो पंजाब चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन कर अपने प्रत्याशी उतार सकते हैं। ऐसी स्थिति में माना जा रहा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी मनीष तिवारी के लिए अपनी नई सियासी पारी शुरू करने का एक विकल्प हो सकती है।
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मनीष तिवारी के लिए एक संभावना यह भी
मनीष तिवारी को लेकर एक दूसरी संभावना यह भी है कि वो पंजाब में आम आदमी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, मंगलवार को आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने जिस तरह से अपने बयानों में नवजोत सिंह सिद्धू को ईमानदार नेता बताया, उसके बाद मनीष तिवारी के लिए 'आप' में एंट्री की संभावना खत्म हो सकती है। पंजाब की राजनीति के जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले ही मनीष तिवारी कांग्रेस को झटका दे सकते हैं, लेकिन उसके बाद उनका अगला कदम क्या होगा, इससे पर्दा हटना बाकी है।
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