प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट जानिए क्या है? कौन- कौन इसके दायरे में आता है
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट जानिए क्या है? कौन इसके दायरे में आता है
नई दिल्ली, 25 अगस्त: कार्ति चिंदबर की सुप्रीम कोर्ट में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होगी। आइए जानते है आखिर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट क्या है ?

मनी लॉन्ड्रिंग होती क्या है?
इस एक्ट को जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि आखिरी मनी लॉन्ड्रिंग होती क्या है? सामान्य भाषा में अवैध तरीकें से कमाए हुए काले धन को व्हाइट मनी में बदलने को मनी लॉन्ड्रिंग कहते हैं। काले धन की हेराफेरी करने वालों को लाउन्डर कहा जाता है। अवैध तरीके से कमाए गए गैरकानूनी धन की हेराफेरी को रोकने के लिए ये प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डिंग एक्ट है। इस कानून के तहत ही मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों पर लगाम लगाई जाती है।
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून में मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने और संपत्ति को जब्त किया जाता है। धन शोधन निवारण अधिनियम या प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) को वर्ष 2002 में पारित किया गया था और 2005 में ये लागू हुआ था। मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाने संबंधी इस एक्ट के तहत सरकार या सार्वजनिक प्राधिकरण को अवैध यानी गैरकानूनी तरीके से कमाए गए धन और संपत्ति को जब्त करने का अधिकार दिया गया है। इतना ही नहीं ये मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अपराधों को रोकना भी इसी एक्ट के दायरे में आता है।
जानिए PMLA के तहत किन पर हो सकती है कार्रवाई
- समय समय पर इस एक्ट में संशोधन हुए जिसके बाद प्रर्वतन निदेशालय ईडी उन लोगों या संस्थाओं के खिलाफ कार्रवार्ठ कर सकेगी जिनका अपराध पीएमएमल के तहत ना हो।
- इसके अलावा 2012 में इस एक्ट में संशोधन हुए जिसके तहत बैंक, फाइनेंशियल इंस्टीयूशन, म्युचल फंड, बीम कंपनी और फाइनेंशियल मध्यस्थो पर भी पीएमएल एक लागू होगा।
- हालांकि इस एक्ट के तहत मुख्य रूप से गैरकानूनी हथियारों की सप्लाई, जिस्मफरोशी, ड्रग और नशीली चीजों की तस्करी के जरिए जो कमाई करते हैं, उन पर भी इस एक्ट के तहत केस चलाकर दोषी ठहराया जाता है।












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