जानिए भारत में गर्भपात का क्या है कानून, किन शर्तों का ध्यान रखना है जरूरी
नई दिल्ली, 29 सितंबर। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि अविवाहित महिलाओं को गर्भपात की पूरी आजादी दे दी है। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को अपने से जुड़े हर फैसले को लेने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि भारत में हर महिला को यह चुनने का अधिकार है कि वह एमटीपी एक्ट के तहत गर्भपात कराए या नहीं। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट के तहत विवाहित और अविवाहित महिलाओं को यह अधिकार दिया गया है। गौर करने वाली बात है कि एमटीपी एक्ट की धारा 3बी के तहत अगर महिला 24 हफ्ते की गर्भवती है तो उसे इसका फैसला लेने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि एमटीपी एक्ट के तहत 24 हफ्ते तक के गर्भ को गिराने के लिए रेप के साथ वैवाहिक रेप भी शामिल है।

क्या है एमटीपी एक्ट
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (संशोधन) एक्ट 2021 की बात करें तो यह गर्भधारण और गर्भपात को लेकर बनाया गया है। इस एक्ट में यह बताया गया कि किन शर्तों पर और किन परिस्थितियों में गर्भपात कराया जाता है। इस एक्ट की बात करें तो इसे महिलाओं को सुरक्षित गर्भपात का कानूनी विकल्प मुहैया कराता है। साथ ही इस एक्ट में विस्तार से इस बात की भी चर्चा की गई है कि जब कोई डॉक्टर गर्भपात करा रहा है तो उसे किन चीजों का खयाल रखना चाहिए। गर्भपात को लेकर तमाम कानून की इस एक्ट के तहत चर्चा की गई है।

0-20 हफ्ते के गर्भ का गर्भपात कराने की शर्त
इस एक्ट को पिछले साल यानि 2021 में 25 मार्च को इसे संसद ने पास किया था। मूल रूप से इस एक्ट को 1971 में पास किया गया था, जिसे 2021 में संशोधित किया था। एक्ट की धारा 3 के तहत गर्भपात कराने के गर्भधारत की अवधि को दो श्रेणी में रखा गया है। पहली श्रेणी में 0-20 हफ्ते का गर्भ और दूसरी श्रेणी में 20-24 हफ्ते तक का गर्भधारण। 0-20 हफ्ते के गर्भ को गिराने के लिए महिला को एक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की अनुमति की जरूरत होती है।

20-24 हफ्ते के गर्भ का गर्भपात कराने की शर्त
जबकि 20-24 हफ्ते के गर्भ का गर्भपात कराने के लिए दो रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की अनुमति की जरूरत होती है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि MTP एक्ट की धारा 3 के तहत 20-24 हफ्तों के गर्भ का गर्भपात कराने के लिए कुछ अहम शर्ते रखी गईं हैं। इस श्रेणी में आने वाली सिर्फ वही महिलाएं गर्भपात करा सकती हैं जो रेप पीड़िता हैं, घरेलू यौन संबंध का शिकार, दिव्यांग महिलाएं और नाबालिग हैं।

किन शर्तों पर कराया जा सकता है गर्भपात
- अगर गर्भधारण से महिला की जान को खतरा है, महिला को मानसिक या शारीरिक तौर पर गंभीर चोट पहुंच सकती है
- अगर पैदा होने वाले बच्चे में किसी तरह की मानसिक या शारीरिक समस्या है
- गर्भवती महिला की सहमति जरूरी
- नाबालिग और मानसिक विक्षिप्त महिला के अभिभावक की अनुमति

डॉक्टरों के लिए जरूरी निर्देश
- अगर महिला रेप की वजह से गर्भवती हुई है
- अगर महिला (विवाहित या अविवाहित) या पुरुष गर्भधारण को रोकने के लिए किसी डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे हैं और वह विफल हो गया।
- रेप से गर्भवती हुई महिला के मानसिक स्वास्थ्य को खयाल में रखा जाएगा और इसे उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चोट के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। 24 हफ्ते तक के गर्भपात की होगी इजाजत
- अगर मेडिकल बोर्ड को लगता है कि भ्रूण को कुछ गंभीर समस्या है तो किसी गर्भपात कराया जा सकता है, फिर गर्भ चाहे जितने हफ्ते का हो
- मेडिकल बोर्ड में एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, राज्य सरकार द्वारा चयनित एक सदस्य
- जिस महिला का गर्भपात किया गया है उसके नाम को उजागर नहीं कर सकते












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