Sanatan Dharma: क्या है सनातन धर्म का मतलब? क्यों मचा है घमासान?
Sanatan dharma: सनातन धर्म की तुलना मलेरिया-मच्छर से करके लोगों के निशाने पर आए तमिलनाडु सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन पर भाजपा की ओर से लगातार हमला जारी है। बीजेपी ने उदयनिधि स्टालिन पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाया है तो वहीं अब बेटे के बयान पर खुद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सफाई पेश की है, उन्होंने बेटे का बचाव करते हुए उल्टा भाजपा पर ही निशाना साध दिया है।

उन्होंने कहा कि 'उदयनिधि का किसी भी धर्म या धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था, भाजपा ने बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। उनका मतलब अनुसूचित जाति और महिलाओं के साथ भेदभाव करने वाले सनातन सिद्धांतों से था लेकिन भाजपा ने इसे झूठ बोलकर मुददा बना दिया है। '
आखिर सनातन धर्म सच में क्या है?
उच्चतम न्यायालय के एक वकील ने इसी बयान को लेकर उदयनिधि के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। फिलहाल आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है चलिए इसी बीच जानते हैं कि आखिर सनातन धर्म सच में क्या है और क्या है इसके नाम का मतलब और ये कब और कहां से आया?
क्या है सनातन धर्म का मतलब?
आपको बता दें कि हिंदू धर्म को ही सनातन धर्म कहा जात है। 'सनातन' का अर्थ है - शाश्वत या 'सदा बना रहने वाला' यानी जिसका ना तो आदि है और ना ही जिसका अंत है। पौराणिक ग्रंथों और इतिहास के मुताबिक एक समय में भारतीय उपमहाद्वीप में केवल यही एक धर्म था लेकिन बाद में यहां पर धर्मांतरण की प्रक्रियाएं हुईं जिसकी वजह से यहां पर कई धर्म के लोगों का वास हुआ लेकिन आज भी विश्व का एक बड़ा वर्ग इसी धर्म में आस्था रखता है इसलिए इसे वैदिक धर्म भी कहा जाता है।
सिंधु घाटी की सभ्यता में इस धर्म से जुड़े कई प्रमाण मिलते हैं
इतिहासकारों के मुताबिक सिंधु घाटी की सभ्यता में इस धर्म से जुड़े कई प्रमाण मिलते हैं। तो वहीं कुछ लोगों कहना है कि इस धर्म को मानने वाले आर्य थे। हालांकि आर्यों को लेकर कुछ मतभेद भी हैं, कुछ लोगों का मानना है कि सिंधु घाटी के ही लोग आर्य थे यानी वो मूलरूप से भारतीय थे तो वहीं कुछ लोग कहते हैं कि मध्य एशिया से एक जाति के लोग सिंधु घाटी में आकर बस गए थे, वो खुद को आर्य कहते थे और संस्कृत बोलते थे।
विकीपीडिया के मुताबिक सनातन धर्म में पांच संप्रदाय थे , जिनके नाम निम्नलिखित हैं..
- गाणपत्य
- वैष्णव
- शैवदेव
- कोटी
- शाक्त
गाणपत्य भगवान गणेश की, वैष्णव भगवान विष्णु की, शैव मां दुर्गा की, कोटी महादेव की और शाक्त सर्यूदेव को पूजते थे लेकिन इन सभी संप्रदायों में एकता बनी रहे इसलिए धर्मगुरुओं ने लोगों को शिक्षा देनी शुरु की, सारे भगवान एक हैं और इस तरह से तीन संप्रदाय गाणपत्य वैष्णव और शैवदेव का मेल हुआ और सनातन धर्म की उत्पत्ति हुई।
हिंदुस्तान के धर्म को हिंदू धर्म नामं रख दिया
इस धर्म की अधिकांश किताबें संस्कृत में ही हैं लेकिन ब्रिटिश काल में जनगणना की बात आई तो उनके लिए सनातन शब्द अलग था इसलिए उन्होंने सुविधा के लिए हिंदुस्तान के धर्म को हिंदू धर्म नामं रख दिया।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।












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