यह पोटली बाबा की है या लालू प्रसाद यादव की?
लालू यादव की इस पोटली को खोला तो सबसे पहले हमें उनका दिमाग मिला। दिमाग जो मिसाइल से भी तेज चलता है, आखिर क्यों न चले राजनीतिक साख जो बचानी है और तो और अपने बेटे तेजस्वी यादव का करियर भी है। 13 विधायक टूटे और उनमें से 9 वापस आ गये। चार क्यों नहीं वापस आये, उसका मुख्य कारण है उन्हें नीतीश कुमार की जदयू सरकार का विकास मॉडल भा गया और 9 वापस आये, क्योंकि उन्हें इस पोटली में रखी वो मिठाईयां दिख गईं, जिसे खाकर वो अपने राजनीतिक करियर को नया मोड़ दे सकते हैं।
आखिर क्यों नीतीश कुमार पर वार कर रहे हैं लालू यादव
अगर बिहार की राजनीति को करीब से देखें तो लालू यादव का वोट बैंक यादव यानी अहिर समाज से पक्का नहीं होता है, बल्कि मुस्लिम वोटबैंक उनकी तरफ पहले भी था और आगे भी रहने की उम्मीद है। बिहार में 16 फीसदी मुसलमान हैं। और इन्हीं पर लालू यादव की नजर है। यही कारण है कि लालू यादव हर 15 दिन पर नरेंद्र मोदी पर गुजरात दंगों को लेकर कटाक्ष करते हैं और हर दूसरे दिन भारतीय जनता पार्टी को सांप्रदायिक पार्टी कहते हैं। और तो और नीतीश कुमार को भी वो कोसने में जरा भी चूकते नहीं हैं।
लालू यादव का फेकस मुख्य रूप से किशनगंज, कटीहर, अररिया, पूर्णिया, भागलपुर, मधुबनी, सीतामणी, चम्पारण, समस्तीपुर, मधेपुरा, दरभंगा, बेगूसराय, नवादा, गया, जेहानाबाद और मुजफ्फरपुर पर है। ये वो जिले हैं, जहां पर मुसलमानों की तादात अधिक है। किशनगंज में 78 प्रतिशत मुसलमान हैं, जबकि कटीहर में 43 फीसदी, अररिया में 41 और पूर्णिया में 37 प्रतिशत।
अभी तक लालू के पास कोई मुद्दा नहीं था, जिसे लेकर वो जनता के पास जायें, अब उन्होंने नीतीश कुमार और विधानसभा स्पीकर पर विधायकों को तोड़ने के लिये करोड़ों रुपए खर्च करने के आरोप की कहानी बनायी है और वे यही कहानी लेकर जनता के पास जायेंगे। हम आपको बता दें कि बिहार के मुसलमानों के वोटबैंक पर कब्जा करने की फिराक में अकेले लालू नहीं हैं, उधर भारतीय जनता पार्टी शहनवाज हुसैन को बिहार में स्टेट ब्रांड एम्बेस्डर बनाकर उतारने की तैयारी में है। इसकी खबर लालू को भी लग चुकी है।
एक और कहानी जो पोटली में लेकर लालू यादव घूम रहे हैं, वो है दलित वोट। लालू को लगता है कि बिहार के दलित वर्ग के लोग उनकी लालटेन को राज्य में फिर से जला सकते हैं। यही कारण है कि लालू यादव की आंखें ठाकुरगंज, अररिया और भाबुआ पर हैं, जिसे लोकजनशक्ति पार्टी का गढ़ माना जाता है। हालांकि लोजपा पिछले लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं निकाल पायी थी।













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