Bioterrorism क्या है, जिसपर रक्षा मंत्री ने SCO जैसे इंटरनेशनल फोरम में चिंता जताई है ?
नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) देशों की सेनाओं और उनकी मेडिकल विंग से कहा है कि मौजूदा वक्त में आतंकवाद का एक बहुत बड़ा खतरा जैव हथियारों से है। उन्होंने सभी मौजूद देशों के सैन्य प्रतिनिधियों से कहा कि इस खतरे से निपटने के हर तरह से तैयार रहने की जरूरत है। आइए समझते हैं कि जैव आतंकवाद क्या है और इसके खतरे को इतना ज्यादा गंभीर क्यों माना जा रहा है।

जैव आतंकवाद क्या है?
जब खतरनाक और संक्रमणकारी वाइरस, बैक्टीरिया और गंभीर बीमारी फैलाने वाले दूसरे जर्म्स को जैविक हथियार के रूप में किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाने के लिए जानबूझकर इस्तेमाल किया जाता है तो वह जैव आतंकवाद की श्रेणी में आता है। जंग के दौरान दुश्मन देश की सेना भी इसे दूसरे देशों में बड़े पैमाने पर नरसंहार के लिए उपयोग करती हैं। मौजूदा वक्त में ये आशंका है कि आतंकवादी संगठन भी जैव हथियारों का उपयोग इंसान, मवेशी, दूसरे जीव-जन्तु और यहां तक फसलों तक के जरिए हजारों-लाखों जिंदगियां तबाह करने के लिए कर सकते हैं। जैव आतंकवाद को लेकर चिंता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि यह मामूली तकनीक और कम आतंकियों का इस्तेमाल करके भी बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकता है। इसके परिणामस्वरूप, भयंकर बीमारियां, विकलांगता और बड़े पैमाने पर लोगों की मौत तक हो सकती है।

आतंकियों के लिए है आकर्षण
दुनिया भर के आतंकी संगठनों में जैविक हथियारों की ओर झुकाव इसलिए बढ़ रहा है, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसे पकड़ पाना बहुत ही मुश्किल है। कई बार बायोलॉजिकल अटैक हो जाने के कई दिनों बाद भी उसके लक्षण दिखाई नहीं पड़ते हैं, जिससे आतंकियों को अपना काम करके निकल जाना बहुत ही आसान है। दरअसल, बायोटेररिज्म का मकसद सिर्फ ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारना ही नहीं होता, बल्कि इससे अत्यधिक संख्या में लोगों को बीमार करके किसी भी देश की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को तबाह करने का भी होता है।

बायोलॉजिकल अटैक के एजेंट
बायोलॉजिकल एजेंट को हवा, पानी या खाना किसी के भी जरिए फैलाकर बड़ी आबादी पर एक साथ कहर बरपाया जा सकता है। बायोलॉजिकल अटैक के लिए जिन बायोलॉजिकल एजेंट का ज्यादातर उपयोग होता है, उनमें बैसिलस एंथ्रैसिस नाम की बैक्टीरिया सबसे ज्यादा चर्चित है, जो एंथ्रैक्स रोग के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा स्मॉल पॉक्स जैसी बीमारी को भी वाइरस के जरिए फैलाया जाना आसान है।

विश्व की चिंता
भारत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से जूझने वाला देश है। यही वजह है कि एससीओ देशों के पहले मिलिट्री मेडिसिन सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैव आतंकवाद के बढ़ते खतरे की ओर दुनिया भर के देशों का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा है कि, 'मैं जैविक आतंकवाद की समस्या से निपटने की क्षमता विकसित करने के महत्त्व को रेखांकित करना चाहता हूं। जैविक आतंकवाद अभी एक वास्तविक खतरा है। यह संक्रामक महामारी की तरह फैलता है और सशस्त्र सेनाओं तथा मेडिकल सेवाओं को इससे निपटने के लिए आगे बढ़कर मोर्चा संभालना होगा।' इसलिए उन्होंने सशस्त्र सेनाओं की मेडिकल सर्विस को इन चुनौतियों का पता लगाने और उससे रक्षा के उपाय तलाशने पर जोर दिया है।
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