फिल्म का नाम 'कुरुक्षेत्र 2014', लाइट, कैमरा, एक्शन

पिछले एक दशक या 10 वर्षों से बुरे प्रशासन से त्रस्त जनता के घावों पर यह सेलिब्रिटीज कितना मरहम लगा पाएंगे यह तो समय ही बताएगा लेकिन यह बात भी कहीं न कहीं सही है कि अपने क्षेत्र की मशहूर शख्सियतें सांसद के तौर पर लोगों के बीच पहचान बनाने के लिए संघर्ष करती नजर आई हें।
पढ़ें-2014 के शीर्ष उम्मीदवार
अक्सर राज्यसभा को संसद के ऐसे सदन के तौर पर माना जाता है जहां पर अक्सर फिल्म, खेल, साहित्य और ऐसे क्षेत्रों को मशहूर हस्तियों को जगह दी जाती है। वहीं लोकसभा संसद का वह सदन है जहां पर अक्सर ही राजनीति के पुरोधाओं को जनता चुनकर भेजा जाता है। यहां पर भी कुछ शख्सियतें अक्सर मौजूद रहीं हैं लेकिन अभीतक अगर कुछ नामों को छोड़ दिया जाए तो शायद कोई भी बड़ा नाम अपना असर नहीं छोड़ सका है।
इन सेलिब्रिटीज का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड देखते हुए आने वाले समय में यह देश और जनता के लिए वाकई कुछ कर सकेंगे या अपने क्षेत्र की जनता के मुद्दों को सरकार के बीच ले जा पाएंगे, कहना थोड़ा मुश्किल है।
फिल्मों में हिट तो संसद में फ्लाप कलाकार
वर्तमान में दक्षिण की फिल्मों के मशहूर कलाकार चिरंजीवी बतौर राज्य पर्यटन मंत्री सेलिब्रिटीज के एक तबके का प्रतिनिधत्व कर रहे हैं। इसके अलावा यहां से ही एक और लोकप्रिय कलाकार विजयकांत भी यहां की जनता के प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद हैं। दक्षिण में फिल्मी शख्सियतों का संसद में पहुंचना कोई नई बात नहीं है। यहां से पहले एमजी रामचंद्रन, एनटी रामाराव और जयललिता जैसे नाम संसद में अपने नाम का डंका बजा चुके हैं।
उत्तर में इस ट्रेंड की शुरुआत कहां से हुई यह कहना थोड़ा मुश्किल है लेकिन जब 1984 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से मेगास्टार अमिताभ बच्चन संसद पहुंचे तो वहां भी यह ट्रेंड चल निकला। यह अलग बात है कि इलाहाबाद से अमिताभ ने चुनावी लड़ाई की शुरुआत अपने दोस्त और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सलाह पर की थी। एक फिल्म अभिनेता के तौर पर सफल रहने वाले अमिताभ एक सांसद के तौर पर बुरी तरह से फ्लाप रहे थे। विनोद खन्ना, गोविंदा और धर्मेंद्र कुछ ऐसे नाम हैं जो चुनकर संसद तक तो पहुंचे लेकिन कभी उन्होंने मुड़कर अपने संसदीय क्षेत्र की ओर हीं नहीं ध्यान दिया।
बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र को बीजेपी ने साल 2004 के चुनावों में राजस्थान के बीकानेर से टिकट दिया। लोकप्रियता के दम पर वह संसद तो पहुंचे लेकिन चुनाव जीतने के बाद कभी अपने संसदीय क्षेत्र गए ही नहीं। वहां के लोगों ने तो उनके नाम पर गुमशुदा के पोस्टर्स तक चिपका दिए थे।
संसद में नहीं खेल पाते राजनीति का खेल
फिल्मों के अलावा आज खेल के भी कई सितारे संसद और राजनीति में मौजूद हैं। मोहम्मद अजहरुद्दीन, नवजोत सिंह सिद्धू और कीर्ति आजाद का नाम सबसे अहम है। अब इस लोकसभा चुनावों बाद हो सकता है कि इनकी गिनती में कुछ इजाफा हो जाए। पार्टियों की ओर से मोहम्मद कैफ, राज्यवर्धन सिंह राठौर, बाइचुंग भूटिया और ऐसे कुछ और खास नामों को लोकसभा चुनाव का टिकट दिया गया है। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर पहले ही राज्यसभा में मौजूद हैं। आपको बता दें कि राज्यसभा में मास्टर ब्लास्टर की उपस्थिति सिर्फ 3 प्रतिशत ही है।
आप पार्टी के समर्थक और पूर्व हॉकी कप्तान धनराज पिल्लई मानते कि खिलाड़ी को शायद राजनीति का हिस्सा बनना चाहिए क्योंकि अगर वह राजनीति में आएंगे तो ही खेलों के लिए कुछ कर सकेंगे। कई विशेषज्ञों का मानना है कि एक सेलिब्रिटी जनता की जरूरतों और उनकी मांगों को संसद तक पहुंचा सकेगा यह कहना मुश्किल है। वह ज्यादातर तथ्यों से अनजान होते हैं। इसके अलावा उन्हें कई मुद्दों जैसे आतंकवाद, माओवाद और एफडीआई जैसे विषयों के बारे में कम ही जानते हैं। ऐसे में वह इस तरह की परेशानियों के बारे में बात करेंगे यह तो नाममुकिन ही है।
लोकसभा में सेलेब्रिटी सांसद
नवजोत सिंह सिद्धू-सिद्धू ने लोकसभा की तीन बहस में हिस्सा लिया और पांच साल में 99 सवाल सदन में पूछे। मोहम्मद अजहरुद्दीन-उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने जहां दो बार बहस में हिस्सा लिया तो वहीं पांच साल में सिर्फ दो ही सवाल पूछ सके। शताब्दी रॉय-वेस्ट बंगाल की बीरभूमि से शताब्दी एक बार फिर चुनावों में हैं। शताब्दी की उपस्थिति जहां 75 प्रतिशत ही है। इन शताब्दी छह बहस का हिस्सा तो रहीं लेकिन इन्होंने सवाल एक भी नहीं पूछे। तापस पॉल-शताब्दी की ही तरह बंगाल के लोकप्रिय अभिनेता तापस पॉल ने भी इन पांच वर्षों में एक भी सवाल नहीं पूछा।
किसकी कितनी अटेंडेंस प्रतिशत में
चिरंजीवी-70 प्रतिशत
जया बच्चन-58 प्रतिशत
जावेद अख्तर-48 प्रतिशत
हेमामालिनी-36 प्रतिशत
रेखा- 5 प्रतिशत
सचिन तेंदुलकर-3 प्रतिशत
2014 के चुनावों में जिन पर रहेंगी नजरें
जादूगर पीसी सरकार
गुल पनाग
किरन खेर
रवि किशन
मनोज तिवारी
मोहम्मद कैफ
बाइचुंग भूटिया
नगमा
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