क्या है मतदान और मतदाता सूची में अंतर? क्यों मकान नंबर हो जाता है 0,00,0000? जानिए जवाब
Election Commissions of India: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को बिहार एसआईआर और वोट चोरी के आरोपों पर प्रेसवार्ता करके आरोप लगाने वालों को तगड़ा जवाब दिया। ज्ञानेश कुमार ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि 'चुनाव आयोग पर कंलक लगाया जा रहा है, वोट चोरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल ठीक नहीं है।'
हालांकि इस बीच एक बात पर लोगों को भ्रम भी पैदा हो गया है और वो ये कि मतदाता सूची और मतदान में आखिर अंतर क्या है? तो आपको बताते हैं कि भारत में मतदाता सूची और मतदान दोनों ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं लेकिन दोनों ही अलग-अलग विषय हैं।

मतदाता सूची क्या है? (What is the voter list?)
मतदाता सूची जिसे कि अंग्रेजी में Voter List कहते हैं, वो आधिकारिक दस्तावेज है, जिसमें निर्वाचन क्षेत्र के योग्य मतदाताओं के नाम दर्ज होते हैं। इस सूची का निर्माण और अद्यतन चुनाव आयोग द्वारा किया जाता है। इसमें केवल उन्हीं लोगों के नाम शामिल होते हैं, जिनकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है और जो भारतीय नागरिक हैं।
मतदान क्या है? (What is voting?)
मतदान यानी वोटिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता अपने मत का उपयोग करके किसी उम्मीदवार या दल को चुनते हैं। मतदान केवल उसी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है जिसका नाम मतदाता सूची में दर्ज हो।
गलत नाम मतदाता सूची में कैसे आते या बने रहते हैं?
अब सवाल ये उठता है कि मतदाता सूची में गलत नाम कैसे आ जाते हैं तो इसके लिए निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं..
- स्थान परिवर्तन (Migration): जब कोई व्यक्ति एक शहर से दूसरे शहर या एक विधानसभा क्षेत्र से दूसरे में स्थानांतरित होता है और नया पंजीकरण नहीं कराता, तो उसका नाम पुराने क्षेत्र की सूची में बना रहता है।
- मृत्यु की सूचना समय पर न मिलना: यदि किसी मतदाता की मृत्यु हो जाती है और उसके परिवारजन इसकी सूचना स्थानीय निर्वाचन कार्यालय को नहीं देते, तो उसका नाम सूची में वर्षों तक बना रह सकता है।
- Duplicate नाम: कई बार तकनीकी कारणों या दस्तावेजों की दोहरी प्रविष्टि के चलते किसी मतदाता का नाम एक से अधिक जगह दर्ज हो जाता है।
- अपडेट की कमी: मतदाता सूची का नियमित रूप से अपडेट होना जरूरी है। जब समय पर ये नहीं होता है तो इस तरह की त्रुटियां पैदा होती हैं।
- फर्जी प्रविष्टियां: कभी-कभी गलत नाम या फर्जी पहचान पत्र के आधार पर प्रविष्टियां सूची में शामिल हो जाती हैं।
Voter List में घर नंबर कैसे बन जाते हैं 0, 00, 0000?
वोटर लिस्ट में हर नागरिक का नाम और पता सही-सही दर्ज होना जरूरी है ताकि वह अपने मताधिकार का प्रयोग बिना किसी बाधा के कर सके लेकिन कई बार लोगों ने यह देखा होगा कि वोटर लिस्ट में घर नंबर 0, 00 या 0000 के रूप में लिखा होता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? तो इसके पीछे कारण है अपूर्ण या अधूरी जानकारी।
अब क्या है अपूर्ण या अधूरी जानकारी?
- जब मतदाता पंजीकरण या संशोधन के समय व्यक्ति अपने घर का पूरा नंबर नहीं देता तो संबंधित अधिकारी उस जगह 0 या 00 डालकर सूची तैयार कर देते हैं।
- अधिकतर जगहों पर मतदाता की पहचान उसके नाम, पिता/पति के नाम और उम्र से कर ली जाती है, तो संबंधित अधिकारी 0 या 00 डालकर सूची बना देते हैं।
कैसे करें सुधार? (Election Commissions of India)
- वोटर पंजीकरण के समय घर का सही और पूरा पता जरूर दें।
- अगर घर का नंबर नहीं है, तो किसी लैंडमार्क (जैसे मंदिर, स्कूल, चौपाल आदि) का जिक्र करें।
- वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद अपना नाम और पता दोबारा जांचें और गलती मिलने पर तुरंत Form-8 के जरिए सुधार कराएं।












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