Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

गोमांस खाने पर गांधी से क्या कहा था कस्तूरबा ने

गोमांस खाने पर गांधी से क्या कहा था कस्तूरबा ने

एक बार साबरमति आश्रम में एक बछड़े की टांग टूट गई. उससे दर्द सहा नहीं जा रहा था, ज़ोर-ज़ोर से वह कराह रहा था.

पशु डॉक्टर ने हाथ खड़े कर दिए, कहा कि उसे बचाया नहीं जा सकता. उसकी पीड़ा से गांधी बहुत परेशान थे. जब कोई चारा न बचा तो उसे मारने की अनुमति दे दी.

अपने सामने उस जहर का इंजेक्शन लगवाया, उस पर चादर ढंकी और शोक में अपनी कुटिया की ओर चले गए.

जब कोई चारा न बचा, तब उसे मारने की अनुमति दी. अपने सामने उसे जहर का इंजेक्शन लगवाया, उस पर चादर ढंकी और शोक में अपनी कुटिया की ओर चल दिए.

कुछ हिंदू लोगों ने इसे गोहत्या कहा. गांधी को गुस्से से भरी चिट्ठियां लिखीं.

तब गांधी ने समझाया कि इतनी पीड़ा में फंसे प्राणी की मुक्ति हिंसा नहीं, अहिंसा ही है, ठीक वैसे ही, जैसे किसी डॉक्टर का ऑपरेशन करना हिंसा नहीं होती.

गांधी अपने धर्म के पक्के थे. वे पूजा-पाठ नहीं करते थे, मंदिर-तीर्थ नहीं जाते थे, लेकिन रोज सुबह-शाम प्रार्थना करते थे. ईश्वर से सभी के लिए प्यार और सुख-चैन मांगते थे.

उनके आश्रम में गायें रखी जाती थीं. गांधी गोसेवा को सभी हिंदुओं का धर्म बताते थे. जब कस्तूरबा गंभीर रूप से बीमार थीं, तब डॉक्टर ने उन्हें गोमांस का शोरबा देने को कहा.

कस्तूरबा ने कहा कि वे मर जाना पसंद करेंगी, लेकिन गोमांस नहीं खाएंगी.

गाय को माता कहते थे गांधी

उस समय खेती से गाड़ियां तक, सब कुछ बैलों से ही चलता था. बापू जहां कहीं देखते थे कि लोग गाय-बैल को पीट रहे हैं, या उनकी खिलाई-पिलाई का ध्यान नहीं रख रहे हैं, वहां वे उन्हें टोकते थे.

उन्हें सभी जीवों से प्यार करने के लिए कहते थे. गोमाता को वे जन्म देने वाली माता की ही तरह कृतज्ञ आंखों से देखते थे. गाय ही क्या, गांधी भैंस और बकरी को भी माता ही कहते थे.

दूध के लिए गाय और भैंस के साथ बुरा बर्ताव देखकर गांधी ने दूध पीना बंद कर दिया था. बछड़ों को दूध इसलिए नहीं मिल पाता है, क्योंकि उनके हिस्से का दूध मनुष्य चुरा लेता है.

उस समय कुछ हिंदु गाय के मांस पर रोक लगाने के लिए क़ानून की मांग कर रहे थे. कांग्रेस नेताओं को इस विषय पर अनेक चिट्टियां मिल रही थीं.

नई दिल्ली में 25 जुलाई, 1947 की प्रार्थना सभा में गांधी ने कहा, "हिंदुस्तान में गोहत्या रोकने का क़ानून बन नहीं सकता. हिंदुओं को गाय का वध करने की मनाही. इसमें मुझे कोई शक नहीं है. मगर जो मेरा धर्म है, वही हिंदुस्तान में रहने वाले लोगों का भी हो, यह कैसे हो सकता है?"

इसी सभी में उन्होंने कहा, "इसके अलावा जो बड़े-बड़े हिंदू हैं, वे खुद गोहत्या करते हैं. वे अपने हाथ से तो गाय को काट नहीं सकते, परंतु ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों को जो यहां से गायें जाती हैं, उन्हें कौन भेजता है?"

"वे वहां मारी जाती हैं और उनके चमड़े की जूतियां बनकर यहां आती है, जिन्हें हम पहनते हैं. धर्म असल में क्या चीज़ है यह तो लोग समझते नहीं हैं और गोहत्या क़ानून से बंद करने की बात करते हैं."

वैसे दिलचस्प ये है कि गांधी केवल गोरक्षा की रटंत नहीं करते थे, उन्होंने पशुओं की देखभाल के लिए दो हफ्ते का प्रशिक्षण भी लिया था.

(सोपान जोशी की पुस्तक एक था मोहन से साभार)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+