'वो कहता था कि मैंने अपनी अलग दुनिया चुनी है', आनंद गिरि के भाई भंवर ने किए अहम खुलासे
नरेंद्र गिरि की मामले में फंसे आनंद गिरी के बड़े भाई भंवर ने कुछ अहम खुलासे किए हैं।
नई दिल्ली, 23 सितंबर: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद बुधवार शाम को उन्हें भू-समाधि देकर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि नरेंद्र गिरि की मौत दम घुटने की वजह से हुई है। बीते सोमवार को नरेंद्र गिरि का शव उनके कमरे में पंखे से लटका हुआ मिला था और पुलिस ने मौके से मिले सुसाइड नोट के आधार उनके शिष्य आनंद गिरि के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। वहीं, आनंद गिरि की गिरफ्तारी होने के बाद अब उनके परिवार के लोगों के बयान भी सामने आए हैं।

'जिसने संन्यास के लिए घर छोड़ा, वो ऐसा कैसे...'
महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या के मामले में मुख्य आरोपी आनंद गिरि मूल रूप से राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के 'ब्राह्मणों की सरेरी' गांव का रहने वाला है। आनंद गिरी की गिरफ्तारी के बाद से गांव में मायूसी का माहौल है। परिजनों के लिए अभी तक इस बात पर भरोसा करना मुश्किल है कि जिस आनंद गिरि ने महज 13 साल की उम्र में घर-परिवार और सारे सुख छोड़कर संन्यास का रास्ता अपना लिया, वो किसी की हत्या जैसे काम में शामिल हो सकता है।

क्या करते हैं आनंद गिरि के भाई
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, परिवार में आनंद गिरी चार भाई हैं, जिनमें से दो गुजरात के सूरत में काम करते हैं, जबकि सबसे बड़े भाई भंवर भीलवाड़ा में ही आइसक्रीम बेचते हैं। नरेंद्र गिरि की आत्महत्या मामले में आनंद गिरि का बचाव करते हुए भंवर ने कहा, 'हमारे परिवार का कोई भी सदस्य कभी किसी की हत्या में शामिल नहीं हो सकता। उसने तो 13 साल की उम्र में ही संन्यास के लिए घर छोड़ दिया था। एक बार 2013 में वो घर वापस आया था और उसके गुरु महंत नरेंद्र गिरि भी उसके साथ थे।'

'वो नहीं चाहता था कि हम उससे संपर्क करें'
भंवर ने आगे बताया, 'आनंद से जब कभी बात होती थी, तो वो कहता कि उसने अपने लिए एक अलग दुनिया चुनी है, जिसका हमारी दुनिया से कोई लेना-देना नहीं है। वो नहीं चाहता था कि हम उससे बातचीत करें या किसी तरह का कोई संपर्क रखें...वो जब भी हमसे बात करना चाहता था, तो महंत नरेंद्र गिरि ही उससे हमारी बात कराते थे। लोग कह रहे हैं कि महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में उसका नाम है, लेकिन हमें बिल्कुल विश्वास नहीं कि वो ऐसा कर सकता है।'
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'घंटों तक मां के पार्थिव शरीर के पास बैठा रहा'
भंवर के मुताबिक, आनंद गिरी अपनी मां से बहुत प्यार करता था। भंवर ने बताया, 'इसी साल मई के महीने में हमारी मां का देहांत हो गया था, उस वक्त आनंद घर आया और घंटों तक मां के पार्थिव शरीर के पास बैठा रहा। इससे पहले जब वो 2013 में आया था, तो मां ने दीवार पर लगाने के लिए उसकी दो फोटो ली थी, जो आज भी यहां लगी हैं।'

'उसने हमें कभी कोई पैसा नहीं दिया'
वहीं, आनंद गिरि के पिता ने इस मामले पर कहा, 'टीवी पर हमने आनंद गिरि के ऊपर लगे आरोपों के बारे में सुना, लेकिन हमारा मन इसपर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं है। आनंद इस तरह का इंसान नहीं, जो किसी की हत्या में शामिल हो जाए। उसने ना तो कभी हमें कोई पैसा दिया और ना ही खुद किसी तरह की दौलत कमाने की कोशिश की। जरा हमारे घर की हालत देखिए, लोग जिस तरह की बातें कर रहे हैं, क्या वैसी धन-दौलत यहां कहीं दिखाई दे रही है। हमारा घर जैसे पहले था, वैसा ही आज भी है।'

आनंद गिरी को लेकर गांव के लोगों ने क्या कहा
परिजनों के अलावा गांव के लोग भी आनंद गिरि पर लगे आरोपों पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। इस मामले पर एक ग्रामीण ने बताया, 'आनंद जब घर छोड़कर चला गया था तो परिवार के लोगों ने उसे खोजने की बहुत कोशिश की। बाद में पता चला कि वो संन्यासी बन गया है। महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद भी परिवार के लोगों ने आनंद से संपर्क करने की कोई कोशिश नहीं की है, लेकिन इस मामले में उसकी गिरफ्तारी के बाद से पूरा परिवार चिंता में है।'

नरेंद्र गिरी मामले की होगी सीबीआई जांच
आपको बता दें कि महंत नरेंद्र गिरि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष थे और आनंद गिरि उनका प्रिय शिष्य था। कुछ दिनों पहले दोनों के बीच किसी बात पर विवाद हुआ और महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरी को आश्रम से निकाल दिया। हालांकि कुछ समय बाद कुछ संतों की मध्यस्थता से आनंद गिरि फिर से आश्रम में लौट आया। सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में नरेंद्र गिरि का शव मिला और उन्होंने अपने सुसाइड नोट में आत्महत्या के लिए आनंद गिरि को जिम्मेदार ठहराया। इस मामले में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन पर मिला 'वी' का निशान
वहीं, बुधवार को एसआरएन हॉस्पिटल में पांच डॉक्टरों की टीम ने महंत नरेंद्र गिरि के शव का पोस्टमार्टम किया। इस दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। नरेंद्र गिरि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी गर्दन पर 'वी' का निशान बना हुआ मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, गले में फंदा लगने के बाद दम घुटने की वजह से नरेंद्र गिरि की मौत हुई। फिलहाल पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों ने उनका विसरा सुरक्षित रख लिया है।
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