West Bengal Voter List: 2026 चुनाव से पहले प. बंगाल में 842 मतदाताओं के नाम और पूरा बूथ गायब, EC ने क्या कहा?
West Bengal Voter List Controversy: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (Special Intensive Revision - SIR) ने बवाल खड़ा कर दिया है। चुनाव आयोग (Election Commission) ने मतदाताओं के लिए एक नया पोर्टल ceowestbengal.wb.gov.in लॉन्च किया।
जिससे लोग 2002 की मतदाता सूची में अपना या अपने माता-पिता का नाम वेरिफाई कर सकें। लेकिन वेबसाइट के शुरु होते ही राज्यभर में तकनीकी गड़बड़ियों और नाम गायब होने की शिकायतें आने लगीं।

सर्वर क्रैश और शिकायतों की बाढ़
जैसे ही वेबसाइट शुरू हुई, हजारों लोगों ने एक साथ लॉगिन करने की कोशिश की, जिससे सर्वर क्रैश हो गया। लोगों को लगातार "HTTP Error 404" और "Service Unavailable" जैसी गलतियों का सामना करना पड़ा। चुनाव आयोग ने बताया कि यह समस्या अचानक बढ़े ट्रैफिक और NIC से State Data Centre में डेटा ट्रांसफर के कारण हुई थी। अब आयोग ने दावा किया है कि पोर्टल सामान्य रूप से काम कर रहा है और मतदाता 2002 की मतदाता सूची की PDF देख सकते हैं।
बूथ 159 से गायब हुए 842 मतदाता
उत्तर 24 परगना जिले के अशोकनगर क्षेत्र के गुमा (Guma) इलाके में बूथ नंबर 159 से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। यहां 842 मतदाताओं के नाम और पूरा बूथ ही चुनाव आयोग के पोर्टल से गायब बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वे 2002 की मतदाता सूची में दर्ज थे और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी मतदान किया था, लेकिन अब उनका नाम या बूथ दोनों लिस्ट में नहीं हैं।
TMC ने BJP पर लगाया आरोप
जिला प्रशासन ने पुष्टि की है कि आयोग की वेबसाइट पर बूथ 159 का कोई रिकॉर्ड नहीं है। यहां 2002 में 436 मतदाता थे, जो बाद में बढ़कर 842 हुए थे। लेकिन अब पूरा बूथ लिस्ट से गायब है। अशोकनगर से TMC विधायक और जिला परिषद सभाधिपति नारायण गोस्वामी ने इस मामले पर चुनाव आयोग को औपचारिक शिकायत दी है।
गुमा-I ग्राम पंचायत प्रमुख जैस्मिन सहाजी ने कहा कि उनके पति सादिक सहाजी का नाम भी 2002 की सूची से गायब है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव आयोग की भारी लापरवाही है। टीएमसी ने इस पूरे प्रकरण के लिए बीजेपी पर "डर की राजनीति" (Politics of Fear) का आरोप लगाया है, जिससे राज्य के मतदाताओं में भ्रम और भय फैलाया जा रहा है।
आयोग ने क्या कहा?
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने एक्स पर बयान जारी कर कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारी (District Election Officer) ही संबंधित जिले की मतदाता सूची के संरक्षक हैं। उन्होंने उत्तर 24 परगना और कूचबिहार के जिला अधिकारियों से इस घटना पर रिपोर्ट मांगी है। इस विवाद के बाद से राज्यभर में लोग अपने नाम जांचने के लिए परेशान हैं।
दो लोगों की आत्महत्या और एक के गंभीर हालत में होने की खबरों ने हालात और तनावपूर्ण बना दिए हैं। कई लोगों को डर है कि अगर उनका नाम सूची में नहीं मिला, तो उन्हें नागरिकता या मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। चुनाव आयोग ने हालांकि आश्वासन दिया है कि "किसी भी पात्र मतदाता का नाम नहीं छूटेगा" और सभी को अपने विवरण सत्यापित व अपडेट करने का पूरा मौका दिया जाएगा।












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