बंगाल में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने किया है मतदान! 2019 में ऐसी 18 सीटों पर किसके पक्ष में रहा परिणाम?

West Bengal Lok Sabha Election: पश्चिम बंगाल में सभी सात चरणों में चुनाव करवाए जा रहे हैं, जिनमें से पांच चरणों का चुनाव हो चुका है। लेकिन, पहले तीन चरणों में हुए मतदान के जो आंकड़े बताए जा रहे हैं, उससे यह पता चल रहा है कि मतदान के मामले में महिला वोटरों ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है।

महिला वोटरों का इस तरह से मतदान के लिए बाहर निकलना, काफी मायने रख रहा है। राज्य में सभी प्रमुख दलों ने महिला मतदाताओं को रिझाने के लिए तरह-तरह की कोशिशें की हैं। इस वजह से राज्य की टीएमसी सरकार की ओर से चलाई जा रही है 'लक्ष्मीर भंडार'(लोक्खी भंडार) योजना की खूब चर्चा हो रही है।

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2019 में बंगाल की 18 सीटों पर महिलाओं के ज्यादा वोट पड़े थे
दरअसल, पहले तीन चरणों में जिस तरह से महिलाएं पुरुषों से ज्यादा संख्या में वोट डालने निकली हैं, उससे राजनीतिक दलों को 2019 के चुनाव के एक ट्रेंड पर नजर जा रहा है। तब राज्य की 42 में से 18 लोकसभा सीटें ऐसी थीं, जहां पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने ज्यादा वोट डाले थे।

2024 के लोकसभा चुनावों में बंगाल में प्रत्येक 1,000 पुरुष मतदाताओं पर महिला वोटरों की संख्या 968 है। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बार जिन सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में ज्यादा मतदान किया है, उनमें बालुरघाट लोकसभा सीट भी शामिल है, जहां से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजुमदार प्रत्याशी हैं।

2 करोड़ महिलाएं 'लक्ष्मीर भंडार' योजना की लाभार्थी
महिला मतदाताओं के मूड को देखते हुए 'लक्ष्मीर भंडार' योजना पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, जिसे ममता बनर्जी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद शुरू किया था। राज्य के 3.73 करोड़ महिला मतदाताओं में से 2 करोड़ महिला वोटर इस योजना की लाभार्थी हैं।

भाजपा ने किया 'लक्ष्मीर भंडार' योजना में और ज्यादा पैसे देने का वादा
बंगाल सरकार अब इस योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,000 रुपए और दलित और आदिवासी महिलाओं को 1,200 रुपए महीने भत्ता देती है। हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है, 'बीजेपी लक्ष्मीर भंडार योजना को बंद नहीं करेगी। हम इसे 100 रुपए और बढ़ा देंगे।'

प्रदेश भाजपा के दिग्गज सुवेंदु अधिकारी को शाह के वादे से इतना हौसला मिला कि उन्होंने महिलाओं को 100 रुपए रोजाना इस योजना के तहत देने का वादा कर दिया। अगर उस अनुसार इसे लागू किया गया तो यह 3,000 रुपए मासिक हो जाता है। उन्होंने इस योजना का लाभ वरिष्ठ नागरिकों तक पहुंचाने की भी बात कह दी।

महिला वोटरों की जिसे मिला आशीर्वाद उसकी चमकी किस्मत!
दरअसल, पिछले कुछ चुनावों से यह देखा जा रहा है कि महिला मतदाताओं ने जिस भी दल का साथ दिया है, उसकी चुनावी किस्मत चमक जाती है। कर्नाटक में कांग्रेस को 5 गारंटी के तहत महिलाओं को 'शक्ति योजना' के नाम पर 'मुफ्त बस यात्रा' और घर की प्रमुख महिला को 'गृहलक्ष्मी योजना' के तहत 2,000 रुपए देने के वादे ने कुर्सी दिला दी।

वहीं मध्य प्रदेश में 'लाडली बहन योजना' ने भाजपा को तमाम एंटी इंकंबेंसी की अटकलों को खारिज कर फिर से सत्ता पर बिठा दिया।

'लक्ष्मीर भंडार' योजना से पहले टीएमसी सरकार ने बंगाल में छात्राओं के लिए 'कन्याश्री' (2013) और महिलाओं के लिए 'स्वास्थ्य साथी' योजना (2016) के तहत हेल्थ कार्ड देने की भी घोषणा की थी।

2019 में ऐसी 18 सीटों पर किसके पक्ष में रहा परिणाम?
2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में जिन 18 लोकसभा सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मतदान किया, उन सीटों में 9 सीटें तृणमूल कांग्रेस को मिलीं और बीजेपी के खाते में 7 सीटें ही आ सकीं। कांग्रेस को तब जो मात्र 2 सीटें मिली थीं, वहां भी महिलाओं की वोटिंग पुरुषों से अधिक रही थी।

लेकिन, महिला वोटर किस वजह से ज्यादा संख्या में वोटिंग के लिए निकल रही हैं, यह देखना भी जरूरी है। क्योंकि, इस बार बंगाल के नॉर्थ 24 परगना के संदेशखाली में महिलाओं के साथ टीएमसी नेताओं की ओर से हुए कथित यौन उत्पीड़न भी बहुत बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बना है।

इसमें कलकत्ता हाई कोर्ट तक को दखल देना पड़ा, तब जाकर उचित कार्रवाई शुरू हुई है। इस मामले में तृणमूल का एक दिग्गज शाहजहां शेख जेल में है, जिसे गिरफ्तारी के बाद पार्टी से निकाला गया है।

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