West Bengal में लाखों लोग नहीं डाल सकेंगे वोट, SC का आया अहम फैसला, TMC के लिए क्‍यों है तगड़ा झटका?

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लाखों लोगों को 13 अप्रैल को तगड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने इन लाखों लोगों को मतदान का अधिकार देने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। ये वो ही लाखों लोग हैं जिनकी पैरवी ममता सरकार और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने की थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर अहम टिप्पणी करते हुए साफ कर दिया है कि जल्दबाज़ी या चुनावी दबाव में कोई भी गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

West Bengal Election 2026

क्या है पूरा मामला?

पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि 11 अप्रैल तक, राज्य में वोटर लिस्‍ट से नाम हटाने के खिलाफ 34 लाख 35 हजार 174 अपीलें दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि 23 अप्रैल को मतदान निर्धारित होने के कारण, मतदाताओं को बिना किसी उपाय के नहीं छोड़ा जाना चाहिए क्‍योंकि अपीलें अभी भी न्यायाधिकरणों में लंबित हैं इसलिए उन्‍हें अंतरिम तौर पर वोट डालने का अधिकार दिया जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया।

अदालत ने क्या कहा?

वोटर लिस्ट संशोधन संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्य बागची की पीठ ने कहा कि मतदाता सूची में बने रहना एक "सतत अधिकार" है। यानी यह सिर्फ कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव भी है-अपने देश में अपनी पहचान का हिस्सा।उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव का दबाव इस प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करना चाहिए।" अधिकारियों को "चुनावी धूल और आवेश" से बचकर काम करना होगा।

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कोर्ट बोली- चुनाव आयोग इस मामले में "अंधा" नहीं हो सकता

अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग इस मामले में "अंधा" नहीं हो सकता। हालांकि आयोग का कहना है कि 9 अप्रैल तक मतदाता सूचियां फ्रीज हो चुकी हैं।

अदालत ने सीधे हस्तक्षेप क्यों नहीं किया?

पीठ ने कहा कि अभी अपीलीय तंत्र काम कर रहा है, इसलिए उसे अपना काम करने देना चाहिए। यानी अदालत ने फिलहाल सीधे दखल देने से परहेज किया, लेकिन पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए रखी।मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "हम ऐसी स्थिति पैदा नहीं कर सकते जिससे अपीलीय ट्रिब्यूनल के जजों पर काम का बोझ बढ़ जाए। हमारे पास इन अपीलों पर रोक लगाने की भी एक याचिका है।"

Election 2026

SIR प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

न्यायमूर्ति बागची ने पुनरीक्षण की गति और पैमाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक दिन में हजारों मामलों का निपटारा हो रहा है। इतनी तेजी में गलतियां होना तय है। उनका मानना है कि अगर 70% सटीकता भी हो, तो बाकी 30% में बड़ी गड़बड़ी हो सकती है-इसलिए मजबूत अपील व्यवस्था जरूरी है। अदालत ने यह भी पूछा कि पश्चिम बंगाल में कुछ नई श्रेणियां क्यों जोड़ी गईं, जो अन्य राज्यों में नहीं थीं। बिहार के पुराने मामले का हवाला देते हुए अदालत ने आयोग के रुख में अंतर पर भी सवाल उठाए।

पश्चिम बंगाल में कब होगी विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग

पश्चिम बंगाल में चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे और 4 मई को नतीजे आएंगे।

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