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पश्चिम बंगाल विधानसभा में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव को मंजूरी दी है। प्रस्ताव में कानून को असंवैधानिक बताते हुए केंद्र से मांग की गई है कि इसको वापस लिया जाए। नागिरकता कानून के खिलाफ ये प्रस्ताव टीएमसी सरकार की ओर से पेश किया गया, जिसे सदन ने पास कर दिया। पश्चिम बंगाल से पहले केरल, पंजाब और राजस्थान राज्यों की विधानसभा में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास किया जा चुका है।

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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधानसभा में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि यह विरोध केवल अल्पसंख्यकों का ही नहीं है। ये सबका प्रदर्शन है। मैं अपने हिंदू भाइयों को इस विरोध में आगे-आगे रहने के लिए धन्यवाद देती हूं। बंगाल में, हम CAA, NPR और NRC की अनुमति नहीं देंगे। हम शांति के साथ अपनी लड़ाई लड़ते रहेंगे।

सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास होने के बाद ऐसा करने वाला पश्चिम बंगाल देश का चौथा राज्य बन गया।पश्चिम बंगाल सरकार ने सीएए के खिलाफ प्रस्ताव लाने को लेकर 20 जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष को नियम 169 के तहत एक प्रस्ताव सौंपा था। इसमें कहा गया था कि टीएमसी सरकार सैद्धांतिक रूप से नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ है। जिसके बाद आज, 27 जनवरी को सदन में प्रस्ताव पेश किया गया। इसके बाद सदन में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पेश किए गए प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसके बाद वोटिंग हुई और प्रस्ताव को पास कर दिया गया।

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी लगातार नागिरता कानून का कड़ा विरोध कर रही हैं। ममता ये भी कह चुकी हैं कि जब तक टीएमसी की सरकार है तब तक सीएए और एनआरसी को वो पश्चिम बंगाल में लागू नहीं करेंगे। कानून का शुरू से ही विरोध कर रही हैं और उन्होंने कहा है कि वे इस कानून को राज्य में लागू नहीं करेंगी। बनर्जी ये भी कह चुकी हैं कि अगर एनआरसी को राज्य में लागू कराना है तो केंद्र को मेरी लाश से गुजरना होगा।

बता दें कि दिसंबर 2019 में संसद से पास हुए विवादित नागरिकता कानून का देश में भारी विरोध हो रहा है। ज्यादातर विपक्षी दल इसकी मुखालफत कर रह हैं। सीएए के खिलाफ देश के कई राज्यों में लगातार विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। दिल्ली के शाहीन बाग में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं इस कानून के खिलाफ 15 दिसंबर से ही धरने पर बैठी हैं। वहीं पूर्वोत्तर में लगातार इसका विरोध हो रहा है।

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