West Bengal elections 2021: भाजपा ने ममता बनर्जी को घेरने के लिए की है कैसी घेरेबंदी ? जानिए
नई दिल्ली- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव (West Bengal assembly elections)में अभी करीब 6 महीने बाकी हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से वहां पूरी ताकत झोंक दी है। अमित शाह (Amit Shah) तो सिर्फ बंगाल जीतने के अभियान की कमान संभाल रहे हैं, उनके पीछे कई केंद्रीय मंत्रियों और देशभर के पार्टी रणनीतिकारों की फौज जुट चुकी है। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को वहां की सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए पार्टी ने जिस तरह की घेरेबंदी शुरू की है, उसका सामना करना टीएमसी नेताओं के लिए बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाली है। वैसे तृणमूल के रणनीतिकारों को लगता है कि बंगाल में ममता की आंधी को रोकना बीजेपी के लिए नामुमकिन है।

5 केंद्रीय और दो राज्यों के मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(West Bengal assembly elections) के लिए बीजेपी (BJP) की तैयारियों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पार्टी ने वहां के लिए अभी से 5 केंद्रीय मंत्रियों 2 राज्यों के मंत्रियों की कमिटी बना दी है। इन केंद्रीय मंत्रियों में गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन मुंडा, मनसुख मांडविया, प्रह्लाद सिंह पटेल और संजीव बालियान जैसे नेता शामिल हैं। इनके अलावा उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और मध्य प्रदेश के चर्चित मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी इस कमिटी के सदस्य हैं। जानकारी के मुताबिक दो दिवसीय दौरे पर जब अभी गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) बंगाल पहुंचे थे तो उन्होंने खुद पार्टी के इन वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी और यहां चुनाव को लेकर आपस में चर्चा की थी। जानकारों की मानें तो पार्टी ने इन सभी वरिष्ठ नेताओं को पश्चिम बंगाल की 6 से 7 लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव की तैयारियों की जिम्मेदारी सौंपी है।
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पांच जोन बनाकर भाजपा तैयारी में जुटी
वैसे बीजेपी जैसी पेशेवर सियासी पार्टी के लिए हर चुनाव अभियान की तैयारी बड़ी ही होती है और हाल में हुआ हैदराबाद नगर निगम चुनाव उसका सबसे सटीक उदाहरण है। लेकिन, पश्चिम बंगाल का चुनाव उसके लिए बहुत बड़ा अभियान है, इसलिए उसने इसकी तैयारी अभी से काफी भारी-भरकम की है। भाजपा पश्चिम बंगाल को पांच जोन में बांटकर, हर जोन के लिए एक विशेष-प्रभारी की नियुक्ति पहले से कर चुकी है और इसके जरिए उसने समाज के हर वर्ग को साधने का पुख्ता बंदोबस्त कर रखा है। मसलन, कोलकाता जोन का प्रभार दुष्यंत गौतम के पास है तो मेदिनीपुर जोन सुनील देवधर के पास है। विनोद सोनकर रथ बंग जोन देख रहे हैं तो महाराष्ट्र से आए बड़े नेता विनोद तावड़े के पास नबाद्वीप जोन का जिम्मा है। वहीं हरीश द्विवेदी को उत्तर बंगाल जोन दिया गया है, जहां तृणमूल पर बीजेपी पहले से हावी रही है।

बैकग्राउंड में रहने वाले अनुभवी नेताओं को अभी से उतारा
ऊपर बीजेपी(BJP) की बंगाल मुहिम में शामिल सिर्फ वो चेहरे हैं जो सीधा जमीन पर दिखेंगे, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से जिनका सीधा संवाद होगा। लेकिन, इसके बाद का लेयर और भी सशक्त है और ये वैसे नेताओं के हाथों में है, जो संगठन कार्य में धुरंधर और काफी अनुभवी माने जाते हैं। बहुत कम ही मौके पर यह फ्रंट लाइन में दिखते हैं, लेकिन पार्टी की असल व्यूह रचना इन्हीं समर्पित नेताओं के हाथों में रहती है। इनमें से सबसे बड़ा नाम उत्तर प्रदेश में पार्टी के संगठन मंत्री के तौर पर काम कर रहे सुनील बंसल का है। इन्हें यूपी के रास्ते भाजपा (BJP) को देश के तख्तो-ताज पर दोबारा भी पहुंचाने का एक प्रमुख आर्किटेक्ट माना जाता है। 2017 में भाजपा को वहां विधानसभा में जीत दिलाने में भी इनका रोल बेहद प्रभावशाली माना जाता है। ये भी अभी से पश्चिम बंगाल में सक्रिय हो चुके हैं और रविवार को भी इन्होंने कोलकाता में जोन के विस्तारकों के साथ बैठक की है।

बोलपुर में रोड शो का प्रयोग सफल रहा
भारतीय जनता पार्टी ने इनके अलावा विभिन्न राज्यों में संगठन का कार्यभार देख रहे नेताओं को भी पश्चिम बंगाल (West Bengal) जीतने के अभियान में लगाया है। इनमें गुजरात (Gujarat) के संगठन मंत्री भीखूभाई दलसनिया भी शामिल हैं, जो विनोद तावड़े के साथ नबद्वीप जोन में पार्टी का वोट बैंक मजबूत करने का काम करेंगे। वहीं हिमाचल प्रदेश के संगठन मंत्री पवन राणा, सुनील देवधर और हरीश द्विवेदी जैसे नेताओं के साथ मिलकर काम करेंगे। दक्षिण भारतीय चेहरे और हाल ही में हरियाणा के संगठन मंत्री का काम संभालने वाले रवींद्र राजू रथ बंग जोन में सोनकर के साथ मिलकर पार्टी को मजबूत करेंगे। रविवार को अमित शाह (Amit Shah) बोलपुर (Bolpur) के जिस रोड शो से गदगद होकर दिल्ली लौटे उसमें भी राजू का अहम रोल था। जबकि, जानकारी के मुताबिक पार्टी के राष्ट्रीय संयुक्त संगठन मंत्री शिव प्रकाश सभी पांच जोन के बीच तालमेल बिठाएंगे और संगठन के विस्तार का काम देखेंगे।

टीएमसी के लिए भाजपा की घेरेबंदी को तोड़ना है बड़ी चुनौती
इसके अलावा भाजपा के कई केंद्रीय मंत्री ऐसे भी हैं, जो आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल (West Bengal)के सरकारी दौरे पर आते रहेंगे और उसी में से वक्त निकालकर पार्टी के लिए भी योगदान देकर लौटेंगे। मसलन, हाल में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) आधिकारिक यात्रा पर बंगाल आए तो उसी दौरान दुर्गापुर और आसनसोल के 9 विधानसभा क्षेत्रों के पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठक करके गए। जानकारी के मुताबिक पार्टी की नीति के तहत वहां लगातार नई टीमें बन रही हैं और उसी के हिसाब से उनके बीच कामों का बंटवारा भी किया जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि समाज के हर वर्ग के नेताओं को बंगाल के मैदान में उतार दे, ताकि ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और उनकी तृणमूल कांग्रेस की चौतरफा घेरेबंदी की जा सके। वैसे इस स्थिति में भी अगर ममता बनर्जी सिर्फ चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Koshore) के भरोसे हैं तो यह उनकी अपनी रणनीति है। हालांकि, जिस तरह से उन्होंने भाजपा को दहाई अंक में पहुंचकर दिखाने का चैलेंज दिया है, उससे यह सवाल जरूर उठ रहे हैं कि उन्हें बंगाल की जमीनी हकीकत का वाकई कितना अंदाजा है? क्योंकि, इसमें दो राय नहीं कि सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari BJP) समेत जो तमाम बड़े नेताओं और विधायकों ने टीएमसी (TMC) छोड़ी है, वह सबसे ज्यादा पीके के रवैए से ही नाराज होकर गए हैं।












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