WEF के अर्थशास्त्रियों ने एक सर्वे में किया बड़ा दावा, आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव से होगा भारत को लाभ
WEF के सर्वेक्षण में ये बात निकल कर सामने आई है कि आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव से भारत जैसे कई देशों को लाभ मिलेगा।

विश्व आर्थिक मंच के अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए एक सर्वे में ये कहा गया कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव से भारत जैसी अर्थव्यवस्था वाले देशों को लाभ मिलेगा।
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) से जुड़े मुख्य अर्थशास्त्रियों की राय के आधार पर तैयार रिपोर्ट में डब्ल्यूईएफ ने कहा कि इकोनॉमिकल बृद्धि और मुद्रास्फीति की स्थिति कई क्षेत्रों में व्यापक रूप से अलग-अलग होगी। आर्थिक नीति के मोर्चे पर 72 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आगामी तीन साल में विभिन्न देशों में सक्रियता के साथ औद्योगिक नीति को लागू करने का चलन बढ़ेगा।
इसके साथ ही मार्च अप्रैल में किए गए सर्वे में 90 फीसदी से अधिकर अर्थशास्त्रियों का ये कहना है कि पूर्वी एशिया, दक्षिण एशिया और प्रशांत में कम ही सहीं लेकिन बृद्धि जरूर देखने को मिलेगी। वहीं, तीन चौथाई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यूरोप में आर्थिक बृद्धि सुस्त हो सकती है। इसके साथ ही अर्थशास्त्रियों ने अमेरिका को लेकर जनवरी के अपेक्षा थोड़ी आशावादी संभावनाएं दिखाई हैं।
तिमाही सर्वेक्षण के अनुसार आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव से जो क्षेत्र सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे, उसमें दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र, लातित अमेरिका, कैरेबियाई देश तथा अमेरिका शामिल हैं। साथ ही दूसरे देशों के स्तर पर इससे भारत वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मेक्सिको, पॉलैंड जैसे देशों को लाभ मिलेगा। साथ ही इस आपूर्ति व्यवस्था से हरित ऊर्जा, वाहन, औषधि, खाद्य, ऊर्जा तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मुख्य रूप से आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है।
WEF ने बताया कि हालिया बैकिंग अस्थिरता ने कीमतों में तेजी से निपटने के लिए जटिल प्रयास किए हैं। लगभग 80 फीसदी अर्थशास्त्रियों का कहना है कि केंद्रीय बैंक अब मुद्रास्फीति के प्रबंधन और वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता को बनाए रखने के बीच एक व्यापार बंद की सामना कर रहे हैं।












Click it and Unblock the Notifications