'हमारे साथ जानवरों जैसे व्यवहार किया गया, पुलिस ने भी नहीं सुनी', मणिपुर हैवानियत पर बोले ग्राम प्रधान

Manipur News: मणिपुर में 4 मई को हुई एक भयावह घटना का वीडियो 19 जुलाई को सामने आया था, जिसमें एक समुदाय की महिलाओं को दूसरे पक्ष के लोग निर्वस्त्र कर सड़कों पर घुमा रहे हैं। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद से पूरे देश में गुस्से का माहौल है। वहीं, इस बीच पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

इस घटना को लेकर 65 वर्षीय ग्राम प्रधान थांगबोई वैफेई ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए है। ग्राम प्रधान की मानें तो 4 मई को जब मणिपुर के कांगपोकपी जिले के छोटे से गांव पर हुआ हुआ, तो पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। बताया कि घटना के बाद पीड़ितों और अन्य निवासियों को जंगलों में शरण लेने के लिए मजबूर किया गया और उनके साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया गया।

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भीड़ द्वारा गांव की महिलाओं को नग्न कर सार्वजनिक रुप से सड़क पर घुमने के मामले में सैकुल पुलिस ने ग्राम प्रधान वैफेई की तहरीर पर पहली रिपोर्ट (FIR) दर्ज की थी। ग्राम प्रधान थांगबोई वैफेई ने तहरीर में आरोप लगाते हुए बताया था कि मैतेई समुदाय की भीड़ ने गांव को लूटा भी था, जिसके बाद उन्हें अपने रिश्तेदार और गांव वालों के साथ वहां से भागना पड़ा। लेकिन, इस क्रूर अपराध के बाद भी उनकी दरिंदगी खत्म नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि तीन महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया था। सोशल मीडिया पर जो वीडिया वायरल हुआ था, उसमें 2 महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़क पर सार्वजनिक रुप से घुमाया गया था। इनमें से एक 19-20 साल की पीड़िता के साथ गैंगरेप किया गया था। जब उसके भाई ने उसकी मदद करने की कोशिश की तो उसकी भी हत्या कर दी गई।

ग्राम प्रधान द्वारा हिंदुस्तान टाइम्स को बताया गया कि गांव में हमारा घर था, लेकिन हमारे साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जाता था। 3 मई को जब मणिपुर के चुराचांदपुर शहर में जातीय झड़पें हुईं तो वैफेई को पता था कि हिंसा जल्द ही उनके घरों तक पहुंच जाएगी। बताया कि अगले दिन जब भीड़ ने गांव में हमला किया और घरों में तोड़फोड़ की तो वैफेई ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में बार-बार फोन किया।

लेकिन, कोई फायदा नहीं हुआ। 2007 में असम रेजिमेंट के (जेसीओ) 65 वर्षीय वैफेई ने एचटी को बताया कि जब 3 मई को चुराचांदपुर में हिंसा की पहली घटना हुई तो हमने स्थानीय पुलिस स्टेशन को सूचित किया। लेकिन 4 मई को जब हमने उन्हें फोन किया तो उन्होंने कहा कि वे नहीं आ पाएंगे। क्योंकि, पुलिस स्टेशन को बचाने की जरूरत है। बताया कि 3 मई को भीड़ हथियारों के साथ गांव में घुस आई थी।

हिंसक भीड़ ने तोड़फोड़ कर संपत्ति लूटी औऱ चर्च व घरों में आग लगाई तो तीनों महिलाएं अन्य निवासियों के साथ गांव से जंगल और पहाड़ियों की और भाग गईं। इस दौरान ग्रामवासियों ने पहाड़ियों पर जंगलों में शरण लीं थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले का वीडियो, जिसमें पुरुषों को महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और मारपीट करते हुए हूटिंग और तालियां बजाते हुए दिखाया गया है बुधवार को वायरल हो गया। वीडिया सामने आने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया और प्रधान मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के नेतृत्व में सभी पार्टियों ने इसकी निंदा की।

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