Waqf Bill: सदन में आज पेश होगा वक्फ संशोधन बिल, सरकार क्यों करना चाह रही बदलाव? पूरा खेल यहां समझिए

Waqf Bill: वक्फ संशोधन बिल पर पूरे देश में घमासान शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने 2 अप्रैल को लोकसभा में इस संशोधित विधेयक को पेश कर दिया विपक्ष ने इसे लेकर काफी हंगामा किया। मंगलावार, 1 अप्रैल को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस बिल को सदन में पेश करने का फैसला लिया गया था।

आज दोपहर 12 बजे ये बिल लोकसभा में पेश हो गया इसके बाद इस बिल पर सदन में 8 घंटे चर्चा होगी।विपक्ष इस संशोधित बिल पर विस्तार से चर्चा की मांग कर रहा था। विपक्ष की ओर से इस बिल में 44 संशोधन प्रस्तावित किया गया था जिसे सरकार ने खारिज कर दिया। सरकार के इस रवैये को विपक्ष ने मनमानी करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की हर बात को नजरअंदाज कर देती है।

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क्या है वक्फ बोर्ड और सरकार इसमें बदलाव क्यों कर रही है? क्या है पूरी कहानी आईए विस्तार से जानते हैं...

Waqf Bill: वक्फ बोर्ड क्या है?

देखिए वक्फ एक इस्लामिक धार्मिक प्रथा है, जिसमें कोई संपत्ति या भूमि अल्लाह को समर्पित कर दी जाती है। यह संपत्ति एक ट्रस्ट के रूप में कार्य करती है जिसे बेचा नहीं जा सकता है और ना ही इसे किसी को स्थानांतरित या विरासत में दिया जा सकता। वक्फ की संपत्तियों का उपयोग निजी कार्य के लिए नहीं होता है इसे आमतौर पर मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों या अन्य कल्याणकारी कार्यों के लिए प्रयोग किया जाता है।

वक्फ की ये संपत्तियां वक्फ एक्ट 1995 के अधीन है। इसके मैंनेजमेंट की पूरी जिम्मेदारी वक्फ बोर्ड के अधीन है जिसे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मान्यता प्राप्त है। इस वक्त देश में कुल 32 वक्फ बोर्ड हैं जो वक्फ की संपत्तियों की देख-रेख करते हैं। वहीं बिहार समेत कई राज्यों में शिया और सुन्नी के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड हैं।

भारत में वक्फ की संपत्तियां काफी बड़े पैमाने पर फैली हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ,देश में रेलवे, सेना के बाद अगक सबसे ज्यादा भू संपत्ति किसी के पास है तो वो वक्फ बोर्ड के पास है। देश में लगभग 8 लाख एकड़ भूमि वक्फ बोर्डों के अंतर्गत आती है जिनमें लगभग 6 लाख से अधिक पंजीकृत संपत्तियां हैं। इन संपत्तियों का प्रशासन केंद्रीय वक्फ परिषद और विभिन्न राज्य वक्फ बोर्डों के तहत होता है।

Waqf Bill: सरकार क्यों कर रही बदलाव?

वक्फ अधिनियम, 1995 में प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य वक्फ बोर्डों के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना और उनके प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार का मानना है कि कई स्थानों पर इन संपत्तियों पर अतिक्रमण और अवैध कब्जे की समस्याएं बढ़ गई हैं और मनमाने ढ़ंग से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। इन संशोधनों से वक्फ संपत्तियों का सही प्रबंधन सुनिश्चित होगा और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।​

सरकार की ओर से प्रमुख प्रस्तावित बदलाव:

  • वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण और मूल्यांकन: सभी वक्फ संपत्तियों को ज़िला कलेक्टर के कार्यालय में पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा, जिससे उनकी सही कीमत और स्थिति का आंकलन किया जा सके। ​
  • बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति: वक्फ बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति अब सरकार द्वारा की जाएगी, जिसमें गैर-मुस्लिम व्यक्तियों को भी शामिल किया जा सकता है। कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होंगे, और बोर्ड का सीईओ भी गैर-मुस्लिम हो सकता है। ​
  • महिलाओं की भागीदारी: बोर्ड में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे समुदाय में समानता और प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। ​
  • कलेक्टर की भूमिका: वक्फ संपत्तियों के स्वामित्व और विवादों के निपटारे में जिला कलेक्टर को महत्वपूर्ण अधिकार दिए जाएंगे। कलेक्टर यह निर्धारित कर सकते हैं कि कोई संपत्ति वक्फ है या सरकारी, और आवश्यकतानुसार राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कर सकते हैं। ​

Waqf Bill Update: विपक्ष और मुस्लिम संगठनों की आपत्तियाँ:

इन संशोधनों का विपक्ष और मुस्लिम संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है। उनका तर्क है कि इससे वक्फ बोर्डों में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ेगा और धार्मिक मामलों में सरकार का दखल बढ़ेगा। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मौलाना अरशद मदनी का कहना है कि इन संशोधनों से वक्फ ट्रिब्यूनल की स्वायत्तता कम होगी। ​

विपक्षी दलों का मानना है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 25 का उल्लंघन करता है, जो समानता और धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं। उनका कहना है कि यह मुस्लिम समुदाय की स्वतंत्रता को प्रभावित करेगा और वक्फ बोर्डों में सत्ता का केंद्रीकरण करेगा, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंचेगी।

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