इतिहास या समय नहीं मतदाता करेगा देश के नेतृत्व का फैसला: अरूण जेटली

जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि प्रधानमंत्री की मीडिया कांफ्रेंस उनकी फेयरवेल कांफ्रेंस थी। उन्होने कह दिया कि वह 2014 के चुनाव में कांग्रेस का नेतृत्व नहीं करेंगे। उन्हें ऐसे समय मुख्य विपक्ष के लिए तीखे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए था। नरेंद्र मोदी का बचाव करते हुए उन्होने कहा कि मोदी स्वतंत्र भारत के एकमात्र नेता है, जिन्हें इतनी ज्यादा स्क्रूटनी से गुजरना पड़ा है। 2002 में जो हुआ उसकी जांच किये जाने के बाद ही मोदी को निर्दोष ठहराया गया है। पहले सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जांच की उसके बाद एसआईटी ने। जबकि जो 1984 में दंगे हुए थे उस मामले में इतना भी नहीं हुआ है।
जेटली ने मनमोहन सिंह पर हमला करते हुए कहा कि वह अपने खराब प्रशासन का बचाव करने के लिए तर्क ढूंढ़ते रहे, अगर मनमोहन सिंह यह कहते हैं कि यूपीए वन में हुए भ्रष्टाचार के बाद भी वह चुनाव जीते तो उन्हें यह भी स्वीकार करना चाहिए कि 2013 में चार राज्यों में हार का कारण भी उनकी सरकार की नीतियां ही रही हैं। जेटली के अनुसार प्रधानमंत्री के तर्क का प्रयोग एक अपराधी भी कर सकता है कि चुनाव जीतने के बाद वह अपराधमुक्त हो गया है।
जेटली का कहना है कि राजनीति से सन्यास के वक्त उन्हें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए था न कि 'डर्टी पॉलिटिक्स।' उन्होने जिस तरह की शब्दावली का प्रयोग किया, ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान सोनिया गांधी ने भी किया था और भाजपा को जीत मिली थी। भारत जैसे विकासशील देश में कांग्रेस को शासन करने के लिए दस साल का समय जनता ने दिया लेकिन कांग्रेस ने उसे बेकार कर दिया। यह दस साल एक युग की तरह हैं, जिनका बेहतर इस्तेमाल किया जाना चाहिए था। जेटली का कहना है कि मनमोहन सिंह ने स्वीकार कर लिया है कि वह महंगाई नहीं रोंक सके, बेरोजगारी नहीं रोंक सके और बेहतर प्रशासन नहीं रोंक सके, ऐसे में यह सरकार नाकाम ही कही जाएगी।












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