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ECI TMC Meeting: टीएमसी से मीटिंग पर चुनाव आयोग की मंजूरी, ममता बनर्जी की चिंताएं क्या अब कम होंगी?

ECI TMC Meeting: चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में सियासी हलचल तेज़ हो गई है। इसी बीच चुनाव आयोग ने TMC की मांग स्वीकार करते हुए 28 नवंबर को बैठक तय कर दी है। यह बैठक इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर दो गंभीर मुद्दों पर चिंता जताई है।

ममता के कई सवालों ने चुनावी माहौल में नई गर्माहट ला दी है। वहीं, दूसरी ओर बीजेपी भी चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुकी है। जानते हैं विस्तार से क्या है पूरा मामला...

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ममता बनर्जी ने क्या लिखा चुनाव आयोग को?

24 नवंबर को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर दो "चिंताजनक लेकिन बेहद जरूरी" घटनाक्रमों का उल्लेख किया, जिन पर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की गई। उन्होंने कहा कि ये दोनों मुद्दे न केवल चुनावी पारदर्शिता बल्कि राज्य के प्रशासनिक ढांचे से भी सीधे जुड़े हुए हैं।

ममता बनर्जी ने अपने पत्र में पहला मुद्दा मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) पश्चिम बंगाल द्वारा जारी किए गए सेंट्रलाइज्ड रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RfP) को बताया। उन्होंने कहा कि यह टेंडर प्रक्रिया संदिग्ध प्रतीत होती है।

ममता की मुख्य आपत्तियां क्या हैं?

सीईओ ने जिला चुनाव अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया कि वे SIR से जुड़े या चुनावी डेटा कार्यों के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर डेटा एंट्री ऑपरेटर या बांग्ला सहायता केंद्र (BSK) के कर्मचारियों को न रखें। ममता का कहना है कि यह निर्णय पारदर्शिता के खिलाफ है और चुनावी डेटा प्रबंधन को बाहरी एजेंसियों पर निर्भर करने वाला बनाता है। उन्होंने आशंका जताई कि डेटा आउटसोर्सिंग से मतदाता जानकारी की सुरक्षा और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा हो सकता है।

मुख्यमंत्री का दूसरा ऐतराज प्राइवेट रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स के भीतर पोलिंग स्टेशन स्थापित करने के प्रस्ताव पर रहा। ममता के अनुसार ऐसे परिसरों में मतदान केंद्र बनाने से मतदाताओं पर दबाव या प्रभाव का खतरा बढ़ सकता है। जिससे मतदान प्रक्रिया की स्वतंत्रता और गोपनीयता को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि मतदान केंद्र हमेशा सार्वजनिक स्थानों में ही होने चाहिए, जहां सभी लोगों की बराबर पहुंच हो।

TMC-ECI बैठक अब क्यों अहम?

चुनाव आयोग द्वारा 28 नवंबर की बैठक मंजूर किए जाने के बाद माना जा रहा है कि TMC इन दोनों मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेगी। चुनाव आयोग ममता बनर्जी के उठाए गए सवालों पर स्पष्टीकरण देगा। चुनावी प्रक्रियाओं में विश्वास और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नए दिशानिर्देश भी जारी हो सकते हैं।

इधर, TMC के आरोपों के बाद राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। पश्चिम बंगाल भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस पर खुलेआम राजनीतिकरण का आरोप लगाया है। अधिकारी ने अपने पत्र में कहा है कि उनके पास "पुलिस के पक्षपातपूर्ण रवैये" के ठोस सबूत मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि आने वाले चुनावों में उनसे निष्पक्षता और चुनावी तटस्थता की उम्मीद नहीं की जा सकती।

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