वीरभद्र सिंह: 50 सालों तक हिमाचल प्रदेश की राजनीति के रहे 'राजा साहब', नेहरू ने कराई थी पॉलिटिक्स में एंट्री
वीरभद्र सिंह: 50 सालों तक हिमाचल प्रदेश की राजनीति के रहे 'राजा साहब', नेहरू ने कराई थी पॉलिटिक्स में एंट्री
नई दिल्ली, 08 जुलाई: रामपुर-बुशहर शाही परिवार के वंशज, वीरभद्र सिंह, जो 'राजा साहिब' के नाम से लोकप्रिय थे, अब हमारे बीच नहीं रहे। 50 सालों तक हिमाचल प्रदेश की राजनीति पर राज करने वाले हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह का निधन हो गया है। वह 87 वर्ष के थे। वीरभद्र सिंह का निधन लंबी बीमारी की वजह से गुरुवार (08 जुलाई 2021) को तड़के 3.40 बजे आईजीएमसी अस्पताल में हुआ। वीरभद्र सिंह को अप्रैल और जून में कोरोना संक्रमण भी हुआ था। वीरभद्र सिंह ने 50 सालों तक सिर्फ हिमाचल प्रदेश की राजनीति पर राज नहीं किया बल्कि पांच दशकों से अधिक समय तक हिमाचल प्रदेश के लोगों के दिलों पर शासन किया। कहा जाता है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू उन्हें राजनीति में लेकर आए थे। वीरभद्र सिंह 9 बार विधायक, 5 बार सांसद और 6 बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वीरभद्र सिंह वह केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे हैं।

27 साल की उम्र में वीरभद्र सिंह ने की थी राजनीति में एंट्री
वीरभद्र सिंह कांग्रेस की पुरानी पीढ़ी का हिस्सा थे, जिन्होंने ना केवल हिमाचल में बल्कि पूरे देश में अपनी राजनीति का डंका बजाया। वीरभद्र सिंह ने 27 साल की उम्र में राजनीति में एंट्री की थी। 1962 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा था, उस वक्त वह सिर्फ 27 साल के थे। वीरभद्र सिंह अपना पहला लोकसभा चुनाव (1962 ) जीत गए थे। इसके बाद वह चार बार 1967, 1971, 1980 और 2009 में लोकसभा सांसद रहे।
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वीरभद्र सिंह 6 बार रहे हिमाचल के CM
वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के 6 बार सीएम रह चुके हैं। राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में उनका पहला कार्यकाल 1983 में था और 1990 तक चला। हिमाचल प्रदेश का कार्यभार संभालते हुए वीरभद्र ने पर्यटन के विकास के अलावा शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई।
उनकी लोकप्रियता ऐसी थी कि वे 1985, 1993, 2003 और 2012 में फिर से मुख्यमंत्री चुने गए। 2009 में वीरभद्र सिंह ने लोकसभा चुनाव भी जीता था और केंद्रीय इस्पात मंत्री और बाद में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री के रूप में कार्य किया। वीरभद्र सिंह ने 08 अप्रैल 1983 से 26 दिसंबर 2017 तक छह बार हिमाचल के सीएम रहे। वीरभद्र सिंह 1998 से मार्च 2003 तक विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं।

'मेरी जनता, मेरी सबसे बड़ी ताकत है...'
कहा जाता है कि वीरभद्र सिंह जैसा लोकप्रिय नेता प्रतिद्वंद्वी भाजपा हिमाचल में कभी लेकर नहीं आ पाई। हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र की लोकप्रियता का मुकाबला करने वाला कोई दूसरा नेता नहीं था। वह अपने भाषणों में कहते थे, '' "मेरी जनता मेरी सबसे बड़ी ताकत है।''
वीरभद्र सिंह को लोग इतना प्यार करते थे, उनकी सार्वजनिक अपील ऐसी थी कि वे नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद कभी भी अपने निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए नहीं जाते थे। फिर भी वह आराम से हर बार चुनाव जीत जाते थे। अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाने के बजाय वह कांग्रेस के अभियान का नेतृत्व करते हुए राज्य का दौरा करते थे।

वीरभद्र सिंह की पत्नी और बेटे भी राजनीति में
वीरभद्र सिंह का जन्म 23 जून 1934 को हुआ था। वीरभद्र की शिक्षा कर्नल ब्राउन कैम्ब्रिज स्कूल(देहरादून), सेंट एडवर्ड स्कूल (शिमला) और बिशप कॉटन स्कूल (शिमला) में हुई थी। वीरभद्र सिंह ने सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली से अंग्रेजी में ग्रेजुएट किया था।
वीरभद्र सिंह का विवाह 1954 में रत्ना कुमारी से हुआ था और उनकी चार बेटियां थीं। वीरभद्र सिंह ने 1985 में प्रतिभा सिंह से दोबारा शादी की थी। उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह भी राजनीति में हैं। प्रतिभा सिंह ने मंडी संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। प्रतिभा पूर्व सांसद हैं, वहीं विक्रमादित्य शिमला ग्रामीण से विधायक हैं। वीरभद्र सिंह की बेटी अपराजिता की शादी पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पोते अंगद सिंह से हुई है।












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