ब्रिटिश टीम ने अचानक क्यों किया तिहाड़ जेल का दौरा? क्या भारत लाए जाएंगे नीरव मोदी-विजय माल्या!
UK CPS Team Visits Tihar Jail: दिल्ली की तिहाड़ जेल में ब्रिटेन के क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) की एक स्पेशल टीम पहुंची। यह दौरा सिर्फ जेल की चारदीवारी देखने का नहीं था, बल्कि उन दलीलों को तोलने का भी था, जिनके आधार पर ब्रिटेन की अदालतें अब तक माल्या और नीरव मोदी जैसे हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराधियों के प्रत्यर्पण पर रोक लगाती रही हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या यह निरीक्षण भारत की कोशिशों को ताकत देगा या भगोड़े एक बार फिर कानूनी दांव-पेंच में बच निकलेंगे?
सीनियर अधिकारियों ने पुष्टि की है कि गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा संचालित इस दौरे को ब्रिटेन की अदालतों में चल रही कानूनी कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

तिहाड़ जेल का दौरा क्यों हुआ?
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) की टीम ने दिल्ली की तिहाड़ जेल का दौरा किया। टीम ने यहां कैदियों को दी जा रही सुविधाओं और देखभाल का जायजा लिया। भारतीय अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अगर जरूरत पड़ी तो हाई-प्रोफाइल कैदियों (जैसे नीरव मोदी, विजय माल्या) के लिए जेल के अंदर एक अलग 'एन्क्लेव' (खास जगह) बनाई जा सकती है, ताकि उनकी सुरक्षा और जरूरतें अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से पूरी हों।
ब्रिटेन को क्या संदेश गया?
इस दौरे से उम्मीद है कि ब्रिटेन के अधिकारियों को सकारात्मक (Positive) प्रतिक्रिया मिलेगी। इससे भारतीय जांच एजेंसियों को ताकत मिलेगी जो अभी ब्रिटेन में शरण लिए भगोड़ों को वापस लाने की कोशिश कर रही हैं।
चार सदस्यीय टीम ने किया निरीक्षण
अधिकारियों के अनुसार, जुलाई में चार लोगों की टीम-दो सीपीएस स्पेशल और दो ब्रिटिश हाई कमीशन ऑफिसर-ने तिहाड़ का दौरा किया। उन्होंने हाई सिक्योरिटी वार्डों को देखा और कुछ कैदियों से बातचीत भी की। टीम जेल की सुविधाओं से प्रभावित हुई और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर का बताया।
अधिकारियों के साथ बैठक
दौरे के दौरान सीपीएस टीम ने गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, जांच एजेंसियों और तिहाड़ जेल के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। इसमें ब्रिटेन से संदिग्धों के प्रत्यर्पण (Extradition) से जुड़े पहलुओं और कानूनी जरूरतों पर चर्चा हुई।
भगोड़ों की दलीलें
हथियार कारोबारी संजय भंडारी, हीरा व्यापारी नीरव मोदी और अन्य हाई-प्रोफाइल भगोड़ों ने ब्रिटेन की अदालतों में दलील दी है कि भारत लाए जाने पर उन्हें तिहाड़ जेल में जबरन वसूली, हिंसा या यातना का खतरा रहेगा।
इन्हीं दलीलों के कारण ब्रिटेन की अदालतों ने कई बार प्रत्यर्पण रोक दिया। जैसे-
- 28 फरवरी को ब्रिटेन की अदालत ने संजय भंडारी को प्रत्यर्पित करने से इनकार कर दिया।
- 11 अप्रैल को लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने 750 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोपी वीरकरण अवस्थी और उनकी पत्नी रितिका अवस्थी को बिना शर्त ज़मानत पर छोड़ दिया।
ब्रिटेन की शर्तें और भारत की गारंटी
इन मामलों के बाद ब्रिटेन ने भारत से कहा कि वह कैदियों को यातना या अमानवीय व्यवहार न करने की गारंटी दे। जून में भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन को लिखित गारंटी दी कि अगर अवस्थी को प्रत्यर्पित किया गया तो उनसे पूछताछ नहीं होगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत के 178 प्रत्यर्पण अनुरोध अलग-अलग देशों में लंबित हैं। इनमें से करीब 20 सिर्फ ब्रिटेन में अटके हुए हैं।
ब्रिटेन में जिनकी तलाश है उनमें शामिल हैं:
- शराब कारोबारी विजय माल्या
- हीरा व्यापारी नीरव मोदी
- अंडरवर्ल्ड डॉन इकबाल मिर्ची की पत्नी हाजरा मेमन और उनके बेटे
- कई खालिस्तानी नेता












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