मित्रों एप को देसी मानने वाले सावधान, मेड इन इंडिया नहीं बल्कि पाकिस्तानी है 'Mitron App'

नई दिल्ली। बीते कुछ वक्त से लोग टिकटॉक (Tik Tok) को इस्तेमाल नहीं करने की बात कह रहे हैं। टिकटॉक और यूट्यूब के बीच विवाद छिड़ जाने के बाद तो इस मामले ने तूल ही पकड़ लिया। लोगों ने प्ले स्टोर पर जाकर न केवल टिकटॉक की रेटिंग कम करनी शुरू कर दी बल्कि इसे अनइंस्टॉल भी करने लगे। इसी दौरान एक और एप काफी चर्चा में आया। इस एप का नाम है मित्रों एप (Mitron App)। इस एप को न केवल मेड इन इंडिया कहा गया बल्कि इसे भारी संख्या में लोगों ने डाउनलोड भी किया।

50 लाख से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया

50 लाख से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया

आपको ये बात जानकर हैरानी होगी कि इस एप पर अभी भी 4.8 रेटिंग्स हैं और इसे 50 लाख से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं। इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि मित्रों एप इंडिया का है ही नहीं। यानी किसी आईआईटी के छात्र ने इसे नहीं बनाया है, जिसका काफी समय से दावा किया जा रहा था। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, मित्रों एप का पूरा सोर्स कोड, जिसके अंदर फीचर्स और यूजर इंटरफेस मौजूद है, उसे एक पाकिस्तानी सॉफ्टवेयर कंपनी से खरीदा गया है।

2600 में बिका एप का सोर्स कोड

2600 में बिका एप का सोर्स कोड

Qboxus नामक इस कंपनी के फाउंडर और चीफ एक्जिक्यूटिव इरफान शेख हैं। शेख का कहना है कि उनकी कंपनी ने इस एप का सोर्स कोड मित्रों के प्रमोटर को महज 34 डॉलर यानी करीब 2,600 रुपये में बेचा है। उन्होंने कहा, 'डेवलेपर ने जो किया है वो चिंताजनक है। उसने स्क्रिप्ट के लिए भुगतान किया और इस्तेमाल किया, ये सही है। लेकिन परेशानी ये है कि उसने इसे भारतीय द्वारा बनाया गया एप बताया। ये सच नहीं है। विशेष तौर पर जब उसने इसमें कोई बदलाव ही नहीं किया है।'

यूजर डाडा ट्रीटमेंट की कोई जानकारी नहीं

यूजर डाडा ट्रीटमेंट की कोई जानकारी नहीं

शेख ने आगे कहा कि उनकी कंपनी ने एप को codecanyon पर केवल 34 डॉलर में बेचा है। यानी करीब 2600 रुपये में। जब उनसे डाटा होस्टिंग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि Qboxus डाटा को खुद के सर्वर पर होस्ट करने के लिए यूजर को विकल्प देता है। लेकिन मित्रों ने इस विकल्प को ही नहीं चुना और उसने अपने सर्वर पर ही होस्ट चुना। अभी तक मित्रों के यूजर डाडा के ट्रीटमेंट को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी पता नहीं चल पाई है।

प्राइवेसी पॉलिसी ही नहीं है

प्राइवेसी पॉलिसी ही नहीं है

अब जो समस्या बनी हुई है वो ये है कि इस एप का प्रचार मेड इन इंडिया के नाम से क्यों किया गया। साथ ही इसकी प्राइवेसी को लेकर भी कुछ स्पष्ट नहीं है। गूगल प्ले स्टोर पर जाने के बाद अगर आप प्राइवेसी पॉलिसी पर जाएंगे तो आपको shopkiller.in लिंक मिलेगा, जो कि ब्लैंक है। यानी इस एप की कोई प्राइवेसी पॉलिसी ही नहीं है। इससे ये भी पता नहीं चल पाएगा कि मित्रों एप लोगों द्वारा अपलोड किए गए वीडियो का इस्तेमाल कहां करता है। इसके साथ ही ये भी पता नहीं चल पाया है कि मित्रों एप को भारत में किसने खरीदा है और इसे किसने गूगल प्ले स्टोर पर पब्लिश किया है।

एप को केवल रीब्रैंड किया गया

एप को केवल रीब्रैंड किया गया

शेख ने ये भी बताया कि टिकटिक (पाकिस्तानी एप) के खरीदार ने मित्रों एप को केवल रीब्रैंड किया है। जो सीधे तौर पर इसकी नकल है। शेख ने कहा कि उनकी कंपनी केवल सोर्स कोड बेचती है, जिसके बाद खरीदार इन्हें कस्टमाइड करते हैं। इस कंपनी का मकसद केवल मशहूर एप्स के क्लोन बनाना और उन्हें कम कीमत पर बेचना है। साथ ही कंपनी छोटे स्टार्टअप्स की भी सहायता करती है, जिनके पास ज्यादा बजट नहीं होता है। अभी तक ये कंपनी टिकटिक एप की 277 कॉपी बेच चुकी है।

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