Pics: लद्दाख में चीन से निबटने के लिए कैसे तैयार हो रही है Indian Army
नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख सेक्टर में अब से कुछ दिनों बाद सर्दियों का मौसम शुरू हो जाएगा। लद्दाख में सर्दियां बहुत ही मुश्किल होती हैं और ऐसे में जो सैनिक फॉरवर्ड लोकेशंस पर तैनात हैं, उन्हें हर तरह का लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराया जा रहा है। इस समय पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत के 50,000 सैनिक तैनात हैं। सर्दियों में चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) की तरफ से किसी भी तरह की भड़काऊ कार्रवाई से निबटने के लिए इतने जवानों को वहां पर तैनात रखा जाएगा।

पहुंचाया जा रहा राशन, सर्दियों का सामान
फॉरवर्ड लोकेशंस पर तैनात जवानों को सर्दियों के खास कपड़ों से लेकर राशन, आर्कटिक टेंट्स और पोर्टेबल हीटर्स के साथ बाकी जरूरी सामान तक मुहैया कराया जा रहा है। इंडियन एयरफोर्स के एयरक्राफ्ट और सेना के हेलीकॉप्टर्स लगातार लद्दाख के लिए उड़ान भर रहे हैं। रोजाना कार्गो प्लेन के जरिए हर जरूरी सामान सैनिकों के लिए पहुंचाया जा रहा है। लद्दाख का रास्ता सर्दियों में बाकी देश से कट जाता है और ऐसे में सेना कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती है। मंगलवार को लद्दाख से सामने आईं तस्वीरों से पता लगता है कि सेना किस कदर इस जगह पर चीन का जवाब देने के लिए तैयार हो रही है। इंडियन आर्मी के पास लद्दाख में सबसे बड़ा ऑयल डिपो है और यह डिपो भी हर तरह से रेडी है। बड़े-बड़े ऑयल टैंकर्स को यहां पर देखा जा सकता है।
बॉर्डर विवाद दोनों देशों के बीच अनसुलझा मुद्दा
मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद को बताया है कि चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर टकराव क्यों जारी है। उन्होंने कहा था कि भारत और चीन, दोनों ने, औपचारिक तौर पर यह माना है कि सीमा का प्रश्न एक जटिल मुद्दा है जिसके समाधान के लिए संयम की आवश्यकता है और इस मुद्दे को निष्पक्ष, तार्किक और आपसी मंजूरी के साथ शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए हल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच एलएसी को लेकर अलग-अलग नजरिया है। ऐसे में शांति और स्थिरता बहाल रखने के लिए दोनों देशों के बीच कई तरह के समझौते और प्रोटोकॉल्स हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि अभी तक भारत और चीन का सीमा विवाद एक अनसुलझा मुद्दा है।
Recommended Video

इस बार का टकराव पहले के टकराव से अलग
रक्षा मंत्री ने कहा था कि पहले भी चीन के साथ टकराव हुए हैं लेकिन इस साल की स्थिति पूर्व में हुए टकरावों से बहुत अलग है। उन्होंने बताया कि मई माह की शुरुआत में चीन ने गलवान घाटी भारतीय जवानों के सामान्य और पारंपरिक गश्त करने के तरीकों में रूकावट पैदा करनी शुरू की थी। इसकी वजह से टकराव की स्थिति है। उन्होंने कहा, 'हमने चीन को राजनयिक और सैन्य चैनल्स के माध्यम से यह अवगत करा दिया, कि इस प्रकार की गतिविधियां, यथास्थिति को एकपक्षीय बदलने की कोशिश है। यह भी साफ कर दिया गया कि ये प्रयास हमें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है।' रक्षा मंत्री ने चीन के साथ साल 1993 और 1996 में हुए समझौतों के बारे में भी बताया।

सेना और जवानों का हौंसला बुलंद
रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा, 'इस सदन की एक गौरवशाली परम्परा रही है, कि जब भी देश के समक्ष कोई बड़ी चुनौती आयी है तो इस सदन ने भारतीय सेनाओं की दृढ़ता और संकल्प के प्रति अपनी पूरी एकता और भरोसा दिखाया है।' उन्होंने संसद को भरोसा दिलाया कि सेनाओं और जवानों का जोश और हौसला बुलंद है। रक्षा मंत्री ने जुलाई माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अचानक लद्दाख दौरे का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा, ' प्रधानमंत्री के बहादुर जवानों के बीच जाने के बाद हमारे कमांडर और जवानों में यह संदेश गया है कि देश के 130 करोड़ देशवासी जवानों के साथ हैं।'साथ ही उन्होंने आश्वासन दिलाया है कि भारत मौजूदा स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। रक्षा मंत्री ने कहा कि देश को इस बात का भरोसा रखना चाहिए कि भारत हर प्रकार परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार है।












Click it and Unblock the Notifications