'कभी-कभी यह जरूरी हो जाता है', आप सांसद संजय सिंह को निलंबित करने के बाद बोले उपराष्ट्रपति
Jagdeep Dhankhar: सोमवार को संसद की कार्रवाई शुरू होते ही विपक्ष का हंगामा एक बार फिर से शुरू हो गया। हंगामा ऐसा कि कई सदस्य राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के आसन तक पहुंच गए। फिर क्या था उपराष्ट्रपति ने सभी सदस्य को अपनी सीट पर बैठने के लिए कहा। कई सदस्ट तो सीट पर बैठ गए लेकिन आप सांसद संजय सिंह और विरोध जताने लगे। फिर इसके बाद उपराष्ट्रपति ने एक बार फिर से सीट पर जाने के लिए कहा लेकिन वह नहीं माने फिर उपराष्ट्रपति ने उन्हें पूरे मानसून सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया। अब संजय सिंह के निलंबन पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का बयान सामने आया है।
क्या कहा जगदीप धनखड़ ने?
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने कहा कि कभी-कभी अनुशासन बनाए रखने के लिए कठोर कदम उठाना जरूरी हो जाता है। अगर वह ऐसा नहीं करेंगे तो लोकतंत्र के मंदिरों की प्रतिष्ठा का क्षय होने लगेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सभा के सभापति के रूप में उनका प्रयास रहा है कि लोकतंत्र के मंदिरों में अनुशासन बना रहे। अनुशासन के बिना विकास संभव ही नहीं। बता दें कि जगदीप धनखड़ सोमवार को भारतीय वन सेवा के 54वें बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।

और क्या कहा उपराष्ट्रपति धनखड़ ने?
मनुष्य और उसके पर्यावरण के बीच सामंजस्य को जीवन का अमृत बताते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने युवा अधिकारियों से कृति के विकास और संरक्षण की आवश्यकता के बीच विवेकपूर्ण संतुलन बनाए रखने में मदद करने के लिए खुद को समर्पित करने को कहा। वन-निवास समुदायों के साथ व्यवहार करते समय संवेदनशीलता का आह्वान करते हुए, उन्होंने परिवीक्षार्थियों से प्रकृति संरक्षण के बारे में जागरूकता के लिए एक जन आंदोलन बनाने की अपील की।
सीखने के लिए इरादे कि आवश्यकता: जगदीप धनखड़
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने सीखने और मौलिक कर्तव्यों के पालन के महत्व पर भी जोर दिया। इसके लिए निवेश या शारीरिक प्रयास की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए केवल इरादे की आवश्यकता है। इस इरादे का क्रांतिकारी प्रभाव हो सकता है,'' उन्होंने कहा। इस कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति के सचिव सुनील कुमार गुप्ता, राज्यसभा के सचिव रंजीत पुन्हानी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सचिव लीना नंदन, राज्यसभा की अतिरिक्त सचिव वंदना कुमार, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक भारत ज्योति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।












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