देश भूला नेहरु को, शांतिवन में गिनती के लोग पहुंचे
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) पंडित जवाहर लाल नेहरु की पुण्यतिथि पर मंगलवार को उनकी राजधानी में समाधि शांति वन में गिनती के ही लोग दिखे। 100-150 लोगों से ज्यादा लोग नहीं पहुंचे देश के पहले प्रधानमंत्री को खिज्रे अकीदत देने के लिए। लोग आते -जाते रहे।
सन्नाटा रहा
कुछ दिन पहले राजधानी के एक अखबार ने खबर छापी थी कि नेहरु जी की पहली पुण्यतिथि पर उनकी समाधि पर हजारों लोग पहुंचे थे। बहरहाल, वक्त बदल गया है। आज उनकी 51 वीं पुण्यतिथि पर लगभग सन्नाटा रहा।
कुछ कांग्रेसी पहुंचे
कुछ पुराने कांग्रेसी जरूर आए थे। वे नेहरु जी को याद भी कर रहे थे। मिन्टो रोड के कांग्रेसी नगर सेवक रमेश दत्ता शांति वन पर थे। वे कह रहे थे कि बीते 35-40 साल इधर आ रहे हैं। इधर आकर अच्छा लगता है। उनके साथ कुछ और भी बुजुर्ग उनकी बात सुन रहे थे।
कोई विज्ञापन भी नहीं
आज राजधानी के किसी भी अखबार में नेहरु जी पर किसी सरकार या कांग्रेस पार्टी की तरफ से विज्ञापन भी नहीं छपा। पहले तो इस तरह के खूब विज्ञापन छपते थे। राजधानी में कांग्रेस के नेता राजेश डंग कहते हैं कि ये बेहद अफसोस की बात है कि देश नेहरु जी को भूल रहा है।
लाश मिली थी
बता दें कि शांति वन में कुछ समय पहले पेड़ से एक शख्स का शव लटका मिला था। मृतक की पहचान कमलेश्वर (35) के रूप में हुई।













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