वेंकैया नायडू ने खोला राज- नहीं बनना चाहता था उपराष्ट्रपति, पीएम मोदी से मना भी किया था लेकिन...

वेंकैया नायडू ने खोला राज- नहीं बनना चाहता था उपराष्ट्रपति, पीएम मोदी से मना भी किया था लेकिन...

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वो कभी भी 'उपराष्ट्रपति' बनना नहीं चाहते थे। रविवार को अपने दो साल के कार्यकाल पर एक किताब का विमोचन करते हुए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा, 'मैं कभी कोई पद नहीं लेना चाहते था, बल्कि मैं भारतीय जनसंघ के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुख के नक्शेकदम पर चलते हुए रचनात्मक कार्य करना चाहता था। जिस दिन मेरा नाम उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना गया, उस दिन मेरी आंखों में आंसू थे और उसकी वजह केवल एक थी कि अब मैं भारतीय जनता पार्टी के दफ्तर नहीं जा पाऊंगा और ना ही पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत कर पाऊंगा।'

'मैंने पीएम से कहा, मैं अपना पद छोड़ना चाहता हूं'

'मैंने पीएम से कहा, मैं अपना पद छोड़ना चाहता हूं'

कार्यक्रम में वेंकैया नायडू ने कहा, 'पार्टी ने मुझे सबकुछ दिया, सिवाय प्रधानमंत्री पद के, जिसके लिए मैं उपयुक्त नहीं था। मेरे प्यारे दोस्तों मैं आपको सच बताता हूं... मैं कभी भी उपराष्ट्रपति नहीं बनना चाहता था...। मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अपनी इच्छा जाहिर की थी, कि उनके दूसरे कार्यकाल में यानी 2019 के बाद मैं अपना पद छोड़ना चाहता हूं और नानाजी देशमुख का अनुसरण करते हुए रचनात्मक कार्यों में लगना चाहता हूं। मैं जमीन पर इसकी योजना बना रहा था... मुझे यह सोचकर मजा आ रहा था कि मैं ऐसा करूंगा... लेकिन ऐसा नहीं हुआ।'

'मेरी आंखों में आंसू थे...'

'मेरी आंखों में आंसू थे...'

वेंकैया नायडू ने आगे कहा, 'मैंने उपराष्ट्रपति पद के लिए अपनी तरफ से सुझाव के तौर पर कुछ नाम भी दिए। पार्टी की संसदीय बोर्ड की एक बैठक के बाद अमित भाई ने कहा कि पार्टी में सभी की राय है कि उपराष्ट्रपति पदे के लिए मैं सबसे उपयुक्त आदमी हूं। मुझे इसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। मेरी आंखों में आंसू थे, इसलिए नहीं कि मैं मंत्री पद खो रहा था, मंत्री पद तो मैं वैसे भी छोड़ने ही वाला था। इसका एकमात्र कारण यह था कि अब अगले दिन से मैं ना भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय जा पाऊंगा और ना ही पार्टी कार्यकर्ताओं से मिल पाऊंगा।'

'पार्टी ने मुझे सबकुछ दिया, सिवाय प्रधानमंत्री पद के'

'पार्टी ने मुझे सबकुछ दिया, सिवाय प्रधानमंत्री पद के'

कार्यक्रम में आगे बोलते हुए वेंकैया नायडू ने कहा, 'मैं एबीवीपी और आरएसएस के आंदोलन के भविष्य को लेकर चिंतित था, और इसीलिए भी मेरी आंखों में आंसू थे। मैं अपनी युवा उम्र में इस आंदोलन से जुड़ा और पार्टी ने मुझे सबकुछ दिया, सिवाय प्रधानमंत्री पद के। उस पद के लिए मैं उपयुक्त भी नहीं था। मैं अपनी क्षमता और योग्यता के बारे में जानता हूं।' वहीं इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी मौजूद थे। अमित शाह ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें वेकैया नायडू से एक शिकायत है कि वो सत्ता पक्ष के प्रति ज्यादा सख्त रहते हैं और सरकार का हर मंत्री उनसे डरता है।

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