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दुर्लभ बीमारी: 16 करोड़ रुपये का इंजेक्शन भी काम न आया , यूं जिंदगी की जंग हार गई साल भर की मासूम

पुणे, 2 अगस्त: एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित एक साल की वेदिका सौरभ शिंदे ने रविवार शाम को पुणे के एक अस्पताल में आखिरी सांसें लीं। उसकी जिंदगी बचाने के लिए दुनियाभर से दुआओं के हाथ उठे थे, दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन भी लगाया गया था। लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था। वेदिका की दवा के लिए आयात शुल्क माफ करने का मुद्दा लोकसभा में भी उठ चुका था। पिछले महीने जब उसके लिए अमेरिका से इंजेक्शन आ गया और उसे वह लगा दिया गया तो लगा था कि महीने- दो महीने में वह सामान्य बच्ची की तरह खेलने-कूदने लगेगी। लेकिन, रविवार शाम को एक दुखद खबर ने दुनियाभर में उसके लिए दुआ मांगने वालों के आंखों में आंसू ला दिए।

जिंदगी की जंग हार गई साल भर की मासूम

जिंदगी की जंग हार गई साल भर की मासूम

एक साल की वेदिका स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी नाम की एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही थी। यह एक आनुवंशिक रोग है, जिससे उसकी रक्षा के लिए दुनियाभर से दुआओं और समर्थन के हाथ उठे थे। लेकिन, रविवार शाम को उसने पुणे के दीनानाथ मंगेश्कर अस्पताल में दम तोड़ दिया। बीमारी के चलते मासूम का सेंट्रल नर्वस सिस्टम नाकाम हो चुका था और वह अपनी मांसपेशियों पर नियंत्रण नहीं रख पाती थी। पिछले महीने ही उसे इंजेक्शन जोलगेंस्मा लगाया गया था, जिसके लिए विभिन्न क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए 16 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। 13 महीने की मासूम की मौत की खबर देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और करोड़ों लोगों ने दुनिया के इस सबसे महंगे इंजेक्शन से जो उम्मीद लगा रखी थी, वह एक ही झटके में टूट गई।(बायीं तस्वीर सौजन्य- इंडियन एक्सप्रेस, दायीं फेसबुक)

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    खेलते-खेलते तबीयत बिगड़ गई- वेदिका के पिता

    खेलते-खेलते तबीयत बिगड़ गई- वेदिका के पिता

    वेदिका के पिता सौरभ शिंदे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 'कल शाम को वेदिका खुद से खेल रही थी कि अचानक उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। हम तुरंत उसे एक नजदीकी अस्पताल ले गए। भोसारी अस्पताल में जब उसकी हालत स्थिर हुई तो हम उसे दीनानाथ मंगेश्कर अस्पताल ले गए। उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो पाया। शाम में उसकी मौत हो गई।'

    '....लेकिन उसके लिए भाग्य को कुछ और ही मंजूर था'

    '....लेकिन उसके लिए भाग्य को कुछ और ही मंजूर था'

    महाराष्ट्र के पिपरी-चिंचवड के भोसारी इलाके में रहने वाले वेदिका के पिता के मुताबिक, 'पिछले महीने जब वेदिका को इंजेक्शन दिया गया, उसकी स्थिति में सुधार था। इंजेक्शन देने से पहले वह हमेशा बिस्तर पर पड़ी रहती थी। लेकिन, इंजेक्शन के बाद उसने मूवमेंट करना शुरू कर दिया था। पिछले महीने हमने उसका जन्मदिन भी मनाया था। डॉक्टरों ने कहा था कि तीन महीने तक हमें उसका ज्यादा केयर करना होगा, उसके बाद उसकी स्थिति में बहुत ज्यादा सुधार होगा।' उन्होंने बताया कि 16 करोड़ रुपये कई प्लेटफॉर्म के जरिए जुटाए गए। लोकसभा में सांसद अमोल खोले ने सरकार से अपील की थी कि अमेरिका से इंजेक्शन मंगवाने के लिए आयात शुल्क माफ कर दे। ऐक्टर जॉन अब्राहम ने भी दान के लिए अपील की थी। परिवार वालों ने कहा कि पूरी दुनिया से सहयोग मिला, '....लेकिन उसके लिए भाग्य को कुछ और ही मंजूर था।'

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी से पीड़ित थी वेदिका

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी से पीड़ित थी वेदिका

    वेदिका के पिता के मुताबिक 'वेदिका जब चार महीने की थी, तभी वह अपनी गर्दन को नहीं सभाल पाती थी। वह बगल में गिर जाती थी और अपने आप को सीधा नहीं रख पाती थी।' जब डॉक्टर के पास ले जाया गया तो उन्होंने स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी बताया, जिसके चलते मांसपेशियां खत्म होने लगती हैं। तब उन्होंने जोलगेंस्मा के बारे में बताया जो कि दुनिया की सबसे महंगी दवा है, जिसकी कीमत 17 करोड़ रुपया है। डॉक्टरों ने कहा था कि यह इंजेक्शन वेदिका की जान बचा सकता है। लेकिन, इंजेक्शन लगने के बाद भी वह समाचार आया, जो विश्व के करोड़ों लोगों को आहत कर गया। (अंतिम तीनों तस्वीरें- सांकेतिक)

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