गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर गुजरात प्रस्तुत करेगा ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम’ विषय पर आधारित भव्य झांकी
गुजरात गणतंत्र दिवस झांकी वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मनाती है, जिसमें 1906 में इसकी शुरुआती उत्पत्ति से लेकर इसके वर्तमान स्वरूप तक के ध्वज के इतिहास को दर्शाया गया है। यह भिकाजी कामा के 1907 के पेरिस के प्रदर्शन का सम्मान करती है, और स्वतंत्रता संग्राम को भारत की आत्मनिर्भरता भावना से जोड़ती है, जो गांधीवादी प्रतीकात्मकता और स्वदेशी संदेश के साथ समाप्त होती है।
‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि हर भारतीय के भीतर स्वदेशी, स्वावलंबन और स्वतंत्रता की भावना जगाने वाला मंत्र है। ‘वंदे मातरम’ गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर गुजरात गणतंत्र दिवस परेड में ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम’ विषय पर आधारित एक आकर्षक और विचारोत्तेजक झांकी प्रस्तुत करेगा। यह झांकी भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की निर्माण यात्रा, उसके बदलते स्वरूप और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक क्षणों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाएगी।

झांकी में गुजरात की नवसारी में जन्मी वीरांगना मैडम भीकाजी कामा की ऐतिहासिक भूमिका को विशेष रूप से उकेरा गया है। उन्होंने 1907 में पेरिस में विदेशी धरती पर ‘वंदे मातरम’ अंकित भारतीय ध्वज फहराकर स्वतंत्रता संग्राम की लौ प्रज्वलित की थी। यह ध्वज जर्मनी के स्टटगार्ट और बर्लिन में आयोजित इंडियन सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस में भी फहराया गया था। झांकी में मैडम कामा की ध्वज लहराती अर्ध-प्रतिमा के नीचे संविधान में शामिल सभी भारतीय भाषाओं में ‘वंदे मातरम’ अंकित किया गया है।
झांकी के मध्य भाग में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की विकास यात्रा को दर्शाया गया है। इसकी शुरुआत वर्ष 1906 से होती है, जब कोलकाता के पारसी बागान में विदेशी वस्तुओं की होली जलाते हुए ‘वंदे मातरम’ लिखा हुआ ध्वज फहराया गया था। इसके बाद 1907 में मैडम भीकाजी कामा द्वारा पेरिस में ध्वज फहराना, 1917 में होमरूल आंदोलन के दौरान एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक द्वारा प्रयुक्त ध्वज, तथा 1921 में विजयवाड़ा में पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किए गए ध्वज का प्रस्तुतीकरण किया गया है। अंततः 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा धर्मचक्र के साथ तिरंगे को वर्तमान स्वरूप में अपनाए जाने की ऐतिहासिक घटना को भी झांकी में दर्शाया गया है।
झांकी के अंतिम हिस्से में चरखे के माध्यम से स्वदेशी और स्वावलंबन का संदेश देने वाले महात्मा गांधी को एक विशाल धर्मचक्र के साथ प्रदर्शित किया गया है। यह प्रस्तुति स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों और वर्तमान ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के बीच सशक्त सामंजस्य को दर्शाती है।
गुजराती साहित्य के ‘राष्ट्रीय शायर’ झवेरचंद मेघाणी द्वारा रचित प्रसिद्ध गीत ‘कसुंबी नो रंग’ की लय-ताल पर कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियां झांकी को और अधिक प्रभावशाली बनाती हैं, जो दर्शकों में राष्ट्रीय चेतना और उत्साह का संचार करती हैं।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की 13 झांकियों सहित कुल 30 झांकियां प्रदर्शित की जाएंगी। 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
गुजरात सरकार के सूचना विभाग द्वारा प्रस्तुत इस झांकी के निर्माण में सूचना एवं प्रसारण सचिव डॉ. विक्रांत पांडे, सूचना आयुक्त किशोर बचाणी और अपर निदेशक अरविंद पटेल के मार्गदर्शन में संयुक्त सूचना निदेशक डॉ. संजय कचोट तथा उप सूचना निदेशक भावना वसावा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।












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