दरोगा ने आईजी बनकर बिजनेसमैन से लूट लिए 1 करोड़, बाद में पता चला चौंका देने वाला सच

देहरादून। उत्तराखंड में बड़ी लूट का एक बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस लूट को अंजाम देने वाले कोई औऱ नहीं बल्कि स्थानीय पुलिस के तीन कर्मी थे। देहरादून में एक इंस्पेक्टर समेत दो पुलिसकर्मियों ने आईजी गढ़वाल की आधिकारिक गाड़ी का इस्तेमाल कर एक बिजनेसमैन से एक करोड़ रुपए की रकम वसूल ली। यह मामला तब खुला जब प्रॉपर्टी डीलर ने जब्त धनराशि को लेकर आयकर विभाग और पुलिस से जानकारी मांगी। कोई जानकारी ना मिलने पर उसने पुलिस के आला अधिकारियों को उस रात की पूरी घटना बताई।

चुनावी मौसम में आचार सहिंता का उठाया फायदा

चुनावी मौसम में आचार सहिंता का उठाया फायदा

दरअसल चुनावी मौसम में आचार सहिंता लागू होने के बाद पुलिस बड़े पैमाने पर अवैध कैश को पकड़ने के लिए अभियान चला रही है। जिसका फायदा इन तीनों पुलिसकर्मियों ने उठाया। घटना 4 अप्रैल को राजपुर रोड में स्थित एक होटेल की है लेकिन मामला इस हफ्ते ही सामने आया जब बिजनसमैन अनुरोध पंवर को धोखाधड़ी का संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। 4 अप्रैल को प्रॉपर्टी डीलर अनुरोध अपने एक परिचित से प्रॉपर्टी के लेनदेन से संबंधित रकम लेने गए थे। वहां से लौटते समय होटल मधुबन के सामने एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो के चालक ने ओवरटेक कर उन्हें रोक लिया।

लूट में आईजी की कार का किया इस्तेमाल

लूट में आईजी की कार का किया इस्तेमाल

इसके बाद कार से दो पुलिसकर्मा उतरे और चुनाव की चेकिंग के नाम पर उन्होंने कार की तलाशी लेने लगे। उन्हें अनुरोध की कार से कैश से भरा बैग कब्जे में ले लिया। जब अनुरोध ने इसका कारण पूछा तो वर्दीधारियों ने बताया कि स्कार्पियो में आईजी गढ़वाल बैठे हैं और वे वाहनों में ले जाए जा रहे कैश की चेकिंग कर रहे हैं। कैश जब्त कर आइजी की गाड़ी में रख दिया गया और उन्हें वहां से जाने को कहा।

तीनों ने मिलकर रची थी ये साजिश

तीनों ने मिलकर रची थी ये साजिश

घटना के कुछ दिन बाद जब बिजनसमैन ने इनकम टैक्स विभाग और पुलिस से अपने पैसों की जानकारी लेने के लिए संपर्क किया तो उन्हें पता चला कि उनके साथ ठगी हुई है और शिकायत दर्ज कराई। दो-तीन दिन भटकने के बाद अनुरोध ने पुलिस के आला अधिकारियों को अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। इस वारदात में शामिल पुलिसकर्मियों में से एक आईटी गढ़वाल अजय रौतेला का ड्राइवर था जिसने आरोपियों को कार का इस्तेमाल करने की इजाजत दी। वहीं दो अन्य की पहचान सब इंस्पेक्टर दिनेश सिंह नेगी( पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू के पूर्व पीआरओ), कॉन्स्टेबल हिमांशू के तौर पर हुई है।

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