बीजेपी के साथ खेल न कर दें राजा भैया! मोदी-योगी की तारीफ, लेकिन अखिलेश के लिए क्यों दे रहे सिग्नल?
Uttar Pradesh Lok Sabha Election: उत्तर प्रदेश जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने इस बार के एक ऐसा फैसला लिया है, जिससे लगता है कि प्रतापढ़ और कौशांबी लोकसभा सीटों में भाजपा प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
राजा भैया ने इस चुनाव में शुरू में बीजेपी के साथ गठबंधन की कोशिशें कीं। वह प्रतापढ़ और कौशांबी दोनों ही सीटें अपनी पार्टी के लिए चाहते थे। लेकिन, गठबंधन नहीं हो पाया और उन्होंने अपने समर्थकों से कह दिया कि जिनकी जहां इच्छा है, वह अपनी मर्जी से मतदान कर सकते हैं।

सपा को वोट देने का सिग्नल दे रहे हैं राजा भैया!
लेकिन, राजा भैया जो बात खुद नहीं कह रहे हैं, उसके बारे में कहा जा रहा है कि वह परोक्ष रूप से समाजवादी पार्टी का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने टीवी9 को एक इंटरव्यू दिया है, जिससे भी यही निकलकर आ रहा है कि वह जिस तरह से अपने समर्थकों से कह रहे हैं कि उन्हें जहां इच्छा है, वहां वोट डालें, यह एक तरह से समाजवादी पार्टी को वोट डालने के लिए कहने का इशारा है!
'कार्यकर्ता प्रसन्न है, जिसको जहां मन है वहां जाकर मतदान कर सकता है'
राजा भैया का इन दोनों ही क्षेत्रों में खासा प्रभाव माना जाता है। उन्होंने इंटरव्यू में कहा, 'हमारा गठबंधन (बीजेपी से) नहीं हुआ तो हमने फैसला किया कि प्रत्याशी नहीं उतारेंगे। कार्यकर्ताओं और समर्थकों से विचार के बाद फैसला लिया गया कि आप लोग जहां मतदान करना चाहें करें। यह भी कहा है कि वोट देना है और नोटा भी मत दबाइएगा। मतदाता, कार्यकर्ता प्रसन्न है, जिसको जहां मन है वहां जाकर मतदान कर सकता है।'
कौशांबी में 20 मई यानी सोमवार को और प्रतापगढ़ में 25 मई को वोटिंग है। जब उनसे सवाल हुआ कि समाजवादी पार्टी प्रत्याशी और उनके समर्थक तो यह कहते फिर रहे हैं कि राजा भैया ने उनका समर्थन किया है, उनके गले में उनकी पार्टी का पट्टा भी लटका है।
हमारा कोई सिग्नल नहीं है, यह जनभावना है- राजा भैया
इस पर राजा भैया ने जवाब दिया, 'जातीय समीकरण, एंटी इंकंबेंसी फैक्टर की वजह से यह हो सकता है कि अधिकांश लोग सपा के समर्थन में हों। दो बार के मौजूदा सांसद (दोनों बीजेपी) के खिलाफ एंटी इंकंबेंसी और समाजवादी पार्टी का चेहरा फ्रेश है, पहली बार चुनाव मैदान में है। अगर हमारा पट्टा पहनकर कोई घूम रहा है, तो यह हमारा कोई सिग्नल नहीं है, यह जनभावना है।'
अखिलेश यादव से कटुता दूर हो चुकी है- राजा भैया
कुरेदने पर उनका जवाब है, "हमारा समर्थन होता तो मुखर समर्थन होता, मौन समर्थन में हमारा विश्वास नहीं।" इसके साथ ही उन्होंने यह भी माना है कि अखिलेश यादव से 'जो तल्खियां थीं, वह कटुता समाप्त हो गई है। मन में कोई कटुता नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा, 'मेरे समर्थक जो सपा को सपोर्ट कर रहे हैं, उनसे पूछिए कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं।'
अमित शाह से बेंगलुरु जाकर कर चुके हैं मुलाकात
राजा भैया ने फरवरी में हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी को समर्थन दिया था। वह कुछ समय पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने बेंगलुरु भी गए थे और इस बातचीत की वह काफी सराहना भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'अमित शाह से भेंट बहुत अच्छी रही और व्यक्तिगत तौर पर मुझे बहुत अच्छा लगा। उन्होंने भी बहुत प्रशंसा की और बहुत ही अच्छी मुलाकाकात रही।' हालांकि, उन्होंने साफ किया कि गृहमंत्री से मिलने बेंगलुरु गए जाने तक नामांकन हो चुका था।
भाजपा से गठबंधन में प्रतापगढ़ और कौशांबी दोनों सीटें चाहते थे
इसके बाद उन्होंने माना कि बीजेपी से गठबंधन करना चाहते थे। लेकिन, जब नहीं हुआ तो उसके कारणों के पीछे नहीं जाना चाहते। उन्होंने कहा, 'हम चाहते थे कि प्रतापगढ़ और कौशांबी की दोनों सीटें जनसत्ता दल के खाते में आए, जो नहीं आ सकीं।' बीजेपी ऐसा क्यों करती पूछने पर उनका कहना था, 'चाहने में कोई अपराध नहीं, बहुत लोगों ने चाहा और बहुत लोगों को मिला।'
मोदी और योगी की जमकर कर रहे तारीफ
इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ में कोई कमी नहीं छोड़ी। वे बोले, "मोदीजी भारत के बहुत लोकप्रिय और सशक्त नेता हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई ऐसे निर्णय लिए जो राष्ट्रहित में हैं, देशहित में हैं; और शायद कोई दूसरा प्रधानमंत्री होता तो इतने सशक्त निर्णय न ले पाता।"
वहीं यूपी के सीएम के बारे में कहा, "योगी जी बहुत ही सशक्त और कर्मठ मुख्यमंत्री हैं उत्तर प्रदेश के। योगीजी की लोकप्रियता है और योगीजी की कार्यशैली ऐसी है कि लोग उसको पसंद करते हैं।"
वहीं भाजपा से क्षत्रीय समाज की नाराजगी (गुजरात के भाजपा नेता पुरुषोत्तम रुपाला के समाज के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर) की खबरों को लेकर कहा कि पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नाराजगी दिखी, वह अब नहीं है। उन्होंने कहा, 'क्षत्रीयों की नाराजगी बिल्कुल थी। समाज का हर व्यक्ति उससे प्रभावित हुआ।' उन्होंने यह भी दावा किया कि 'बीजेपी को नाराजगी का नुकसान हुआ, लेकिन आगे होगा कि नहीं यह नहीं कह सकते, क्योंकि अब उतनी चर्चा नहीं है।'












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