UP By-Polls 2024: यूपी की इन 10 सीटों पर फिर चुनावी टक्कर! BJP लेगी बदला या राहुल-अखिलेश की जोड़ी करेगी धमाल?
Uttar Pradesh By Election 2024: इस बार लोकसभा चुनाव के नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे। यूपी की 80 सीटों पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की जोड़ी हिट नजर आई। कांग्रेस नीत वाले विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इन्क्लूसिव अलायंस (INDIA) ने 43 सीटें घसीटीं। जिसमें 37 सपा और 6 पर कांग्रेस रही। उधर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने पाले में सिर्फ 33 सीटें ही जुटा सकी।
खास बात यह है कि लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भी सूबे में चुनावी आंधी फिर से देखने को मिल सकती है। क्योंकि, अगले कुछ महीनों में 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मंच तैयार है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी अपने नुकसान का बदला लेने की पूरी तैयारी में है, जबकि सपा और कांग्रेस दोनों मिलकर कांटे की टक्कर देने की कोशिश में नजर आएंगे। आइए जानते हैं किन सीटों पर होंगे उपचुनाव? क्यों होंगे?

इन 10 सीटों पर होंगे उपचुनाव
- मैनपुरी की करहल सीट: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कन्नौज संसदीय क्षेत्र को बरकरार रखने के लिए इसे पहले ही खाली कर दिया है।
- अयोध्या की मिल्कीपुर: सपा विधायक अवधेश प्रसाद ने फैजाबाद (अयोध्या) संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद विधायकी से इस्तीफा दे दिया।
- मुरादाबाद की कुंदरकी: यहां से सपा विधायक जिया-उर-रहमान बर्क अब पार्टी के टिकट पर संभल लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए हैं।
- गाजियाबाद सदर: इस सीट से अतुल गर्ग गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र से चुने गए हैं।
- मिर्जापुर जिले की मझवां: बीजेपी विधायक विनोद कुमार बिंद भदोही लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। ऐसे में पार्टी विधानसभा में एक सीट हासिल करना चाहेगी।
- अंबेडकर नगर की कटेहरी: यहां से सपा विधायक लालजी वर्मा ने अंबेडकरनगर से जीत दर्ज कर सांसद चुने गए।
- प्रयागराज की फूलपुर: इस सीट से बीजेपी विधायक प्रवीण पटेल ने फूलपुर लोकसभा सीट जीती और सांसद चुने गए।
- मुजफ्फरनगर की मीरापुर: इस सीट पर रालोद के विधायक चंदन चौहान बिजनौर से सांसद बन गए हैं।
- अलीगढ़ की खैर सीट: बीजेपी विधायक अनूप प्रधान वाल्मीकि ने हाथरस लोकसभा सीट से चुनाव जीता और सांसद बन गए।
- कानपुर की सीसामऊ सीट: यह सीट भी खाली होने जा रही है, क्योंकि इसके सपा विधायक इरफान सोलंकी को आगजनी के एक मामले में हाल ही में 7 साल की सजा सुनाई गई थी। जिसके बाद अब उनकी विधानसभा की सदस्यता जाने वाली है।
क्यों सांसद बनते ही छोड़नी पड़ती है विधानसभा सीट?
भारत में, संसद सदस्य (सांसद) बनने के बाद विधानसभा की सीट छोड़नी पड़ती है, क्योंकि संविधान और चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार कोई व्यक्ति एक समय में दो निर्वाचित पदों पर नहीं रह सकता है। यह नियम इस उद्देश्य से बनाया गया है कि एक व्यक्ति को एक समय में केवल एक ही पद पर रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।
यह नियम संविधान के अनुच्छेद 101 और 190 में उल्लिखित है, जो संसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों की अयोग्यता को निर्धारित करते हैं। इस संदर्भ में, अगर कोई व्यक्ति जो पहले से ही राज्य विधानसभा का सदस्य है, संसद के लिए चुना जाता है, तो उसे अपनी विधानसभा की सीट से इस्तीफा देना होगा। यह प्रावधान इस उद्देश्य को भी सुनिश्चित करता है कि प्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रति पूरी तरह से समर्पित रहें और संसाधनों का दुरुपयोग न हो। इसके अलावा, यह चुनावी प्रक्रिया में स्पष्टता और पारदर्शिता बनाए रखने में भी मदद करता है।
बीजेपी और सपा के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?
आपको बता दें कि उपचुनाव की 10 सीटों में 5 सपा, 3 बीजेपी, एक रालोद व एक निषाद पार्टी की हैं। इस चुनाव में कांग्रेस को कितनी भागीदारी मिलेगी? यह अभी मंथन का विषय बना हुआ है। उधर, अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव में प्रभावित प्रदर्शन को कायम रखते हुए, विधानसभा में अपनी पार्टी को मजबूत बनाने की कोशिश करते दिख सकते हैं।
10 सीटों के उपचुनाव में अखिलेश अपनी मजबूत दावेदारी दिखाकर विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर जीत का संदेश देने की कोशिश करते नजर आएंगे। वहीं, बीजेपी अपनी लोकसभा हार का बदला लेगी और मजबूत स्थिति दिखाते हुए करारी टक्कर देगी।
उपचुनाव की आवश्यकता कब पड़ती है?
- विधायक ने इस्तीफा दे दिया हो।
- विधायक का निधन हो गया हो।
- विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया गया हो।
- विधायक ने लोकसभा चुनाव जीतकर विधानसभा की सीट छोड़ दी हो।












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