HIV से बचाव के पहले इंजेक्शन को USFDA की मंजूरी, 6 महीने में सिर्फ एक डोज होगा काफी
दुनियाभर में हर दिन हजारों लोग HIV संक्रमण (Infection) का शिकार हो रहे हैं और अब भी यह वायरस एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। इसी कड़ी में एक बड़ी कामयाबी सामने आई है- अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (USFDA) ने Lenacapavir (लेनाकैपाविर) नामक इंजेक्शन को HIV से बचाव के लिए मंजूरी दे दी है। यह पहली ऐसी वैक्सीन है जिसे साल में केवल दो बार लगाया जाएगा और यह लगभग पूर्ण सुरक्षा देती है।
Lenacapavir क्या है और यह कैसे काम करता है?
Lenacapavir एक Capsid Inhibitor है- यह HIV वायरस के उस प्रोटीन शेल (Capsid) को ब्लॉक करता है जिसकी मदद से वायरस शरीर में फैलता है।

- यह इंजेक्शन 6-6 महीने के अंतर पर लगाया जाता है।
- मौजूदा दवाओं की तरह रोजाना गोली लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
- यह तरीका गोपनीय (Discreet) है और उन लोगों के लिए आदर्श है जो रोज दवा नहीं ले पाते।
कितना असरदार है यह इंजेक्शन?
Lenacapavir की दो बड़ी क्लिनिकल स्टडीज में शानदार नतीजे सामने आए:
- पहली स्टडी (2,000 से अधिक महिलाएं- सब-सहारा अफ्रीका): 100% HIV रोकथाम, यानी कोई इंफेक्शन नहीं।
- दूसरी स्टडी (2,000+ पुरुष और ट्रांसजेंडर प्रतिभागी): केवल दो इंफेक्शन, यानी 99.9% की रोकथाम दर।
गिलियड साइंसेज के CEO डैनियल ओ'डे के मुताबिक, 'साल में सिर्फ दो डोज के साथ HIV प्रिवेंशन में इतना बेहतरीन परिणाम मिलना एक बड़ा बदलाव है।'
क्या यह सुरक्षित है?
- क्लिनिकल ट्रायल में इस दवा को सुरक्षित और सहनीय (well-tolerated) पाया गया है।
- सबसे सामान्य साइड इफेक्ट हल्की सूई की जगह पर सूजन या दर्द रहा है।
- अब तक कोई गंभीर स्वास्थ्य जोखिम सामने नहीं आया है।
किन लोगों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
Lenacapavir का यह फॉर्मूला खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा जिन्हें रोजाना दवा लेना कठिन लगता है, जैसे:
- युवा महिलाएं
- LGBTQ+ समुदाय
- दूर-दराज या सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं वाले क्षेत्र
- वो लोग जो HIV के डर या सामाजिक दबाव के कारण दवा लेने से कतराते हैं
क्या भारत और बाकी देशों में भी मिलेगा ये इंजेक्शन?
अभी यह इंजेक्शन केवल अमेरिका में ही मंज़ूर हुआ है। अन्य देशों - जैसे यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका - में इसकी अनुमति की प्रक्रिया जारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस पर 14 जुलाई को इंटरनेशनल एड्स कॉन्फ्रेंस (किगाली) में गाइडलाइन जारी करेगा।
क्या होगी कीमत और क्या भारत में सस्ती दवा आएगी?
- अमेरिका में इसकी कीमत लगभग $25,000 (₹20 लाख सालाना) हो सकती है।
- HIV ट्रीटमेंट के लिए यही दवा अभी \$39,000 में बेची जाती है।
- लेकिन लो-इनकम देशों के लिए Gilead पर प्राइस कट और लाइसेंस देने का दबाव है
- अनुमान है कि जनरल वर्जन आने पर इसकी कीमत ₹2000-₹4000 सालाना हो सकती है।
भारत में HIV की स्थिति क्या है?
नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (NACO) के अनुसार:
- भारत में लगभग 24 लाख लोग HIV से संक्रमित हैं (2021 का डेटा)
- उसी साल 41,970 लोगों की मौत एड्स संबंधी बीमारियों से हुई
- यह वैक्सीन भारत जैसे देशों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है अगर यह सस्ती और जल्दी उपलब्ध कराई जाए












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