अमेरिका ने रूस और भारत के बीच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम डील पर जताई चिंता
अमेरिका ने भारत और रूस के बीच फाइनल होने वाली एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील पर चिंता जाहिर की है। अमेरिका ने कहा है कि इस डील के बाद भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच काम करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत और रूस के बीच फाइनल होने वाली एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील पर चिंता जाहिर की है। अमेरिका ने कहा है कि इस डील के बाद भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच काम करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। अमेरिका की आर्मर्ड सर्विस कमेटी की ओर से इस डील पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि भारत को इस चिंता से अवगत करा दिया है। भारत सरकार को यह भी बता दिया गया है इस डील के बाद अमेरिका के लिए भारत के साथ भविष्य में संवेदनशील टेक्नोलॉजी को साझा करना काफी मुश्किल हो जाएगा। इंग्लिश डेली इकोनॉमिक टाइम्स की ओर से इस बारे में जानकारी दी गई है।

तो फिर अमेरिका नहीं देगा टेक्नोलॉजी
अखबार की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में हाउस ऑफ आर्मर्ड सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन मैक थ्रॉनबेरी ने कहा है कि इस बात को लेकर चिंता है कि कोई भी देश जो इस सिस्टम को खरीदेगा वह अमेरिकी सेनाओं के साथ पारस्परिक सहयोग को जटिल कर देगा। उन्होंने हालांकि इस बात को भी साफ किया कि इस डिफेंस सिस्टम की खरीद रूस पर संभावित प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आती है। साथ ही उम्मीद जताई कि भारत इस सिस्टम को खरीदने से पहले अच्छे से विचार करेगा।
भारत और रूस के बीच इस मिसाइल सिस्टम को लेकर अक्टूबर में डील साइन होने वाली है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह डील करीब 39,000 करोड़ रुपए की है। कमेटी का मानना है कि भारत को फाइटर जेट एफ-16 से जुड़ी टेक्नोलॉजी चाहिए और वह इसका प्रोडक्शन भी यहीं करना चाहता है लेकिन मुद्दा यह है कि जब आप टेक्नोलॉजी की बात करते हैं तो फिर एस-400 भी आपके पास है। ऐसे में चिंता होना लाजिमी है। एस- 400 एयर डिफेंस सिस्टम 400 किमी की दूरी से आने वाले किसी भी टारगेट को यह सिस्टम पल भर में चित्त कर सकता है।रडार की पकड़ से दूर यह रडार की पकड़ न आने वाली अमेरिकन एफ-35 फाइटर जेट को भी मार गिरा सकता है। रूस की एस-400 रक्षा प्रणाली में अलग-अलग क्षमता की तीन तरह की मिसाइलें मौजूद हैं।












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