अमेरिकी कंपनियों की शर्तों से बढ़ी Make In India की मुश्किल
नई दिल्ली। भारतीय रक्षा मंत्री को एक व्यापारिक लॉबी समूह की ओर से मिले पत्र के मुताबिक अमेरिकी रक्षा कंपनियों ने अरबों डॉलर के सौदों के लिए भारत में उत्पादन यूनिट स्थापित करने की पेशकश की है। इसके लिए अमेरिकी कंपनियां टेक्नोलॉजी में भी अपना नियंत्रण चाहती हैं। इसके लिए ये कंपनियां भारत सरकार से मजबूत आश्वासन चाहती हैं।

रक्षा मंत्री को व्यापारिक लॉबी ने लिखा पत्र
इस पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि ये कंपनियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' प्रोग्राम के तहत भारतीय कंपनियों की साझेदारी में काम करेंगी, लेकिन रक्षा उत्पादों में अगर कोई गड़बड़ी होती है तो उसके लिए उत्तरदायी होने से इंकार किया है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि बिना तकनीक ट्रांसफर रक्षा उत्पाद को लेकर मेक इन इंडिया का लक्ष्य कैसे पूरा होगा?
देश सोवियत युग के मिग विमानों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में लॉकहीड मार्टिन और बोइंग, दोनों कंपनियां भारतीय सेना को लड़ाकू विमान सप्लाई को लेकर लगातार बोली लगा रहे हैं। हालांकि भारत घरेलू जेट बनाने की कोशिश में जुटा है लेकिन लगातार देरी की वजह से करीब 3 दशक से ये पूरा नहीं हो सका है। मेक इन इंडिया के तहत लॉकहीड की ओर से एफ-16 विमानों के प्रॉडक्शन यूनिट को टेक्सस के फोर्ट वर्थ से हटाकर भारत लाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके लिए कंपनी ने कहा है कि अगर भारत कम से कम 100 सिंगल इंजन फाइटर जेट बनाने का आदेश देता है तो वह अपना एकमात्र कारखाना भारत में बनाने के लिए तैयार है। अमेरिकी कंपनी ने रक्षा मंत्रालय के साथ नए रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत टाटा अडवांस्ड सिस्टम को अपना स्थानीय पार्टनर चुना है। इस नए मॉडल के तहत विदेशी वास्तविक उपकरण निर्माता किसी भारतीय प्राइवेट फर्म के साथ 49 फीसदी तक का शेयर रख सकता है।
यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल ने पिछले महीने भारतीय रक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा है। इसमें भारत की तरफ से आश्वासन मांगा गया है कि ज्वाइंट वेंचर में जूनियर पार्टनर होने के बाद भी अमेरिकी कंपनियों को प्रौद्योगिकी पर अपना नियंत्रण रखने दिया जाएगा। इसके लिए वो सरकार से आश्वासन भी चाहते हैं। बिजनेट लॉबी की ओर से भेजे गए पत्र के बाद बड़ा सवाल यही है कि आखिर तकनीक के बिना ट्रांसफर किए जाने के बाद भारत में रक्षा उत्पाद को लेकर निर्भरता कैसे खत्म होगी।












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