पूजा खेडकर विवाद के बाद UPSC का बड़ा कदम, परीक्षा केंद्र होंगे हाईटेक
जिस तरह से पिछले कुछ समय से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)सवालों के घेरे में है, उसके बीच अब यूपीएससी ने बड़ा कदम उठाया है। यूपीएससी अब सभी परीक्षा केंद्रों में एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगवाने जा रही है। इसके लिए आयोग ने अनुभवी PSU से टेंडर जमा करने को कहा है।
इस टेंडर के जरिए आयोग लाइव AI-आधारित CCTV निगरानी, आधार-आधारित फिंगरप्रिंट प्रमाणीकरण, उम्मीदवारों की चेहरे की पहचान और ई-प्रवेश पत्रों की QR कोड स्कैनिंग को परीक्षा केंद्रों पर लागू करना चाहता है।

बोली की अंतिम तारीख 29 जुलाई
टेंडर की बोली के दस्तावेज CPP पोर्टल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं। टेंडर के लिए भेजे गए दस्तावेज पर संबंधित अधिकारी का नाम, पद के साथ हस्ताक्षर भी जरूरी हैं। जो भी पीएसयू इस टेंडर में हिस्सा लेना चाहते हैं वो 29 जुलाई 2024 तक अपनी बोलियां जमा कर सकते हैं।
इन बोलियों को 30 जुलाई 2024 को खोला जाएगा। आवेदकों को निर्धारित प्रारूप के अनुसार तीन करोड़ रुपये की बयाना राशि (ईएमडी) या सिक्योरिटी डिक्लेरेशन जमा करना होगा। यह कॉन्ट्रैक्ट तीन वर्षों के लिए होगा। हालांकि यूपीएससी के पास यह अधिकार होगा कि वह इस अवधि में संशोधन कर सकती है।
पूजा खेडकर विवाद के बीच यह कदम
जिस तरह से ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर का मामला सुर्खियों में आया और इसको लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसके बाद यूपीएससी ने यह बड़ा कदम उठाया है।
आरोप है कि पूजा ने यूपीएससी ने सिविल सेवा प्रवेश परीक्षा पास करने के लिए दृष्टि और मानसिक विकलांगता के बारे में झूठ बोला और अपने माता-पिता के नाम बदलने के साथ ही अपनी पहचान को गलत बताया। जिसके बाद यूपीएससी ने उनके चयन को रद्द करने के लिए नोटिस जारी किया है।
पूजा खेडकर मामले की चल रही जांच
पूजा खेडकर द्वारा किए गए कई दावों की पुष्टि के लिए जांच जारी है। जिसमें उनकी शारीरिक विकलांगता की स्थिति और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की स्थिति शामिल है। इन जांचों का उद्देश्य चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
परीक्षा केंद्र होंगे हाईटेक
आयोग एआई निगरानी को लागू करके धोखाधड़ी को रोकने के साथ ही यूपीएससी परीक्षाओं की प्रतिष्ठा को बरकरार रखना चाहता है। AI-आधारित CCTV निगरानी और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसी उन्नत तकनीकों को शामिल करके UPSC अधिक सुरक्षित परीक्षा वातावरण बनाना चाहता है।
चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक के इस्तेमाल से उम्मीदवारों की पहचान सही तरीके से सत्यापित करने में मदद मिलेगी। जिससे नकल की घटनाओं में कमी आएगी। इसी तरह ई-एडमिट कार्ड की क्यूआर कोड स्कैनिंग से परीक्षा केंद्रों पर सत्यापन प्रक्रिया आसान हो जाएगी। ये तमाम उपाय यूपीएससी द्वारा अपनी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखने के प्रयासों के लिहाज से काफी अहम हैं।












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