जानिए क्या है उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का ‘विचार कुंभ’, क्या है इसका मकसद?

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कुंभ मेला एक महत्वयपूर्ण पर्व के रूप में मनाया जाता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं। कुंभ मेला 2019 का आयोजन इलाहाबाद (प्रयाग) में किया जा रहा है, जो जनवरी 15, 2019 से मार्च 04, 2019 तक चलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार इलाहाबाद में कुंभ मेला की तैयारी पूरी होने से ठीक पहले राज्य के कई महत्वपूर्ण शहरों में 'विचार कुंभ' आयोजित कर रही है। इसके पीछे सरकार का मकसद ये बताया जा रहा है कि वो दुनिया को ये बताना चाहती है कि ये सिर्फ एक मेला नहीं है बल्कि ये दुनिया की सबसे पुरानी सांस्कृतिक विरासत है। सूत्रों का कहना कि सरकार योजना बना रही है कि इलाहाबाद कुंभ यहां आने वाले लोगों के लिए विचार और चिंतन की जगह बने और तय हो की किस तरह से देश और समाज में सुधार किए जाने चाहिए। इलाहाबाद कुंभ ठीक लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले हो रहा है और उत्तर प्रदेश की इन चुनावों में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होगी सभी जानते हैं। कुंभ से पहले योगी सरकार के 'विचार कुंभ' आयोजित करने के फैसले के क्या कोई राजनीतिक मायने भी हो सकते हैं? ये हम अपने पाठकों के विवेक पर छोड़ रहे हैं। यहां हम आपको सिर्फ इस कार्यक्रम के बारे में बताएंगे।

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सात आयामों पर 'विचर कुंभ'
आयोजकों में से एक शत्रुघ्न प्रताप सिंह ने कहा कि ये निर्णय लिया गया है कि जीवन और समाज के सात आयाम विचर कुंभ में चर्चा का विषय होंगे। इसमें सद्भाव, पर्यावरण, महिला शक्ति, सर्व समावेश, नेत्र कुंभ और युवा मुद्दे शामिल होंगे। ये सभी कार्यक्रम अयोध्या, वाराणसी, इलाहाबाद, वृंदावन और लखनऊ में आयोजित किए जाएंगे।

विशेष स्थान और विशेष लोग

विशेष स्थान और विशेष लोग

इन विचर कुंभों को आयोजन विशेष स्थानों पर किया जाएगा और इसमें विशेष लोग हिस्सा लेंगे। सामाजिक सद्भावना के कार्यक्रम में विभिन्न जाति और समुदाय के लोग भाग लेंगे, पर्यावरण से संबंधित कार्यक्रम में वैज्ञानिक और पर्यावरणविद शामिल होंगेगे, महिलाओं से संबंधित कार्यक्रम में देश भर से महिलाएं होंगी और जहां तक युवाओं के लिए कार्यक्रम है उसमें 21 से 46 वर्ष की आयु के बीच के लोग शामिल होंगे जो शैक्षणिक संस्थानों से होंगें और कई बुद्धिजीवी और कलाकार भी इसमें शामिल होंगे।
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45 दिन चलेगा ‘नेत्र कुंभ’

45 दिन चलेगा ‘नेत्र कुंभ’

हर एक कार्यक्रम में पांच से छह हजार लोग भाग लेंगे। लखनऊ में 6 दिसंबर को युवा कुंभ होगा, 16 दिसंबर को अयोध्या में सद्भाव कुंभ आयोजित किया जाएगा, 1 और 2 दिसंबर को वाराणसी में पर्यावरण कुंभ, दिसंबर 9 को वृंदावन में महिला शक्ति कुंभ, 30 दिसंबर को समावेशी कुंभ इलाहाबाद में आयोजित होगा इसके अलावा इलाहाबाद में ही 1.5 लाख गरीब लोगों को आंखों से संबंधित चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए नेत्र कुंभ का आयोजन 45 दिनों तक किया जाएगा और वहां उन्हें चश्मे भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

दुनिया में हो पहचान

दुनिया में हो पहचान

इन कार्यक्रमों के लिए नोडल एजेंसियों को भी चिन्हित कर लिया गया है। लखनऊ विश्वविद्यालय, अवध विश्वविद्यालय, काशी विद्यापीठ और आगरा विश्वविद्यालय इन कार्यक्रमों को करेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार कुंभ की पहुंच न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर तक पहुंचाना चाहती है।

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